Imaginative Essay in Hindi | कल्पनाशील निबंध हिंदी में

Essay on Imaginative and scientists in hindi

‘Imaginative Essay’ जिसका हिंदी में अर्थ एक काल्पनिक निबंध के विषय से होता है। काल्पनिक निबंध (Essay on Imaginative) वास्तव में एक प्रकार की लघुकथा है। जिसमें छात्रों को किसी विशेष रूप से ऐतिहासिक, स्थान, शानदार स्थिति की कल्पना करने के लिए कहा जाता है। कल्पना करने की क्षमता बच्चों में बाल्यावस्था से ही विद्यमान रहती है। किसी विशेष चिन्ह की ओर इंगित करते हुए काल्पनिक निबंध विशेषकर बच्चों के लिए काफी अधिक महत्वपूर्ण साबित होता है। काल्पनिक निबंध में बच्चे कई तरह के कल्पना करते हैं जिसमें वे अक्सर कुछ अलग बनने की कामना रखते हैं।

बच्चों में कई तरह के काल्पनिक विचार प्रकट होते हैं जैसे काश यदि मैं प्रधानमंत्री होता, यदि मैं शिक्षा मंत्री होता, यदि मैं करोड़पति होता, यदि मैं डॉक्टर होता, यदि मैं पुलिस होता, यदि मैं वैज्ञानिक होता इत्यादि। बच्चे सदा अपने काल्पनिक विचारों से प्रभावित रहते हैं और उसे सच करने के विचार अपने भीतर मन तक बसा लेते हैं। इस काल्पनिक निबंध की भिन्नता के कारण कुछ निबंध पर विशेष प्रतिक्रिया की आवश्यकता होती है। तो कुछ काफी बेहतरीन तरीके से प्रदर्शित करते हैं।

उचित कौशल और अनुभव के साथ काल्पनिक निबंध आसानी से लिखा जा सकता है। हालांकि, यदि आपके पास साहित्यिक और कलात्मक क्षमताओं के रूप में इस तरह के गुण की कमी है, तो भी आप एक अच्छा निबंध लिख सकते हैं। यहां हम आपको एक काल्पनिक निबंध लिखने के विषय में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां देंगे

1. जब आप एक काल्पनिक निबंध (Essay on Imaginative) लिखना चाहते हैं तो उस समय आप एक सबसे असाधारण विषय से शुरुआत कर सकते हैं। जिसका लाभ यह होता है कि इसमें आपके विचार प्रकट होते हैं। जिसमें किसी और के विचार की दखलंदाजी नहीं होती है तथा इसके साथ आपके सोचने की शक्ति बढ़ती है।

2. यदि आप एक काल्पनिक निबंध (Essay on Imaginative)लिखना चाहते हैं तो बिल्कुल भी प्रतीक्षा न करें और जितनी जल्दी हो सके आप इसे लिखना शुरू कर दें। क्योंकि इसमें आपके विचार समक्ष रूप से प्रकट होते हैं।

3. आप अपने निबंध में जिस भी स्थिति का वर्णन करना चाहते हैं वह शानदार होना चाहिए। आपको यथार्थवादी और कल्पना के बीच संतुलन रखना चाहिए जिससे शिक्षक आपके कार्य से प्रसन्न हो जाएं।

4. आपको अपने काल्पनिक निबंध (Essay on Imaginative) में अप्रत्यक्ष भाषण से बचना चाहिए। क्योंकि काल्पनिक निबंध एक लघु कथा है इसलिए आपको एक लंबी कहानी लिखने से बचना चाहिए यदि आप ऐसी गलती करते हैं तो आपके निबंध को कोई नहीं पढ़ेगा।

5. आपके निबंध में एक संदेश शामिल होना चाहिए। इसके साथ ही आपके निबंध (Essay on Imaginative) को अपने से ऐसा लगना चाहिए कि आपका निबंध एक निश्चित विचार की ओर ध्यान करने की कोशिश करता हो।

6. जब आप अपने निबंध को पढ़ेंगे। तब इसमें शब्दों की अस्पष्टता का एहसास होना चाहिए। बेटा शैली और व्याकरण के लिए कागज का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके साथ ही आपको अपनी कल्पना और रचनात्मक विचारों की आवश्यकता भी होनी चाहिए। एक मनुष्य क्षमताओं से भरा होता है इसीलिए आप भी लिखना शुरू करें।

काल्पनिक निबंध (Essay on Imaginative) किस प्रकार लिखा जाता है इसे आप एक उदाहरण के तौर पर समझ सकते है जैसे यदि ‘मैं एक वैज्ञानिक होता’। काल्पनिक निबंध के इस शीर्षक में बालक के द्वारा उसके मन में किसी विशेष रूचि को प्रकट करता है। जो विज्ञान से संबंधित होता है। वह अपने विचार से प्रभावित होकर एक ऐसी कल्पना करता है जिससे कि वह एक वैज्ञानिक बन सकता है और उससे संबंधित जीवन में कार्य कर सकता है।

यदि मैं एक वैज्ञानिक होता (If I Were Scientists in Hindi)

मेरे अंतर्मन में अक्सर यह विचार प्रकट होते हुए मुझसे सवाल करते हैं कि क्या होता यदि मैं एक वैज्ञानिक होता?

