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Essay On Unity in Diversity in Hindi | अनेकता में एकता एस्से इन हिंदी | विविधता पर निबंध हिंदी में

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Essay On Unity in Diversity in Hindi: अनेकता में एकता यही है यही है भारत की विशेषता. हमारा देश भारत विविध रंगों से रंगा है। यहाँ विविधता इतनी ज्यादा है कि दूसरे देशों से लोग इस विविधता को देखने आते हैं।

Essay On Unity in Diversity in Hindi में आज हम भारत देश की इसी एकता के ऊपर निबंध लेकर आएं हैं। विविधता में एकता पर निबंध में आपको कई अहम जानकारियाँ अपने देश के बारे में जानने को मिलेगी।

इन सभी निबंध का उपयोग आप आपकी परीक्षाओं में कर सकते हैं।

Table of Contents

10 Lines on Unity in Diversity.

  • एकता का अर्थ होता है किसी कारण से सबका एक होना।
  • देश के विकास और खुशहाली के लिए एकता बहुत जरूरी है।
  • भारत एक ऐसा देश है जहाँ विविधता भी है और एकता भी।
  • भारत की सामाजिक व्यवस्था में बहुत ज्यादा विविधता है लेकिन भावनात्मक रूप से सब एक है।
  • किसी भी देश या संस्कृति को बचाने में एकता का अहम योगदान होता है।
  • एकता की वजह से विभिन्न धर्मों के लोगो के बीच प्रेमभाव बना रहता है।
  • विविधता में एकता का सबसे बड़ा उदाहरण भारत देश है।
  • एकता हमें शक्ति देती है कि अन्याय के खिलाफ हम आवाज उठाएं और उससे लड़े।
  • ऐसे व्यक्ति जो संयुक्त परिवार में रहते हैं वो एकल परिवार की तुलना में ज्यादा सुखी रहते हैं।
  • जब किसी देश की एकता कमजोर होती है तब कोई दूसरा देश उस पर हमला करता है।

Paragraph On Unity in Diversity | अनेकता में एकता पर अनुच्छेद.

एकता एक भाव है जिसका जन्म किसी के अंदर तब होता है जब उसे इस बात का ज्ञान होता है कि दूसरा भी उसी की भांति है, उससे भिन्न नही है। स्थूल स्तर पर एकता तय करने के कई पैमाने है, जैसे कोई जाति के आधार पर एकता को महत्व देता है कोई धर्म के आधार। पर मूल रूप से हम सब एक ही है। हम सब का निर्माण 5 तत्वों से ही हुआ है। अग्नि, मिट्टी, जल वायु, आकाश. जिस दिन हर व्यक्ति को इस ज्ञान का अनुभव हो गया उस दिन अनेकता का सिद्धांत ही खत्म हो जाएगा क्योंकि मूल रूप से हम सब एक ही है। हम सब एक ही वृक्ष के फल हैं।

Short Essay on Unity in Diversity in Hindi (100 words)

हमारा देश एक विशाल देश माना जाता है, जहाँ करीब 130 करोड़ लोग प्रेमभाव के साथ रहते हैं। भारत दुनियाँ का एक मात्र ऐसा देश है जहाँ हर धर्म, पंथ, विचारधारा और संप्रदाय को मानने वाले लोग रहते हैं।

सभी लोगो के रस्म-रिवाज, पहनावा और बोली भाषा अलग होती है लेकिन फिर भी किसी के अंदर दूसरे के प्रति वैमनस्य का भाव नही आता। यही हमारे देश की ताकत और विशेषता है।

इसी वजह से भारत के बारे में कहा जाता है कि यहाँ विविधता में एकता है।

भारत एक ऐसा देश है जहाँ हर 100 किलोमीटर में बोली बदल जाती है, 400 किमी. में खाने पीने का ढंग बदल जाता है। इतनी विविधता होने के बाद भी हमारा देश एकता के सूत्र में बंधा हुआ है।

भारतीय समाज की इस विशेषता को देख कई बार बड़ी बड़ी शख्सियत हैरान होती है क्योंकि विविधता होने से यही तात्पर्य निकलता है कि कुछ कमजोरी होगी, लेकिन भारतीय समाज के बारे में यह बात गलत सिद्ध हो जाती है।

Essay on Unity in Diversity in Hindi (250 Words)

प्रस्तावना

दुनियाँ की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक भारतीय सभ्यता विश्व में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है, क्योंकि हम सब नैसर्गिक रूप से इंसानियत को महत्व देते हैं न कि जाति, धर्म, सम्प्रदाय को।

इसी वजह से हमारा देश इतनी विविधता से भरा हुआ है। दुनियाँ के नक्शे पर जब हम कोई एक ऐसा देश खोजने की कोशिश करते हैं, जहाँ इतनी ज्यादा विविधता है,तब हम असफल हो जाते हैं क्योंकि भारत की अलावा ऐसा कोई दूसरा देश नही है। विविधता में एकता ही हमारे देश की पहचान है।

विविधता में एकता ही है भारत की असली पहचान.

