Save your daughter teach your daughter in Hindi | Essay on beti bachao beti padhao

Save your daughter teach your daughter in Hindi

Essay on save your daughter teach your daughter: 2015 में देश मे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (Beti bachao beti padhao) योजना की शुरुआत हुई थी। इस योजना का उद्देश्य था महिलाओं और बेटियों का समुचित विकास और समाज मे उन्हें उचित स्थान दिलाना।

इसी विषय पर आज हम आपके लिए Essay on beti bachao beti padhao in hindi लेकर आए हैं।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ निबंध को आप अपनी सभी परीक्षाओं में उपयोग कर सकते हैं।

Table of Contents

Essay on Save your daughter teach your daughter (Essay on beti bachao beti padhao in hindi) (300Words)

प्रस्तावना

भारतीय सभ्यता दुनिया की कुछ प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक है। आज से हजारों वर्ष पूर्व भारतीयों द्वारा ही निर्मित वेद और शास्त्रों में बताया गया है कि स्त्री का महत्त्व समाज में बहुत ज्यादा है।

हर युग में स्त्री के महत्व को समझा गया है और उन्हें अपने शब्दों में वर्णन किया गया है।

स्त्रियों को घर की लक्ष्मी की उपमा दी गई है ऐसा भी कहा गया है कि जहां स्त्री का सम्मान होता है वहां देवता निवास करते हैं।

लेकिन फिर भी काफी लोग हमारे देश में ज्ञान की महत्वपूर्ण बात को भूल चुके हैं तभी उन्होंने स्त्रियों को हेय दृष्टि से देखना शुरू कर दिया है।

ऐसे ही कुछ घटिया मानसिकता वाले लोगों की वजह से स्त्रियों की स्थिति दिनोंदिन बिगड़ती गई जिसे सुधारने के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे अभियान शुरू करने पड़ा।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम की शुरुआत (save your daughter teach your daughter program start)

हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के द्वारा वर्ष 2015 में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना शुरू की गई।

जैसा कि इस योजना के नाम से ही स्पष्ट होता है कि यह योजना देश की बेटियों के उत्थान के लिए है।

इस योजना के जरिए देश के हर एक नागरिक को इस बात के लिए प्रेरित किया गया कि वह कन्या भ्रूण हत्या जैसे जघन्य अपराध करने से बचे साथ ही अपनी बेटियों की शिक्षा पर भी उतना ही जोड़ दें जितना अपने बेटों की शिक्षा पर देते हैं।

हमारे देश की आबादी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है। यदि इस आबादी का आधा हिस्सा यानी महिलाएं शिक्षित नहीं होगी और सशक्त नहीं होगी तो इस देश का संपूर्ण विकास होना बहुत मुश्किल है।

देश की महिलाएं शिक्षित हो सुरक्षित और सशक्त रहे इसी उद्देश्य हेतु बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना शुरू की गई।

उपसंहार

ऐसा नहीं है कि इस देश के हर एक नागरिक महिला विरोधी हैं लेकिन कुछ लोगों की घटिया सोच ने महिलाओं को उनका उचित स्थान नहीं दिया है।

इस वजह से महिलाओं की स्थिति इतनी बेहतर नहीं है जितना होना चाहिए लेकिन इस योजना के जरिए महिलाओं की स्थिति में बहुत ज्यादा सुधार हुआ है और आगे भी सुधार होने की पूरी उम्मीद है।

Save your daughter teach your daughter speech (beti bachao beti padhao speech in hindi)

Slogan on Save your daughter teach your daughter (Slogan on beti bachao beti padhao in hindi)

लाखों गुलाब आँगन में लगा लेने से वह इतना नहीं महकता बेटी के पायल की झाँकर आँगन को महका जाती है

आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय/ महोदया सभी उपस्थित शिक्षकगण एवं मेरे प्यारे भाइयों और बहनों

आज हम सब इस मंच पर एकत्रित हुए हैं बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना पर अपने विचार रखने के लिए।

