Secret Of Nature And Civilization | Prakrti And Sabhyata Ka Rahasy | प्रकृति एवं सभ्यता का रहस्य

Prakrti And Sabhyata Ka Rahasy

Secret Of Nature And Civilization : चाहे वह माया सभ्यता में बने रहस्यमयी कैलेंडर हो या मिस्र में बने पिरामिड, चाहे ईस्टर आइलैंड में बने विशाल पत्थरों से मस्तिष्क हो या फिर सिन्धु घाटी सभ्यता का अचानक से गायब हो जाना, ये सब ऐतिहासिक बातें इस तरह की है जिनका जवाब खोजने की जितनी कोशिश की गई, रहस्य उतना ही गहराता गया।

पूरे विश्व के इतिहास पर जब एक नजर डालते हैं तो पाते हैं प्राचीन सभ्यताओं का प्रकृति से एक विशेष रिश्ता होता था। वो प्राकृतिक चीजों जैसे कि सूर्य, चाँद, तारे आदि पर विशेष रूप से केंद्रित होते थे।

लेकिन प्रकृति (Secret Of Nature And Civilization) तो सहस्यमयी है, जो अपना रूप कब बदल लें कोई नही समझ सकता। ठीक इसी तरह कई ऐसी सभ्यताएं भी रही हैं, जिनके द्वारा कुछ ऐसे काम किये हैं, जिनकी वजह आज तक बड़े बड़े वैज्ञानिकों को भी नही पता चल पाई है।

प्रकृति और सभ्यताओं के कुछ ऐसे ही रहस्यमयी घटनाओं की बात आज हम करने वाले हैं।

माया सभ्यता एक प्राचीन सभ्यता है, जिसकी चर्चा सबसे ज्यादा होती है। लोग माया सभ्यता के कैलेंडर की बात करते हैं, उनके द्वारा बनाई गई इमारतों की खूबसूरती की बात करते हैं, लेकिन कोई यह नही जानता कि आखिर इस सभ्यता के लोग कहा गए।

माया सभ्यता के लोग दक्षिण अमेरिका के जंगलों में रहते थे। इस सभ्यता के लोगों का ज्ञान काफी उन्नत था। उन्हें ग्रह, नक्षत्र, चाँद, तारों की बहुत अच्छी समझ थी। लेकिन आज से 1000 से साल पहले माया सभ्यता के लोग कहा यह एक रहस्य ही है।

माया सभ्यता करीब 900 ई तक अच्छा विकास कर रही थी, लेकिन इसके बाद पतन होना शुरू हो गया। पतन के पीछे यह थ्योरी की गई कि ऐसा मौसम में आये बड़े बदलाव के कारण हुआ था।

माया सभ्यता के लोग दूसरी जगहों में रहने लगे। कई इतिहासकारों ने जब 1000 वर्ष पूर्व वहाँ के मौसम का अनुमान लगाया तो पाया कि यह थ्योरी सही है, क्योंकि उस वक़्त ऐसा बदलाव हुआ था।

  • एस्टर आइलैंड (Secret Of Nature And Civilization)

दुनियाँ में बहुत कम ऐसी सभ्यताएं रही हैं जो अपने किसी खास काम के लिए जानी जाती है, इन्ही में से एक प्राचीन सभ्यता एस्टर आइलैंड में थी, जिसने पत्थरों से सिर नुमा आकृति बनाई थी।

अब इस बात की आज तक कोई जानकारी नही मिल पाई है कि आखिर वह सभ्यता कौन सी थी। एस्टर आइलैंड एक वीरान टापू है, जिसके आसपास कोई और दूसरी सभ्यता नही बसी है।

ऐसे में इतिहासकार इस बात का जवाब भी तलाश रहे हैं कि कोई सभ्यता यहां एक वीरान टापू में किस लिए आई थी, और कब तक यहाँ पर रुकी थी।

क्या ऐसा था कि किसी सभ्यता के कुछ लोग इस वीरान टापू में पहुचे हो और फिर ये सिरनुमा आकृति बनाई हो और चले गए हो।