जब हम ईरान का नाम सुनते हैं तो दिमाग मे खयाल आता है मुश्लिम देश, अमेरिका ईसाइयों का देश, इजराइल, यहूदियों का देश लेकिन भारत का नाम सुनने पर कोई खास धर्म याद नही आता क्योंकि सदियों से यहाँ हर धर्म के लोग एक साथ रह रहे हैं।

अब सब भारतीयों के बीच इतना गहराई भरा रिश्ता बन चुका है कि विविधता सिर्फ रस्म-रिवाज, पहनावे, भोजन में ही बस दिखाई देती है। अंदर से हम सब एक है।

इसीलिए कहा भी गया है की भारत की असली पहचान यह है कि ऊपर से भले सब अलग अलग धर्म, जाति के दिखाई देते हैं लेकिन अंदर से सब एक है। कोई किसी को अपने से कमतर नही समझता, न ही कोई किसी के निजी मान्यताओं में हस्तक्षेप करता।

यही वजह है इतनी विविधता होने के बावजूद भी लोग एक साथ रह रहे है वो भी बिना किसी मनमुटाव के।

निष्कर्ष.

हम भारत को यदि बाग कहें तो गलत नही होगा क्योंकि यहाँ भी उतनी ही विविधता है जितना बाग में होती है। वहाँ भी अलग अलग प्रजाति के पुष्प खिलते है लेकिन सब मिलकर वातावरण को सुगंधित करते हैं। ठीक ऐसे ही हम भारतीय हैं।

Essay on importance of Unity in Diversity in Hindi (500 Words)

प्रस्तावना

एक कहावत कही जाती है कि हाथ की पांचों उंगलियां भले ही बराबर न हो लेकिन एक उंगली यदि हटा दी जाए तो मुट्ठी नही बांध पाएंगे। यह कहावत असल मे एकता की शक्ति को दर्शाती है।
एकता का महत्व बहुत ज्यादा है। खासकर भारतीय समाज मे इसका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है क्योंकि यहां सबसे ज्यादा विविधता है।

हमारे देश का इतिहास बहुत प्राचीन है और यह बात हमारे पूर्वज जानते थे कि भारत की शक्ति एकता में ही है। कई सभ्यताएं आई और समाप्त हो गई लेकिन भारतीय सभ्यता एकता के बल पर ही आज तक विश्व मे अपना परचम लहरा रही है।

एकता का अर्थ

हम किसी दूसरे से भिन्न नही है बल्कि उसी के समान है यही भाव एकता का भाव कहलाता है। एकता का मतलब है हम एक हैं।

लेकिन हमारे देश में तो इतनी विविधता है, हर धर्म, जाति के लोग रहते हैं तो फिर एकता का आधार क्या हो सकता है, कभी कभी यह प्रश्न भी हमारे मन मे उठता है।

हम भारतीयों के अंदर एकता का भाव किसी जाति, धर्म आदि के आधार पर नही आया है क्योंकि इस आधार पर तो हमारे देश मे बहुत ज्यादा विविधता है।

एकता का यह भाव हमारे अंदर मानवता के आधार पर आया हैं। हम सब भारतीय यह मानते हैं जिस तरह से हम अपना जीवन जीते हैं, पूजा-आराधना करते हैं अपनी मान्यताओं के आधार पर त्यौहार मनाते हैं, ठीक ऐसे ही अधिकार दूसरे व्यक्ति को भी है क्योंकि वह भी हमारी तरह ही एक इंसान है।

एकता का महत्व

भारतीय समाज में अनेक लोकोक्तियाँ प्रचलित हैं जो एकता के महत्व को बताती है। जैसे कहा जाता है कि अकेला चना भाड़ नही फोड़ सकता।

एक अकेला तिनका किसी काम का नही होता लेकिन जब यही मिलकर एक रस्सी बन जाता है तो बलशाली हाथी को भी काबू कर लेता है।

यही एकता ही शक्ति है। विश्वविजयी सिकंदर जब पूरी दुनियाँ को जीतने के बाद भारत मे आया तो उसे यहाँ हार झेलनी पड़ी।

इसका कारण रहा भारतीय राजाओं की एकता। आचार्य चाणक्य इस बात को भलीभांति जानते थे कि सिकंदर को हराना है तो भारत को एक होना ही पड़ेगा।

एकता की शक्ति के अनेकोनेक उदाहरण मिल जाएंगे। हमारे देश को आजादी भी एकता के बल पर ही मिली। जब जन समूह की चेतना जागी और उन्होंने एक होकर गुलामी का प्रतिकार किया तो अंग्रेजो के पास देश छोड़कर भागने के अलावा दूसरा कोई विकल्प ही नही था।

स्वार्थ है एकता का दुश्मन.