इस अवसर पर मुझे भी अपने विचार रखने का मौका मिला इसका मैं तहे दिल से आप सब का आभार व्यक्त करता हूं/ करती हूं।

हमारे समाज का समुचित विकास हो सके और हमारा देश विकास पथ पर इसी तरह आगे बढ़ता रहे इसके लिए यह बहुत ज्यादा जरूरी है कि हमारे देश की महिलाएं सशक्त हो।

शक्ति से तात्पर्य ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि हमारी महिलाएं किसी से भी कमजोर है लेकिन सामाजिक स्तर पर महिलाओं के साथ जो भेदभाव होते हैं कहीं ना कहीं उनकी वजह से हमारे देश की महिलाएं अपनी पूरी क्षमता को उजागर नहीं कर पाती है और इस बात का असर हमारे देश के सामाजिक विकास और आर्थिक विकास में पड़ता है।

इसी कमी को दूर करने के लिए श्री नरेंद्र मोदी के द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना शुरू की गई।

इस योजना का मकसद देश के लोगों को यह बताना है कि बेटों और बेटियों में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। दोनों की शिक्षा एक बराबर महत्वपूर्ण है।

लेकिन यह योजना अचानक नहीं आई है इस योजना के लिए पृष्ठभूमि बहुत पहले से बनकर तैयार हो गई थी।

2001 की जनगणना के अनुसार हमारे देश में लड़के लड़कियों का अनुपात 1000 लड़कों में 927 लड़कियों था जो कि 2011 में घटकर 1000 लड़कों में 918 लड़कियों का हो गया।

जनगणना का यह आंकड़ा निश्चित रूप से थोड़ा डराने वाला जरूर है।एक देश जहां स्त्रियों के महत्व के बारे में बहुत ज्यादा लिखा गया है, जहां नवरात्रि के 9 दिन लोग स्त्री शक्ति की पूजा करते हैं, जहां स्त्री को घर की लक्ष्मी और बेटी को देवी स्वरूप मानकर उसके पैर छूते हैं उसी देश में लड़कियों की दिनों-दिन घटती जनसंख्या चिंता का विषय तो जरूर है।

लड़की और लड़कियों के अनुपात में इतना बड़ा अंतर कहीं ना कहीं दर्शाता है कि समाज में लड़कियों को बोझ समझा जाता है।

इन्हें जन्म से पहले ही मार दिया जाता है और जिन लड़कियों का जन्म हो जाता है उन्हें शिक्षा के उचित अवसर उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं।

शिक्षा की कमी के कारण महिलाएं ना तो अपनी सुरक्षा कर पाती और आगे चलकर अपने परिवार की सुरक्षा नही कर पाती है।

इस तरह से हमारा सामाजिक तंत्र कमजोर होता जा रहा है जिसकी सिर्फ और सिर्फ एकमात्र वजह महिलाओं की कमजोरी है।

सामाजिक स्तर पर व्याप्त इन्हीं सब कमजोरियों को दूर करने के लिए हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना शुरू किया।

उन्होंने लोगों से अपील की कि वह कन्याओं को जन्म लेने दे उनकी भ्रूण हत्या ना करें उन्हें भी उचित शिक्षा के अवसर प्रदान कराएँ उनकी शिक्षा में किसी तरह की बाधा उत्पन्न ना हो इस बात को भी लोग सुनिश्चित करें।

इस योजना का क्रियान्वयन सफल रूप से हो सके इसके लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को 100 करोड़ रुपए आवंटित बीह किए हैं।

आखिर में कुछ पंक्तियों के साथ में अपने शब्दों को विराम देना चाहूँगा/चाहूँगी

मत रुलाओं नारी को वरना जिंदगी तुम्हारी भी नासूर होगी
लड़के पैदा कर रहे हो लेकिन इनसे विवाह करने वाली कौन होगी,
कौन जन्म देगा, किसको माँ बुलाओगे,
अरे लड़कियों को मिटाते-मिटाते एक दिन तुम खुद ही मिट जाओगे।

धन्यवाद

Essay on Save your daughter teach your daughter (Essay on beti bachao beti padhao in hindi) (1500Words)