लेकिन फिर प्रश्न यह भी आखिर क्यों इन आकृतियों को बनाया गया था? ऐसी एक दो आकृति होती तो यह भी कहा जा सकता था कि यह शौक के तौर पर बनाया गया होगा।

जब एक के बाद एक कई आकृतियां मिलती है तो इनके अस्तित्व के पीछे कुछ तो वजह रही होगी, जो आजतक हमारे सामने नही आई है।

इन मूर्तियों की खुदाई के बाद यह भी पता चला है कि इनका गले तक का हिस्सा जमीन के नीचे दब गया है। यानी कि ये सिर्फ सिरनुमा आकृति नही थी बल्कि पूरी मूर्ति थी।

  • सिंधु घाटी की सभ्यता (Secret Of Nature And Civilization)

विश्व की सबसे प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक सिंधु घाटी की सभ्यता भारत में सिंधु नदी के किनारे शुरू हुई थी।

यह सभ्यता काफी उन्नत थी। जब बाकी दुनियाँ घर बनाकर रहना सीख रही थी उस वक़्त इस सभ्यता ने अच्छे और साफ सुथरे शहर बनाना सीख लिया था।

शहर में नालियां थी, पानी के निकास का बढ़िया इंतजाम था। इस सभ्यता ने कई लिखित ग्रंथ भी तैयार किये थे। हालांकि उनकी भाषा कुछ इस तरह की थी जिसको आजतक समझा नही जा सका है।

लेकिन अचानक से 1900 BC में इस सभ्यता का विनाश शुरू हो गया। कुछ इतिहासकारों ने शुरू में यह कहा कि इस सभ्यता के लोग दक्षिण भारत चले गए थे, क्योंकि आर्यों ने कथित रूप से भारत पर हमला किया और उस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया।

लेकिन यह थ्योरी जल्द ही गलत साबित हो गई, जब पता चला कि सभ्यता के विनाश का कारण मौसम परिवर्तन था। मानसून का क्रम 200 साल तक बिगड़ गया, जिससे कि कृषि करना लगभग नामुमकिन था।

  • खिसकने वाला पत्थर (Secret Of Nature And Civilization)

अमेरिका के कैलिफोर्निया शहर में एक रेगिस्तानी इलाका है, जहाँ पर एक बड़ी रहस्यमय घटना कई सालों से हो रही है।

यहाँ के कई पत्थर जिनके वजन करीब 300 किलोग्राम तक है, वह इस बंजर, वीरान क्षेत्र में 250 मीटर से भी ज्यादा खिसक आते हैं।

वैज्ञानिक इस बात से अचंभित है, आखिर ये पत्थर खुद कैसे खिसक सकते हैं, जबकि इनका वजन इतना अधिक है।

इसमे से कुछ पत्थर सीधे बढ़ रहे हैं वही कुछ ऐसे भी हैं जो एक सीध में आगे बढ़ने के बाद अचानक दाएं या बाएं तरफ मुड़ जाते हैं।

पर गुत्थी काफी वक्त तक एक गुत्थी बनी हुई थी। इसके बाद कमान संभाली नासा के वैज्ञानिकों ने, जिन्होंने ठीक वैसा की प्रोटोटाइप मॉडल बनाकर तैयार किया जैसा कि उस रेगिस्तानी इलाके में था।

सभी पैरामीटर को वैसा ही करने के बाद इस पर प्रयोग करना शुरू किया गया। प्रयोग में यह निकल कर आया कि ये पत्थर ठंडे मौसम में बर्फ और नमी से फिसलकर यहां तक आ जाते हैं।

लेकिन गर्मी में ये नमी सूख जाती है और पीछे रह जाते हैं वो निशान जो उस पत्थर ने बनाये थे।

  • केरल में खून की बारिश (Secret Of Nature And Civilization)

बात आज से दो साल पुरानी जब केरल के लोग बारिश देखकर डर गए। वजह थी बारिश के पानी का रंग। बारिश का पानी ठीक वैसा ही देखने मे लग रहा था, जैसे खून लगता है।

इस वजह से लोगो मे यह बात फैल गई कि आसमान से खून की बारिश हुई है। वैज्ञानिक भी इस बात से काफी अचम्भित थे कि आखिर ये किस तरह की बारिश है, और इसके पीछे का कारण क्या है।