एकता एक भाव है जो इंसान के अंदर होता है। पर यदि यह भाव मिट गया तब तो हम अपने परिवार को अपना नही समझते तो दूसरों की बात को बहुत दूर है।

एकता (Essay On Unity in Diversity in Hindi) का सबसे बड़ा शत्रु स्वार्थ है। जहाँ स्वार्थ की भावना है वहाँ एकता का भाव नही हो सकता,क्योंकि जहाँ एकता है वहाँ कोई अपना हित बस नही देखता बल्कि सबके भलाई का विचार रखता है।

यह बात हम सब जानते हैं कि भारतीय समाज मे बहुत विविधता है, और यह हजारों सालों से बनी हुई है। लेकिन कुछ लोग अपनी स्वार्थसिद्धि के लिए इस विविधता का सहारा ले रहे हैं और लोगो को धर्म, जाति के आधार पर बांट रहे हैं।

लोगो की अंदर इस विविधता को आधार बनाकर गलत भाव डाले जा रहे हैं, जिसका असर कही न कही हमारे समाज मे दिखाई देने लगा है।

निष्कर्ष.

जिस प्रकार एक चींटी कुछ नही कर सकती जबकि चींटियों का एक झुंड मिट्टी का घर बना देती है ठीक उसी तरह समाज एक है तो बहुत कुछ किया जा सकता है।

जब अंग्रेज भारत आए थे तो उन्होंने फुट डालो और शासन करो कि नीति अपनाई थी क्योंकि उन्हें पता था कि भारत एक विशाल देश है और जब तक यहाँ शासक और प्रजा एक रहेंगे तब तक राज करना संभव नही है।

अनेकता में एकता पर भाषण (Speech of Unity in Diversity in Hindi)

आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, सभी शिक्षकगण और मेरे प्यारे सहपाठियों. आज हम सब इस मंच में भारत की विविधता पर चर्चा करने के लिए एकत्रित हुए हैं। और इस अवसर पर मुझे भी अपने विचार रखने का मौका दिया गया है उसके लिए मैं आप सबका आभारी हूँ।

हमारे देश का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। इतने लंबे काल मे कई अलग अलग धर्म को मानने वाले लोग भारत मे शरण लेने आए और यही के होकर रह गए। लेकिन इस देश की महानता देखिए कि किसी को यह एहसास नही कराया जाता है कि वो यहाँ के मूल निवासी नही है।

जबकि दुनियाँ के कई देशों में हम यह देख सकते हैं, की किस स्तर का भेदभाव लोगो के साथ किया जाता है। यही भारत देश की महानता है और यह देश इसी के लिए जाना भी जाता है। भारत सभी को स्वीकार कर लेता है इसी वजह से यहाँ इतनी ज्यादा विविधता है।

भारत देश में जितनी विविधता है उतना किसी देश में नही है, और अगर होती भी तो पता नही वो किस भांति अपने देश को संभालते लेकिन थोड़ी सी विविधता भी कई देशों को सहन नही है।

दुनियाँ के अधिकतर देश एकरूपता के आधार पर बने हैं, लेकिन भारत एक मात्र ऐसा देश है जो विविधता के आधार पर बना है।

यहाँ हिन्दू, मुश्लिम, सिख, ईसाई, जैन, पारसी, सिंधी, बौद्ध जैसे तमाम धर्मों का अनुसरण करने वाले लोग रहते हैं, जिनका, खानपान, पहनावा, मान्यता, त्यौहार, बोली भाषा सब कुछ अलग है लेकिन फिर भी सब एक है।

सबकी पहचान भारतीय है और भारतीय होने पर सबको गर्व है। सभी लोग यहाँ मिलजुल कर रहते हैं। एक दूसरे के त्योहारों में शामिल होते हैं और खुशी खुशी सब एक दूसरे को बधाई देते हैं।

सच कहें तो ऐसा दृश्य सिर्फ भारत मे ही देखने को मिल सकता है और दूसरे किसी देश मे नही। उत्तर भारत में जहाँ हिंदी भाषा बोली जाती है वही महाराष्ट्र में मराठी, केरल में मलयालम, तमिलनाडु में तमिल आंध्रप्रदेश में तेलुगु, उड़ीसा में उड़िया और पश्चिम बंगाल बंगला भाषा बोली जाती है।

भाषा मे इतनी ज्यादा विविधता (Essay On Unity in Diversity in Hindi) किसी दूसरे देश मे नही देखी जाती। भाषाई विविधता होने के बावजूद भी उत्तर भारत के लोग दक्षिण भारत मे काम करते हैं और दक्षिण भारत के लोग उत्तर भारत मे काम करते हैं।

हमारे देश मे सिर्फ भाषाई विविधता ही नही है बल्कि पहनावे में भी यह देखने को मिलता है। उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश जैसे राज्यों को पुरुषों का परिधान कुर्ता पैजामा या पैंट शर्ट होता है जबकि पंजाब में यह बदल जाता है। अधिकतर पंजाबी सर पर पगड़ी बांध कर रखते हैं और ऊपर कुर्ता नीचे लुंगी यहाँ की पारंपरिक पोषक है।