प्रस्तावना

21वीं सदी का भारत दुनिया का तेजी से विकास करता हुआ एक देश है जिसने हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज की है। हमारा देश आज मिसाइलें बनाता है, दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।

चांद और मंगल पर पहुंचने वाले कुछ देशों में से एक है लेकिन जब देश की महिलाओं की स्थिति की बात आती है तो यहां पर हमें थोड़ा सा शर्मसार होना पड़ता है क्योंकि सामाजिक स्तर पर महिलाओं के साथ हमारे देश में काफी भेदभाव किया जाता है।

हमारे देश में आज भी कुछ लोग दकियानूसी सोच के गुलाम है जो लड़के और लड़कियों में भेद करते हैं। इन्हीं वजहों से लड़कियों को उचित शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे मूलभूत सुविधाएँ नहीं मिल पाती।

जिसके कारण उनका सर्वांगीण विकास नहीं हो पाता इन्हीं सब परेशानियों को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का शुरुआत की गई है।

प्रधानमंत्री बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना (Beti bachao beti padhao Prime Minster Scheme)

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (save your daughter teach your daughter scheme) योजना का उद्घाटन देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 को हरियाणा के पानीपत जिले में किया था।

इस योजना को शुरू करने का प्रमुख उद्देश्य लड़कियों को सुरक्षा प्रदान करना और शिक्षित करना था यह योजना स्वास्थ्य मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, परिवार कल्याण मंत्रालय एवं मानव संसाधन विकास के द्वारा संयुक्त रूप से संचालित की जाती है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का उद्देश्य (Purpose of Beti Bachao Beti Padhao scheme)

हमारे देश में लड़का और लड़कियों के बीच का लिंगानुपात हर वर्ष बढ़ता ही जा रहा है। हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे कुछ राज्यों में यह अंतर बहुत ज्यादा है यदि सिर्फ हरियाणा की बात की जाए तो यहां 1000 लड़कों पर 775 लड़कियाँ हैं।

कुछ ऐसा ही हाल बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का भी है। इस योजना के प्रथम चरण में इन्हीं राज्यों के ऊपर विशेष ध्यान दिया गया है। हालांकि अभी यह योजना पूरे देश में लागू हो चुकी है।

इस योजना के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित है

  • बालिकाओं की शिक्षा पर जोर देना और उन्हें शिक्षित बनाना।
  • महिलाओं और बालिकाओं के प्रति समाज में जो रूढ़िवादी सोच व्याप्त है उसे दूर करना।
  • कन्या भ्रूण हत्या पर रोकथाम लगाना एवं समाज को बालिकाओं के महत्व को समझाना।
  • बालिकाओं को सशक्त बनाना ताकि वह समाज और देश के विकास में अपना अहम योगदान दे सकें।
  • बालिकाओं के साथ समाज में जो लिंग आधारित भेदभाव किया जाता है उसे दूर करना और बालिकाओं को भी बालकों के समान हर क्षेत्र में उचित अवसर प्रदान करना

हमारे समाज में बालिकाओं की बुरी स्थिति का कारण

जब कोई भारतीय समाज को गहराई से देखता और समझता है तो यह पाता है कि यहां पर दो प्रकार के लोग रहते हैं।

जिनमें से पहले वह लोग हैं जो महिलाओं को उचित सम्मान देते हैं और उन्हें समाज के विकास के लिए अहम कड़ी मानते हैं।

वहीं दूसरी तरफ ऐसे व्यक्ति भी हैं जो महिलाओं के विकास और भागीदारी को ज्यादा महत्व नहीं देते हैं और इसी वजह से उन्हें हमेशा आगे बढ़ने से रोकते हैं।

हमारे समाज में आज महिलाओं की जो बुरी स्थिति है उसके कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं

लैंगिक भेदभाव

हमारे समाज में लिंग के आधार पर लड़का और लड़की में भेदभाव किया जाता है। समाज में ऐसी सोच व्याप्त है कि लड़का बुढ़ापे का सहारा होता है जबकि लड़कियाँ शादी होने के बाद अपने ससुराल चली जाती हैं।