फिर वैज्ञानिकों ने इस पानी की जाँच करने की सोची और पहला टेस्ट किया। इसमें पता चला कि यह पानी की तरह ही है। इसमे कुछ अलग तरह की चीज़ें नही मिली है।

लेकिन दूसरे टेस्ट ने आम लोगो के साथ दुनियाँ भर के वैज्ञानिकों की नींद उड़ा दी जब पता चला कि इस पानी मे DNA ले 6 सैंपल मौजूद है।

यह पता चलते ही दुनियाँ भर के वैज्ञानिक इस पर शोध करना चाहते थे। कुछ वैज्ञानिकों ने तो यह तक कहा कि इसका संबंध कही न कही एलियंस से है।

लेकिन बात सिर्फ थ्योरी पर ही अटक कर रह गई और अभी तक वैज्ञानिक उस खूनी बारिश का कोई सटीक कारण नही समझ पाए हैं।

  • जोधपुर बूम

18 दिसम्बर 2012 को जोधपुर में एक इतना जोरदार धमाके के आवाज आई कि पूरे शहर में सुनाई दी। लोग हैरान और परेशान थे कि ये कैसी आवाज थी। यह आवाज ठीक उसी तरह थी जैसे कि supersonic Plane गुजरा हो।

या कोई ऐसा Plane Crash हो गया हो। लेकिन जब लोगो ने एक दूसरे से पूछा तो पता चला कि ऐसी किसी चीज़ को उन्होंने गुजरते हुए नही देखा।

बाद में जब एयरफोर्स तक बात पहुची तो तो उन्होंने भी सफाई दिया कि उस दिन उनका कोई भी Fighter jet वहाँ से नही गुजरा और न ही किसी तरह का अभ्यास Airforce ने किया है।

यह घटना आज भी एक रहस्य बना हुआ है। कई वैज्ञानिक इस घटना के शोधकार्य में लगे हुए है, पर अभी तक कोई सटीक जवाब नही मिल सका है।

  • मिश्र के पिरामिड

मिश्र के पिरामिड पूरी दुनियाँ के लिए कौतूहल का केंद्र है, इसी वजह से ये विश्व के अजूबों में से एक है। मिश्र में करीब 5000 से ज्यादा पिरामिड है, जिसमें से कई नष्ट हो चुके हैं, तो कुछ को आंशिक छति हुई है।

इन सभी1 पिरामिडो में गीजा का पिरामिड सबसे बड़ा है। मिश्र में पिरामिडों के अलावा दूसरा रहस्य ममी का है। यहां कई प्राचीन ममियां मिली है, जिन्हें किस मकसद के लिए सुरक्षित रखा गया था, यह अभी तक अनसुलझा है।

मिश्र के लोग पुनर्जन्म में यकीन करते थे, इसलिए उनका मानना था कि आत्मा फिर से अपने शरीर मे प्रवेश करती है। लेकिन यह बस एक थ्योरी है, सच्चाई क्या थी वह अभी तक नही पता चल पाया है।

वही पिरामिड बनाने का पीछे क्या मकसद था यह भी अभी तक अनसुलझा है। इन पिरामिडों को बनाने में भारीभरकम पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है, जिसमे से कुछ का वजन तो 1 टन के बराबर है।

ऐसे में यह प्रश्न भी उठता है कि आखिर किस तरह से इन पत्थरों को वहां तक खींच कर लाया गया जबकि उस जमाने मे आज की तरह आधुनिक मशीनें भी नही थी।

इसके साथ ही इन पिरामिडों को बनाने में जिन पत्थरों का उपयोग किया गया है, वो पत्थर भी वहां आसपास नही मिलते। ऐसे में यह भी प्रश्न उठता है कि आखिर किस तरह से इतने भारी पत्थरों को किसी दूर इलाके से लाया गया होगा।

इन पिरामिडों के रहस्य को जितना सुलझाने की कोशिश की जा रही है, उतना ही उलझते जा रहे है, क्योंकि कि कोई न कोई नई जानकारी कुछ नए प्रश्न खड़े कर देती है।