वही पंजाबी औरतें सलवार कुर्ता, पंजाबी शूट, शरारा पहनना ज्यादा पसंद करती है जबकि हरियाणा में महिलाएं चुनरी और दामन कुर्ता ज्यादा पहनती हैं।

इतनी विविधताओं के बावजूद भी हमारा देश एक है, देश के लोग एक है, लोगो की भावना एक है और सभी भारत को अपनी मातृभूमि मानते हैं।

इतनी विविधता से भरा हमारा देश भारत आज दुनियाँ का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। दुनियाँ भर के कई बड़े बड़े सोसलिस्ट हमारे देश और समाज के ऊपर अध्ययन कर रहे हैं और जानना चाहते हैं कि आखिर हमारे देश मे इतनी विविधता है फिर भी सब लोग मिलजुल कर कैसे रह रहे हैं? हमारे बीच आपसी लड़ाई क्यों नही होती?

लेकिन उनके लिए बस यही कह सकते हैं कि विविधता तो दुनियाँ के लिए है बाकी दिल से हम सब पहले भारतीय है उसके बाद किसी धर्म से जुड़े हुए लोग।

अब मैं अपने शब्दों को इन दो पंक्तियों के साथ विराम देता हूँ कि

अनेकता में एकता, यही तो है भारत की विशेषता.

धन्यवाद.

Essay on Unity in Diversity in Hindi (1000 Words)

प्रस्तावना.

भारतीय समाज की सबसे खास बात विविधता में एकता है जिसकी तारीफ दुनियाँ भर के लोग करते हैं। दुनियाँ के तमाम देशों से लोग भारत की ऐसी विविधता को देखने के लिए खिंचे चले आते हैं।

भारत की इस विविधता की चर्चा सभी जगह होती है और भारतीय समाज की तारीफ इसी विविधता के कारण होती है।

विविधता में एकता यह भी दर्शाती है कि भारतीय सामाजिक व्यवस्था कितनी मजबूत है और लोकतांत्रिक नियम यहाँ हजारों साल से यहाँ मौजूद है।

विविधता में एकता कोई नई परिकल्पना नही है और यह सिर्फ भारत मे ही लागू नही है, बल्कि दुनियाँ के कई देशों में अनेकता में एकता को आधार बनाकर कई बड़े जनांदोलन हो चुके हैं।

लेकिन भारत की विविधता की चर्चा हमेशा होती है, क्योंकि इतनी बड़ी आबादी में विविधता के बीच एकता होना एक बड़ी बात है।

भारत की भौंगोलिक विविधता.

भारत में बहुत ज्यादा भौंगोलिक विविधता है। भारत की स्थिति जब देखते हैं तो पता चलता है इसे हम कई अलग अलग भागों में विभाजित कर सकते हैं।

भारत के उत्तर में दुनियाँ की सबसे बड़ी पर्वत श्रृंखला हिमालय पर्वत श्रेणी है, साथ मे उत्तर का विशाल मैदान है। वही मध्य भारत मे दक्कन का पठार है। उत्तरी और दक्षिणी घाट के साथ यहाँ बड़े बड़े मरुस्थलीय इलाके भी मौजूद है।

इन सब भौंगोलिक इकाइयों का तापमान, वातावरण सब कुछ अलग अलग होता है, इसी वजह से यहाँ उगने वाली फसलें, सब्जियाँ, लोगो का रहन, सहन आदि एक दूसरे क्षेत्रों से बहुत हटकर है।

भारत की भौंगोलिक स्थिति में इतनी ज्यादा विविधता होने के बावजूद भी यह प्राचीन काल से ही एक है। विदेशी लोग भारत को हमेशा से ही भारतीय महाद्वीप के नाम से पुकारते हैं।

कई प्राचीन लेखों में भी इसका वर्णन मिलता है और भारत की सीमा को उत्तर के हिमालय से दक्षिण के महासागर तक बताया गया है।

भारत मे कई सल्तनतें रही हैं, कई विदेशी आक्रमणकारियों ने हमला किया है लेकिन अपनी भौंगोलिक विविधता के कारण कभी भी कोई शासक पूरे भारत पर शासन नही कर पाया है।

भारत की धार्मिक विविधता.