क्योंकि आज विज्ञान का युग है और वहीं वैज्ञानिक होना गर्व और प्रतिष्ठा की बात है। आज जितनी तेजी से अपना समाज और विश्व बदल रहा है उस नजरिये से वैज्ञानिकों का बहुत बड़ा हाथ है। कहा जाता है भारत एक समय ज्ञान में विश्व गुरु था। और इसी ज्ञान से पूरी दुनिया में विज्ञान फैली हुई है। वैसे भारत में भी पुराने ज़माने में एक से एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पैदा हुए हैं और आज भी हमारे वैज्ञानिक विश्व भर में अपनी प्रतिष्ठा को प्रदर्शित करते रहते हैं। उनके आविष्कारों के लिये आज पूरे विश्व भर में प्रशंसा की जाती है। भारत के वैज्ञानिक पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के द्वारा ही भारत परमाणु शक्ति जैसे देशों में अग्रसर हो सका है। इसी प्रकार भारत के इसरो के वैज्ञानिक भी पूरी दुनिया में अपनी अमिट छाप छोड़ने के लिये तैयार हैं।

आज रूस अमेरिका और इजरायल जैसे महान देशों ने भी भारत की वैज्ञानिक तथ्यों को काफी सराहनीय बताया है। लेकिन आज भी हमारी तकनीक और वैज्ञानिक संस्था इतनी आगे नहीं बढ़ सकी है की भारत को शीर्ष स्थान में गिना जा सके। अक्सर इस पूरे संसार का नियम रहा है कि जिस देश की तकनीकी और वैज्ञानिक पकड़ मजबूत होगी वही देश पूरी दुनिया पर शासन करने के योग्य बन सकेगा। भारत ने अभी तक केवल अपने ज्ञान से ही सब को प्रकाशित किया है। अतः यह भी जरूरी है की जब भारत से पूरा विश्व वैज्ञानिक तकनीक की शिक्षा प्राप्त करे।

यदि मैं वैज्ञानिक होता, तो इस क्षेत्र में नए अविष्कार की खोज करके समाज को और पूरे विश्व को एक नई दिशा की ओर ले जाने की चेष्टा करता। क्योंकि आज तकनीक इतनी आगे बढ़ चुकी है कि लोगों को इस तकनीक का गलत उपयोग उठा रहे हैं। मैं अपने खोज से भारत को सर्वश्रेष्ठ बनाने की कोशिश करता। ताकि भारत पुनः अपने विश्व गुरु के स्थान को प्राप्त कर सके। भारत के ज्ञान के स्रोत से निकलकर ही आज पूरे विश्व में विज्ञान से होने वाले नये नये अविष्कार देखने को मिलते हैं।

मैं चाहता हूं कि भारत के महान  वैज्ञानिक आर्याभट्ट और वराहमिहिर जैसे नक्षत्र-वैज्ञानिकों की परम्परा कि पूरे विश्व भर में प्रशंसा हो। भारत का ज्योतिष विज्ञान भी पूरे विश्व में काफी प्रचलित है। मैं चाहता हुँ की इसी विज्ञान के माध्यम से मानवता के भाग्य एवं मस्तक की रेखाओं को पढ़कर विज्ञान के क्षेत्र में कुछ नया खोजा जा सके। मैं इस प्रकार की वैज्ञानिक खोज करना चाहता हूं जिससे मानव सभ्यता का विकास हो सके और लोग इसके सदुपयोग के बारे में सीख सकें। जिससे पूरे विश्व में विज्ञान का सकारात्मक प्रभाव पड़ सके।

यह सभी जानते हैं कि कुछ अन्य छोटे-बड़े देश है जो पैसों की लालच में और अपना साम्राज्य को विस्तृत करने  के लिए विज्ञान का गलत फायदा उठाते हैं ताकि वह दूसरे देशों पर राज कर सकें। इस तरह की सोच वाले प्रवृत्ति के देश उचित अनुचित की परवाह न करते हुए वे सारे संसाधन प्राप्त करना चाहते हैं जिससे पूरे दुनिया में उनका कृति मान स्थापित हो सके। पूरा विश्व एक माया जाल में फँसा हुआ है  जिसमें सभी कोई अपने अस्त्र-शस्त्र को मजबूत करना चाहते हैं। जिसका परिणाम केवल घातक ही साबित होता है।

इस बात पर हमें डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के द्वारा दिए गए अनमोल विचार पर ध्यान देना चाहिए

सभी युद्ध विवाद सुलझाने की तरीके को दर्शाते हैं और युद्ध के बाद उन्हें फिर से विश्वास, भरोसा और साहस पैदा करने की जरूरत होती है।

देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने भी कहा था कि  परमाणु जैसे घातक हथियारों का निरस्त्रीकरण कर देना चाहिए। लेकिन ऐसे देशों और लोगों के लिए नि:शस्त्रीकरण जैसे मुद्दों का न कोई अर्थ है, न कोई मूल्य है और न ही कोई महत्व है।  वे केवल अपने लालच के लिए दूसरों का सर्वनाश चाहते हैं। लेकिन यह मानव भूल जाता है कि वह यदि किसी का बुरा करता है तो उसका भी बुरा ही होता है।

यदि मैं वैज्ञानिक होता, तो किसी एसी वस्तु या उपायों के अनुसंधान पर प्रतिबंध करने के लिए आवाज उठाता। ताकि जो भविष्य में कभी मानव सभ्यता के लिए घातक साबित न हो सके। मैं निरंतर प्रयास करता कि इस प्रकार के देशों और लोगों के मंसूबों पर रोक लगा सकूं। मैं उनके सभी साधनों और संसाधनों पर प्रतिबंध लगता जो मानव सभ्यता के लिए घातक साबित हो। ऐसे देशों के लिए एक सीमा रेखा के तहत इनके आविष्कारों को होने की आज्ञा प्रदान करता।

यदि मैं वैज्ञानिक होता तो अपने देश से जुड़ी कई सारी समस्याओं को छुटकारा दिलाने की चेष्टा करता। ताकि आने  वाली पीढ़ी अपने उज्जवल भविष्य के लिए की एक नई दिशा की ओर आगे बढ़ सके।

आज केवल भारत ही नहीं पूरा विश्व भी कई सारी विकट समस्याओं से जूझ रहा है जिसमें  बढ़ती जनसंख्या, महंगाई, भरण पोषण के लिए संसाधनों की कमी होना,  बेरोजगारी, पानी की कमी, ऊर्जा की कमी तथा जल का सूखता जा रहा है स्रोत, पर्यावरण का दूषित होना,  प्लास्टिक कचरे का भंडार जमा होना, तरह तरह के रोगों का स्राव होना, अधिक वर्षा बाढ़ सूखा पड़ने के रूप में प्रकृति का विनाश होना, पेड़ों की कटाई जैसी विषम समस्याएं शामिल है।

यदि मैं वैज्ञानिक होता, तो हर प्रकार की कोशिश कर इन सारी समस्याओं से मानव सभ्यता को बचाने के लिए अपना सारा समय और शक्ति लगा देता। जिससे मानव और इस समाज का कुछ भला हो सके।

यदि मैं वैज्ञानिक होता, तो वैज्ञानिक समाज की स्थापना करके सभी को शांतिपूर्ण कार्यों के लिए प्रोत्साहन करता तथा सभी छोटे बड़े वैज्ञानिक प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रोत्साहन करता। ताकि वैज्ञानिक शिक्षा का लोग सही से अनुसरण कर सके और संसार में हर जगह फैली द्वेष भावना को दूर करते हुए नए नए आविष्कारों के विकल्प खोजा जा सके। विश्व के सामने जो भी विकट परिस्थितियां प्रकट हुई है जैसे भोजन का आभाव,  बढ़ती जनसंख्या,  कचरे का भंडार  तथा ऊर्जा का संकट इन  सभी कठिनाइयों का निवारण होना अति आवश्यक है।

समाज में कई कुरीतियां होने के कारण बेरोजगारी काफी अधिक बढ़ चुकी है जिससे युवाओं में द्वेष की भावना प्रकट होती है और फिर वे गलत कार्य करने से बिल्कुल भी नहीं हिचकिचाते हैं। मैं वैज्ञानिक बन करके आज की युवा पीढ़ी के लिए रोजगार पैदा करना चाहता हूं तथा उनके लिए नए नए अवसर खोजना चाहता हूं जिससे वे अपने देश का विकास कर सकें। जिससे पूरी मानव सभ्यता का विकास हो सके।

आज के  छात्रों के लिए यह कविता बिल्कुल सटीक बैठती है-

हर अविष्कार पूरा करना है
थोड़ा जीना और थोड़ा मरना है
हर मुश्किल को दूर करना है
हमें नए साधन की खोज करना है
तकनीकी और शिक्षा में विश्व गुरु बनना है
हां हमें हर अविष्कार पूरा करना है।

अतः मैं वैज्ञानिक बनकर बिना स्वार्थ भाव से  इस देश को आगे बढ़ाना चाहता हूं, न कि किसी लोभ की कामना रखते हुए।

निष्कर्ष
ऊपर दिए गये सभी बातों को ध्यान में रखते हुए आप एक बेहतरीन काल्पनिक निबंध लिख सकते हैं। लगातार प्रयास से ही आपके विचारों में निखार आता है जिससे आप एक बेहतरीन निबंध लिखने के साथ साथ अपने काल्पनिक शक्ति को भी मजबूत कर सकते हैं। काल्पनिक निबंध किसी भी विषय से संबंधित क्यों न हो इसे आप अपने द्वारा रचनात्मक शैली से लिख सकते हैं। जो कि हर बच्चों में मौजूद होता है।