वही घर के समस्त जिम्मेदारियों का बोझ भी लड़का ही उठाता है, पैसे कमाने का काम भी लड़का ही करता है जबकि लड़कियाँ सिर्फ घर संभालने का काम ही कर सकती है इसी वजह से लड़कियों की शिक्षा पर ज्यादा जोर नहीं दिया जाता।

दहेज प्रथा

दहेज प्रथा के कारण भी लोग लड़कियों को जन्म नहीं लेने देते और अपने जन्म लेने से पहले ही मरवा देते हैं।

लोगों का यह सोचना होता है कि यदि घर में बेटी का जन्म हो गया तो उसकी शादी में भारी-भरकम खर्च आएगा दहेज के नाम पर।

बहुत सारा पैसा लड़की की शादी में देना पड़ेगा इन्हीं सब परेशानियों से बचने के लिए लोग लड़की को जन्म ही नहीं लेने देते और लड़की के भ्रूण की हत्या करवा देते हैं।

पराया धन मानने की मानसिकता

बेटियों के बारे में हमेशा यही सोच रहती है कि बेटी तो पराया धन होती है जबकि बेटा अपना धन होता है। इसी सोच की वजह से बचपन से ही बेटे और बेटी के बीच भेदभाव किया जाता है।

बेटियों को इतनी सुविधाएँ नहीं दी जाती जितना बेटों को दी जाती हैं। साथ ही बेटों को जितनी आजादी मिलती है बेटियों को इतनी आजादी नहीं मिलती है।

शिक्षा की कमी

शिक्षा की कमी के चलते हमारे देश में महिलाओं और बेटियों की स्थिति खराब है। शिक्षा को पहले उतना ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं समझा जाता था लेकिन जैसे-जैसे भारत विकास करता गया और नौकरियों का सृजन होता गया वैसे-वैसे लोग शिक्षा के महत्व को समझने लगे।

लेकिन आज भी लोग बेटियों की शिक्षा पर उतना ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं जितना बेटों की शिक्षा पर करते हैं।

कई जगहों पर बेटियों की शिक्षा सिर्फ इस वजह से नहीं हो पाती क्योंकि वहां पर शिक्षा के पर्याप्त साधन मौजूद नहीं होते हैं।

कुछ लोग सुरक्षा की दृष्टि से अपनी बेटियों को घर से ज्यादा दूर पढ़ने के लिए नहीं भेजना चाहते हैं।

लड़कियों की शादी भी कुछ जगहों पर बहुत जल्दी कर दी जाती है और शिक्षा पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता, क्योंकि लोगों के अनुसार लड़की पढ़ लिख कर क्या करेगी उसे तो घर का काम ही संभालना है।

समाज में बेटियों की खराब स्थिति के दुष्परिणाम

समाज में बेटियों की खराब होती स्थिति ना सिर्फ समाज के लिए हानिकारक है बल्कि देश के उत्थान के लिए भी बहुत नुकसानदायक है।

समाज में बेटियों की खराब स्थिति के कारण जो दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं वह निम्नलिखित है:-

लड़कियों की जनसंख्या में भारी कमी

हमारे देश में दिनोंदिन लड़का और लड़कियों का लिंगानुपात कम होता जा रहा है। 1990 में 1000 लड़कों पर 945 लड़कियाँ होती थी जो घटकर के 2011 में 1000 लड़कों पर सिर्फ 918 लड़कियाँ है।

यूनिसेफ ने एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें उन्होंने बताया था कि भारत में इस वक्त 5 करोड़ लड़कियों की कमी है।

यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। समाज में लड़कियों का एक उचित स्थान है कुछ जिम्मेदारियां हैं जो सिर्फ लड़कियाँ ही निभा सकती है लेकिन लड़कियों की संख्या में भारी गिरावट एक चिंता का विषय है।

लड़कियों के प्रति बढ़ते अपराध की घटनाएँ

हमारे देश की बालिकाएँ सशक्त नहीं है, उन्हें उचित शिक्षा नहीं दी जाती है हर चीज का सही ज्ञान नहीं दिया जाता है इसी वजह से कई बुरी मानसिकता के लोग लड़कियों को शोषित करते हैं।