भारत मे विभिन्न धर्मों पर आस्था रखने वाले लोग एक साथ रहते हैं। भारत मे सबसे अधिक जनसंख्या हिंदुओं की है, इसके बाद मुश्लिमों कि जनसंख्या है।

हिन्दू, मुश्लिम के अलावा यहाँ सिख, ईसाई, पारसी, बौद्ध, के अलावा अलग अलग पंथ पर आस्था रखने वाले लोग रहते हैं।

भारत मे रहने वाले सभी लोग एक दूसरे के धर्मों को का सम्मान करते हैं और दूसरे धर्म के लोगो के त्यौहार में भी हिस्सा लेते हैं।
गणपति पंडाल पर मुश्लिम लोग भी व्यवस्थाओं में हाथ बंटाते हैं। जब मुश्लिमों का सबसे प्रमुख त्यौहार ईद आता है तब हिन्दू और बाकी धर्म के लोग ईद की मुबारकबाद देते हैं और अपने मुश्लिम मित्रों के यहाँ दावत खाने जाते हैं।

भारत मे इतनी ज्यादा धार्मिक विविधता देखने को जरूर मिलती है लेकिन कभी कभी कुछ लोग इसी विविधता का गलत फायदा उठाते हैं और समाज मे द्वेष फैलाने का काम करते हैं।

लेकिन जब बात देश की आती है तो सभी धर्मों के लोग एक साथ मिलकर देश की ताकत बढ़ाते हैं। भारत मे हर धर्म के लोगो के आस्था से जुड़े कुछ विशेष जगह भी मौजूद है। 
जैसे अजमेर शरीफ, बोधगया, अमृतसर का स्वर्ण मंदिर, हिंदुओं के सभी तीर्थ स्थल मौजूद है। लोग अपनी आस्था के अनुरूप पूजा कर सकते हैं।

भारत मे भाषाई विविधता.

भारत की कुल जनसंख्या का ¾ हिस्सा इंडो-आर्यन भाषा बोलते हैं, जबकि बाकी के ¼ हिस्सा द्रविड़ियन भाषा बोलते हैं जो दक्षिण भारत में बोली जाती है।। भारत मे करीब 122 भाषाएँ और करीब 1600 बोलियाँ है। भाषा मे इतनी विविधता कही और देखने को नही मिलती है।

भाषा की विविधता देश की ताकत भी है और कभी कभी कमजोरी भी बन जाती है। लेकिन फिर भी इतनी विविधता होने के बावजूद काममाज में कोई रुकावट नही आती।

अंग्रेजी भाषा का प्रभुत्व भी भारतीय समाज मे बहुत ज्यादा है। अधिकतर लोग अंग्रेजी भाषा को उत्तरभारत और दक्षिण भारत को जोड़ने वाली भाषा मानते हैं।

दक्षिण भारत मे इंग्लिश को द्वातीय भाषा का दर्जा प्राप्त है। इन सब के बीच हिंदी भाषा का भी एक अहम स्थान है। भारत की पहचान हिंदी भाषा, पूरी दुनियाँ में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है।

भारत की राजनीतिक विविधता.

हम सब यह जानते हैं कि भारत देश और भारतीय समाज प्राचीन काल से इस वजह से एक था क्योंकि यहां की संस्कृति एक थी, सभी लोग एक ही तरह की मान्यताओं पर यकीन करते थे।

इस वजह से बुनियादी से रूप से भारतीय समाज हमेशा से एक था लेकिन जब बात राजनीतिक रूप से एकता की आती है तो यहाँ स्थिति बदल जाती है।

हमारा देश शुरुआत से कभी भी एक ही शासक के आधीन नही रहा है। यहाँ तक ही जब भारत अंग्रेजों का गुलाम था उस वक़्त भी देश मे 600 छोटी बड़ी रियासतें थी।

इसके पहले गुप्त शासन काल मे देश एक ही सल्तनत के अधीन था। इसके बाद में मुगलों ने भी पूरे भारत को एक ही राजनीतिक व्यवस्था के अंदर डालने की कोशिश की लेकिन वह भी पूरी तरह संभव नही हो सका था।

देश की आजादी के बाद भी इस बात का ध्यान रखा गया था कि राजनीतिक स्तर पर विविधता बरकरार रहे ताकि देश वे सभी लोग आजादी महसूस कर सकें।

भारतीय साहित्य में विविधता.

भारत के अलग अलग क्षेत्रों ने साहित्य के लिए भी बहुत योगदान दिया है। जैसे वेदों का निर्माण उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में, यजुर्वेद का निर्माण कुरु पांचाल क्षेत्र में, उपनिषद की रचना मगध में, गीत गोविंद की रचना बंगाल में चार्यपदास उड़ीसा में, कालिदास के महाकाव्य और ड्रामा की रचना उज्जैनी में हुआ था।

इसके अलावा भी भारत मे कई किताबों की रचना हुई थी, जिनमे ज्ञान-विज्ञान, कला, स्वास्थ्य आदि के बारे में जानकारी दी गई थी। इस तरह की कई किताबों को नालंदा के पुस्तकालय में इकट्ठा करके रखा गया था।

भारतीय संगीत में विविधता.

भारतीय संस्कृति कितनी मिश्रित है इसका सबसे बड़ा उदाहरण भारतीय (Essay On Unity in Diversity in Hindi) संगीत हैं, खासकर भारतीय शास्त्रीय संगीत। भारतीय संगीत में जहाँ एक तरफ भारत मे ही निर्मित प्राचीन संगीत कला की छटा दिखाई देती है, वही साथ मे मुगलकालीन मुश्लिम संगीत का मिश्रण एक खास अनुभव देता है।

कुछ वाद्य यंत्र जिनका निर्माण भारत मे हुआ है वो विश्व मे बहुत ज्यादा प्रचलित है। भारतीय वीणा और पर्सियन तंबूरा से मिलकर सितार का निर्माण हुआ था। साथ ही गजल और कब्बाली के मिले-जुले रूप ने भारतीय उपमहाद्वीप के लोगो को एक अलग ही अनुभव दिया है।

सामाजिक एकता का सबसे बड़ा कारण.

भारतीय सामाजिक व्यवस्था को देखने पर यह मिलता है यहाँ हर व्यक्ति दूसरे पर निर्भर है। जैसे हमारा देश मे जो जाति प्रथा थी उसमें यह बताया गया था कि किस जाति का व्यक्ति क्या काम करेगा।

जैसे किसान का काम खेती करना होता है लेकिन अपने घर के लिए दूसरे जरूरी सामानों के लिए उसे दूसरे अन्य जाति के लोगो के साथ भी जुड़ना पड़ेगा जैसे कपड़े के लिए टेलर से, बाल कटवाने के लिए नाई से।

एक दूसरे पर यह निर्भरता सिर्फ इस वजह से थी क्योंकि एक व्यक्ति अपनी सभी जरूरत को पूरी नही कर सकता था। जाति का यही व्यवस्था फिर अलग अलग धर्मों पर भी लागू हो गई।

एक धर्म के लोग, दूसरे धर्म के लोग पर किसी खास काम के लिए निर्भर रहने लगे जिसके बाद यही आत्मनिर्भरता के कारण ही आपसी एक कि बुनियाद मजबूत हुई।

निष्कर्ष.

आज हम देखते हैं कि किसी देश मे रंगभेद के कारण एक दूसरे पर अत्याचार किया जा रहा है तो किसी देश मे किसी खास धर्म से नाता रखने के कारण उन्हें धर्म परिवर्तित करने के लिए मजबूर किया जा रहा और उन पर अत्याचार हो रहे हैं।

लेकिन जब भारत की तरफ नजर डालते हैं तो पाते हैं कि पिछले 50 सालों में अल्पसंख्यको की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नही है, बल्कि यह बताता है कि हमारे देश मे लोग कितना सुरक्षित है और सभी के बीच आपसी सम्मान और प्रेमभाव आज भी बरकरार है।

विविधता में एकता पर स्पीच (Speech on Unity in Diversity)

माननीय प्रधानाचार्य महोदय, सम्मानित शिक्षकगण, मेरे सहपाठी और सभी छोड़े बड़े साथियों।

आज हम अपने देश की आजादी का पर्व मनाने के लिए यहाँ एकत्रित हुए हैं। यह बात तो हमसब जानते हैं कि हमें यह आजादी कितनी मुश्किलों और कुर्बानियों के बाद मिली है।

लेकिन हमारी आजादी ने यह बात जरूर सिद्ध कर दिया कि एकता में शक्ति होती है और हमारा देश तो विविधता में एकता के लिए जाना ही जाता है। हमारे देश की ताकत ही विविधता है।

इसी वजह से भारत मे कोई भी लंबे वक्त तक राज नही कर पाया क्योंकि इधर की विविधता से सामंजस्य बैठाना बिलकुल भी आसान नही है।

आजादी के बाद से हमारा देश बहुत बदला है। यह बदलाव न सिर्फ देश की सोच में दिखाई देता है बल्कि सामाजिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक हर एक मोर्चे पर इसे महसूस किया जाता है।

जब भी कोई बड़ा देश जिसमें इतनी ज्यादा विविधता (Essay On Unity in Diversity in Hindi) मौजूद हो वह बदलाव के दौर से गुजरता है तो यह बिलकुल भी आसान नही होता क्योंकि एकरूपता को हमेशा की विकास का सहायक और विविधता को विकास का रोधक माना जाता है।

लेकिन हमारे देश मे ऐसा कुछ देखने को नही मिला। देश में बदलाव होते रहे और लोग इन बदलावों के साथ खुद को ढालते रहे। लेकिन यह सब संभव नही हो पाता यदि देश के लोगो मे एकता की भावना नही होती।

भारत को त्यौहारों का देश कहा जाता है। यहाँ रहने वाले लोग अपने धर्म पर भरोसा करते हैं और दूसरे के धर्म का सम्मान करते हैं। यही वजह है कि नवरात्रि में गुजरात मे पंडाल लगता है तो उसमें मुश्लिम समुदाय के लोग न सिर्फ मदद करते हैं साथ मे गरबा देखने भी आते हैं।

कृष्ण की नगरी में जब कृष्णजन्माष्टमी मनाई जाती है और वहाँ मटकी फोड़ने का आयोजन किया जाता है तो तो उसमें मुश्लिम भी शामिल होते हैं।