इसमें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह का शोषण शामिल होता है। हर दिन हम लड़कियों के साथ किसी न किसी तरह के अपराध की घटना समाचार पत्र में पढ़ते ही रहते हैं।

लेकिन जब तक हमारे देश में लड़कियों की स्थिति अच्छी नहीं होगी दुर्भाग्यवश में ऐसी घटना सुनने को मिलती ही रहेगी।

देश के विकास पर पड़ता नकारात्मक प्रभाव

हमारी देश की लगभग आधी आबादी महिला है ऐसे में महिलाओं का योगदान भी देश के विकास में जरूर होना चाहिए।

लेकिन महिलाओं की कुल जनसंख्या का बहुत ही कम हिस्सा देश के विकास में अपना योगदान दे पाता है। यदि हम विकसित देशों की बात करें तो हम देखते हैं कि पुरुष के साथ साथ महिलाएँ भी हर क्षेत्र में कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं।

लेकिन हमारे देश में अभी यह समानता देखने को नहीं मिलती है जिसका प्रभाव हमारे देश के विकास में पड़ता है।

लड़कियों की स्थिति बेहतर करने के कुछ जरूरी उपाय (Some important measures to improve the condition of girls)

हर बुराई से लड़ा जा सकता है, हर बुराई का अंत होता है, हम अपने इतिहास से ही हमें सबक मिलता हैं। किसी ने नहीं सोचा था कि कभी भी भारत में सती प्रथा रुकेगी, लेकिन इस सामाजिक कुरीति का भी अंत हुआ।

यदि हम कुछ जरूरी बिंदुओं पर ध्यान दें तो हम आज भी महिलाओं की स्थिति को काफी बेहतर कर सकते हैं

महिला शिक्षा पर जोर

यदि हमारे देश की बालिकाएँ शिक्षित होंगी तो वह हर चीज के प्रति सजग होगी। इसलिए हमें सबसे पहले बालिकाओं की शिक्षा पर जोर देना चाहिए।

हमें सामाजिक स्तर पर लोगों को जागरूक करना चाहिए कि वह भी लड़कियों की शिक्षा को उतना ही महत्व दे जितना लड़कों को शिक्षा को देते हैं।

साथ ही सरकारी योजनाओं का भी बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। सरकार को कई ऐसी लाभकारी योजनाएं शुरू करना चाहिए जो बालिकाओं की शिक्षा को कम खर्चीला बना सके।

भ्रूण जाँच पर रोक

भ्रूण जाँच पर वैसे तो आज प्रतिबंध है लेकिन फिर भी चोरी छुपे लोग जाँच करवा ही लेते हैं और अवैध तरीके से भ्रूण हत्या भी करवाते हैं।

हमें कुछ और भी सख्त कानून बनाने की जरूरत है जिससे ऐसी घटनाएं होना बंद हो।लिंग जांच करने से संबंधित जो भी मशीनें हैं उनका आसानी से मिलना प्रतिबंधित होना चाहिए।

रोजगार में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाना

कई लोग ऐसा सोचते हैं कि लड़कियाँ पैसा नहीं कमा सकती इस वजह से वह किसी काम की नहीं है।

लेकिन यदि लड़कियों को रोजगार से जोड़ दिया जाए और वह भी अपने परिवार को आर्थिक सहायता दे सके तो परिवार और समाज की सोच लड़कियों के प्रति बदल सकती है।

ऐसा करने के लिए हम कुछ क्षेत्रों में लड़कियों की भागीदारी बढ़ा सकते हैं साथ ही साथ कुछ ऐसे क्षेत्र सुनिश्चित करें जहां पर सिर्फ लड़कियाँ ही काम कर सकती हो।

दहेज प्रथा जैसी कुरीति पर रोक

दहेज प्रथा एक सामाजिक कुरीति है लेकिन इस पर रोक लगाने के बारे में कोई नहीं सोचता सरकार को इस बारे में विशेष ध्यान देना चाहिए।