देश की विविधता (Essay On Unity in Diversity in Hindi) में एकता के अनेकों उदाहरण हमको देखने को मिल ही जाते हैं। हमारे देश मे जहाँ 150 से ज्यादा भाषाएँ और 3000 से भी ज्यादा बोलियाँ हैं, जो देश 29 राज्यों में बंटा हुआ है और हर राज्य की सांस्कृतिक विरासत अलग अलग है वह देश इतनी विविधता के बावजूद भी विश्व मे मजबूती से खड़ा है।

लोग हैरान होते हैं हमें देखकर की हम इतने अलग होने के बाद भी कैसे एक दूसरे के साथ रह लेते हैं। विदेशी पर्यटकों के मन की यही कौतूहल उन्हें भारत खींचकर लाती है।

भारत हमेशा से ही विविधता (Essay On Unity in Diversity in Hindi)  को मानता रहा है और इसे स्वीकार करता आया है। हममें से बहुत सारे लोग इस बात को नही जानते कि अरब देशों के बाद दुनियाँ के जिस देश मे पहली मस्जिद बनी थी वह देश भारत ही है। इसका निर्माण 629 ईसवी में हुआ था।

उस वक़्त तो हमारे देश मे इस्लाम की शुरुआत भी नही हुई थी फिर भी हमारे देश के राजा ने इस्लामिक इबादतगाह बनाने की अनुमति सिर्फ इस वजह से दी थी क्योंकि एकता और सभी धर्मों के लिए सम्मान का भाव हमारे समाज के बुनियाद में है और यह अभी भी झलकता है।

इस देश को लोगो को कोई अनुशासन नही सिखाता लेकिन फिर भी सब अनुशाषित रहते है क्योंकि यह भी हमारी सभ्यता का हिस्सा है।

विविधता में एकता (Essay On Unity in Diversity in Hindi) का भाव जबतक हमारे देशवासियों में रहेगा तब तक इस देश का कोई बाल भी बांका नही कर सकता।

हमारे देश के युवाओं को भी यह बात भलीभांति समझना होगा कि सहअस्तित्व और परस्पर सहयोग से ही इस देश के विकास की कुंजी है क्योंकि यदि विविधता ही देश के विकास में गतिरोध उत्पन्न करने लगेगी तो फिर उस गरीरोध को कोई दूर नही कर सकेगा।

इसलिए यह जरूरी है कि हम सभी धर्मों, जाति और लोगो का सम्मान करें।

धन्यवाद.

“अनेकता में एकता” यही है भारत की विशेषता। इस विषय से संबंधित कई Quotes है जो इस भाव को और पुख्ता बनाते हैं।

  • सबको जोड़कर एक रखने का काम एकता करती है।इसी भावना से दुनियाँ में लोगो को सफलता मिलती है।
  • सभी धर्म मिलकर हम सबको पुकार रहे हैं,एकता देखने के खातिर हम सब की तरफ निहार रहे हैं।
  • जाति-पात एक बंधन है, एकता है हमारी पहचान,सब मिलकर कोशिश करों, एकता से ताकतवर होगा हिंदुस्तान.
  • सीमाएँ मिटे और परिवार एक हो जाएं,अगर एकता कुछ चमत्कार कर जाएं.
  • एक उंगली कितनी भी ताकतवर हो पर उसमे जान नही होती,एकता के आभाव में हमारी कोई पहचान नही होती।
  • अनेकता में एकता, यही है भारत की विशेषता.
  • चलो सब मिलकर करें कुछ ऐसा काम, मिलकर बनाएं एक नया हिंदुस्तान.
  • देश की ताकत जनता से है, अकेले क्या तुम कर पाओगे,
  • एक बार एकता का दामन थाम कर देखो, तूफान से भी लड़ जाओगे।
  • कुछ तुम कर लेना साथी, कुछ हम भी करके दिखाएंगे,21 वी सदी में भारत को सब मिलकर सशक्त बनायेंगे।

Rashtriya Ekta Poem in Hindi (National Integration Poem in Hindi)

राष्ट्रीय एकता है ऐसी भावना
जो लोगों में पैदा करती है सदभावना
हमारा भारत देश है राष्ट्रीय एकता की
जीती जागती मिशाल
मेरा भारत है धर्मों का देश
फिर भी पिरोया हुआ राष्ट्रीय एकता
के सूत्र में यह देश
मेरे देश भारत की शक्ति है
इसकी राष्ट्रीय एकता की पहचान
जब भी मेरे देश की एकता है टूटी
तभी वहां के लोगों की किस्मत है फूटी
अखंडता और शांति को बनाये रखना है जरूरी है
इसीलिए देश के लोगो में राष्ट्रीय एकता है बहुत जरूरी
आईये सभी मिलकर एकता के सूत्र में बंध जाएं
गिले शिकवे भुलाकर एक दूसरे के गले लग जाएं।

राष्ट्रीय एकता पर कविता (Poems in Hindi on National Integration)

इस राष्ट्र की एकता को हमेशा बनाए रखें
दिल में इस जज्बे को हमेशा जगाए रखें
एकता के परिवेश में, जब वह रूप हमने पाया
अपना भारत देश ही, सोने की चिड़िया कहलाया
भारत माता के सपूतों क्यों
एक दूसरे पर वार करते हो
क्यों देश की अखंडता को, तार तार करते हो
राष्ट्र के महापुरुषों ने, एकता का प्रचार किया था
सांप्रदायिक विचार का, बहिष्कार किया था
सब में प्रेम बांटना ही, अपनी पहचान होनी चाहिए
इसी धारणा की सभी के मन में
ऊंची आवाज होनी चाहिए
ईश्वर के बच्चों में भेद मत होने दीजिए
हर मजहब एक दिखें, सीख सब को दीजिए!!

Ekta Mein Bal Story In Hindi (Story of Unity in Force in Hindi)

एक बार की बात चम्पावन जंगल मे सूखा पड़ गया था। वहाँ हाथियों का एक समूह रहता था। जंगल मे सूखा पड़ने के कारण खाने के लिए उन्हें कुछ नही मिल रहा था।

तब हाथी के सरदार ने कहा- ” यदि हम यहाँ ज्यादा दिन रहे तो भूखें ही मर जायेंगे। अब हमें यहां से कही और जाना चाहिए”.

इस पर दल के सबसे युवा हाथी ने कहा- हाँ लेकिन हम जाएंगे तो भी कहा जाएंगे हमें तो कोई जगह भी नही पता।

इस पर बूढ़े हाथी ने हँसते हुए कहा कि- तुम्हे नही

तुम्हें नहीं पता है लेकिन हमें तो पता है ना हम बहुत सारी जगह जानते हैं जहां हम जा करके अपना पेट भर सकते हैं।

इसके बाद हाथी का दल अगले दिन दूसरे जंगल मे निकल जाता है.

जंगल पहुचते ही यहाँ की हरियाली देखकर सब खुशी से झूम उठते हैं। सब अपना अपना पेट भरने में लग जाते हैं।

हाथियों के इस झुंड की ख़बर जंगल के राजा शेर को लग जाती है।

शेर कहता है- ” लगता है अब हमें बहुत सारा भोजन मिलने वाला है क्योंकि हाथियों के झुंड में बहुत सारे छोटे छोटे बच्चे भी है”

शेरनी- अच्छा तो फिर कल ही चलते हैं शिकार करने, वैसे भी हाथी खाएं हुए बहुत दिन हो गया है।

इसके बाद शेर और शेरनी अगले दिन घाट लगाकर वही बैठ जाते हैं जहाँ हाथी लोग भोजन करने आते थे। सुबह सुबह हाथियों का झुंड आ गया। सब अपना अपना पेट भरने में लग गए।

लेकिन तभी हाथी के एक बच्चा झुंड से थोड़ा दूर चला गया जिसे शेर ने पकड़ लिया।

इसके बाद झुंड में अफरातफरी मच गई। कई हाथी रोने लगे। छोटा हाथी बार बार अपने पापा मम्मी को बचाने के लिए पुकार रहा था लेकिन किसी को समझ नही आ रहा था कि क्या किया जाए।

इसके बाद दल का सबसे ताकतवर हाथी आगे बढ़ा और उसने बच्चे को छुड़ाने की कोशिश की लेकिन कोई फायदा नही क्योंकि शेर का समूह भी अब आ चुका था। सब ने एक साथ ताकतवर हाथी के ऊपर हमला कर दिया तो उसे भी अपनी जान बचाकर वापस आना पड़ा।

इसके बाद दल के सबसे बुजुर्ग हाथी ने सबको अपने पास बुलाया और कहा-

“तुम सबके पास शेर की तुलना में बहुत ज्यादा ताकत है लेकिन शेर तुमसे ज्यादा फुर्तीला है। इसलिए तुमको एक साथ शेरों पर हमला करना पड़ेगा और सभी तरफ से करना पड़ेगा। जिससे कि उन्हें समझ नही आएगा कि किस पर हमला करें किस पर नही।

सभी हाथियों ने उनकी बात ध्यान से सुनी और वैसा ही किया जैसा उसने कहा था। सभी शेर को चारों तरफ से घेर लिया, शेर को समझ नही आया कि किस हाथी का वो गला पकड़े।

अपनी जान पर खतरा देखकर शेर रोने लगा और कहा-

” मैं तुम्हारे बच्चे को छोड़ रहा हूँ, कृपया मुझे मत मारो
मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। एक बार माफ़ कर दो अब दोबारा कभी भी नही आऊँगा।”

इसके बाद हाथियों को शेर पर दया आ जाती है और वो शेर को छोड़ देते है फिर दोबारा शेर वहाँ कभी नही आता है।

इस कहानी से शिक्षा मिलती है एकता में शक्ति होती है।

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