सरकार को कुछ ऐसी योजनाएं भी लानी चाहिए जिससे परिवार को इस बात की चिंता नहीं रहे कि वह अपनी बेटी की शादी किस तरह से कर पाएंगे।

लड़कियों की सुरक्षा के लिए बने सख्त कानून

हमारे देश में लड़कियों से जुड़ी कई तरह के अपराध होते हैं जिसमें से बलात्कार जैसी घटनाएँ सबसे प्रमुख है।

इसके अलावा घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना जैसे कई अन्य अपराध भी शामिल है। इन सब से मुक्ति पाने के लिए बालिकाओं एवं महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई सख्त कानून की जरूरत है।

हालांकि आज भी कई ऐसे कानून मौजूद है जो कि काफी कठोर है लेकिन फिर भी कुछ ऐसे और कानून बनाने की जरूरत है जिनका डर अपराधियों के मन में हो।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ निष्कर्ष (Conclusion of save your daughter teach your daughter)

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना इस बात की शुरुआत है कि अब हमारे देश में महिलाओं के उत्थान के लिए भी प्रयास शुरू किए गए हैं।

सुकन्या लक्ष्मी योजना जैसे कई अन्य योजना भी महिलाओं पर ही केंद्रित हैं लेकिन यह समाज इतना जल्दी बदलने वाला नहीं है।

इसकी सोच बदलने में काफी वक्त लगेगा लेकिन हमें कोशिश करते रहना चाहिए क्योंकि कोशिश करने से ही बदलाव आता है और एक दिन हमारे देश में भी ऐसा बदलाव आएगा जहां महिलाओं को एक बार फिर ऊंचा स्थान दिया जाएगा।

beti bachao beti padhao

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर कविता (Save your daughter teach your daughter poem)

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ एक ऐसी योजना है जो महिलाओं के उत्थान के पूरे समाज को जाग्रत कर रही है। इस योजना के शुरू होने से एक बार भी लेखकों की कलम को स्याही मिल गई है।

कई लोग इस योजना से जुड़ी किसी अच्छी कविता की तलाश में रहते हैं। तो आज आपके लिए एक बहुत ही खूबसूरत कविता लेकर आए हैं जो अभिषेक मिश्र के द्वारा लिखी गई है:-

बेटी है जग का आधार (अभिषेक मिश्र)

जब माँ हीं जग में न होगी
तो तुम जन्म किससे पाओगे ?……..
जब बहन न होगी घर के आंगन में
तो किससे रुठोगे, किसे मनाओगे ?………
जब दादी-नानी न होगी
तो तुम्हें कहानी कौन सुनाएगा ?…
जब कोई स्वप्न सुन्दरी हीं न होगी
तो तुम किससे ब्याह रचाओगे ?……
जब घर में बेटी हीं न होगी
तो तुम किस पर लाड लुटाओगे ?…..
जिस दुनिया में स्त्री हीं न होगी
उस दुनिया में तुम कैसे रह पाओगे ?……
जब तेरे घर में बहु हीं न होगी
तो कैसे वंश आगे बढ़ाओगे ?…..
नारी के बिन जग सूना है
तुम ये बात कब समझ पाओगे ?….

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर प्रश्नोत्तरी (beti bachao beti padhao)

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना कब शुरू हुई थी?

यह योजना 22 जनवरी 2015 को शुरू हुई थी।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का शुभारंभ कहा हुआ था?

इस योजना का उद्घाटन हरियाणा के पानीपत जिले में 2015 में हुआ था।

प्रधानमंत्री बेटी बचाओ योजना क्या है?

देश की बेटियाँ मजबूत बन सकें, शिक्षित हो इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना शुरू की गई थी।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस योजना का मुख्य उद्देश्य समाज को यह समझाना है कि वह नारी शक्ति को भी उचित सम्मान दे। समाज मे पितृसत्ता के एकाधिकार को खत्म करना है और देश ही महिलाओं के प्रति समाज के सोच में बदलाव लाना है।