Essay on Pateti Festival in Hindi | पतेती त्योहार पर निबंध हिंदी में

Essay on Pateti Festival in Hindi

Essay on Pateti Festival in Hindi: हमारे देश मे कई धर्म पर आस्था रखने वाले लोग रहते हैं जिनमे से एक पारसी धर्म को मानने वाले लोग भी है। पारसी समुदाय के लिए पतेती त्यौहार बहुत अहम होता है क्योंकि इसके बाद ही इनके नए वर्ष यानी नवरोज की शुरुआत होती है।

आज हम आपको पतेती त्यौहार पर निबंध दे रहे हैं। इसमे आपको इस त्यौहार के बारे में काफी कुछ जानने को मिलेगा। Pateti Festival Essay in hindi को आप Exams में भी लिख सकते हैं।

प्रस्तावना

हमारे देश में कई धर्मों के लोग रहते हैं जिनमें से एक पारसी धर्म पर आस्था रखने वाले लोग हैं। पारसी समुदाय के लोग भारत के अलावा दुनिया के कई देशों में पाए जाते हैं, जिनमें से एक देश ईरान भी है।

जिस तरह से चैत्र नवरात्रि से हिंदुओं का नववर्ष चालू होता है, उसी तरह पतेती के बाद जो अगला दिन आता है जिसे नवरोज कहा जाता है। नवरोज से ही पारसी समुदाय के लोगों का नया वर्ष शुरू होता है।

पारसी समुदाय के लिए पतेती त्यौहार उतना ही महत्वपूर्ण है जितना हिंदू धर्म मानने वालों के लिए दीपावली या होली का त्यौहार।

पतेती है पछतावे का दिन (Know the day of regret essay on pateti festival)

जिस तरह से हिंदू और मुसलमान के त्यौहार अलग-अलग तिथियों में आते हैं ठीक उसी तरह पतेती त्यौहार हर वर्ष 19 अगस्त को मनाया जाता है।

पारसी समुदाय के लोग पतेती त्योहार को पछतावे के दिन के तौर पर बनाते हैं। पिछले 1 वर्ष के दौरान जितने भी बुरे विचार मन में आए, उनके द्वारा जिन कर्मों से किसी दूसरे व्यक्ति को दुख पहुंचा है भले ही वह जानबूझकर किया गया कर हो या अनजाने में।

इन सभी के लिए प्रत्येक व्यक्ति पछताता है और खुद मे ग्लानि महसूस करता है। इसके बाद यह संकल्प करता है कि अगले वर्ष से इन सब चीजों से दूर रहेंगे और ऐसे कर्म करेंगे जिनकी वजह से किसी को भी दुख ना पहुंचे।

पतेती का त्यौहार क्यों मनाया जाता है? (Why celebrated pateti festival)

पतेती त्यौहार मनाने की शुरुआत आज से करीब 3000 वर्ष पहले हुई थी इसी दिन शाह जमशेद का जलाभिषेक किया गया था और राजा बनाया गया इसी दिन से पारसी लोगो का नववर्ष मनाया जाने लगा।

शाह जमशेद ने इसी दिन पारसियों का कैलेंडर शुरू किया था, इसीलिए ये लोग इस दिन को नए वर्ष के तौर पर मनाते हैं।

इन लोगो का मानना है कि इसी दिन पूरी दुनियाँ बनाई गई थी। दुनिया के अधिकतर देशों में 21 मार्च को नवरोज मनाया जाता है जबकि भारत में शहंशाह कैलेंडर के अनुसार 17 अगस्त को मनाया जाता है।

पारसियों का भारत आगमन.

भारत दुनियाँ का एक मात्र ऐसा देश है जहाँ सभी धर्मों के लोग एक साथ मिलजुल कर रहते हैं। इसीलिए भारत के बारे में कहा जाता है कि यहाँ विविधता में एकता है।

भारत प्राचीन काल से ही हमारा देश दूसरे देश के आए लोगों को शरण देता आया है। पारसी भी भारत मे शरण लेने आये थे।

पारसी समुदाय के लोग वैसे तो सबसे ज्यादा ईरान में पाए जाए थे लेकिन 1380 ई के आसपास यहाँ धर्म परिवर्तन करवाने की मुहिम बहुत तेज थी।

मुश्लिम शासक लोगो को इस्लाम धर्म मानने के लिए मजबूर कर रहे थे। कुछ लोगो के इस्लाम कबूल कर लिया, लेकिन जो इस्लाम कबूल नही करना चाहते थे, वो अपनी जान बचाकर भारत आ गए और फिर यही रहने लगे।

पतेती त्योहार की शुभकामनाएं देने का तरीका।

पतेती की उत्पत्ति पतेत शब्द से हुई है जिसका अर्थ होता है पछताव। यदि आप किसी को त्यौहार यह बोलते हैं कि पतेती मुबारक हो तो यह गलत माना जाता है।

कुछ लोग पतेती और नवरोज दोनों को लेकर काफी गलतफहमी अपने अंदर रखते हैं। पतेती को नवरोज समझकर पतेती त्यौहार के दिन नवरोज मुबारक का मैसेज भेजते हैं जो कि गलत है।

यदि हम किसी को पतेती त्योहार की शुभकामनाएं सही तरीके से देना चाहते हैं तो हमें पहले अपनी शरीर, आत्मा और बुद्धि को पतेती त्यौहार में बताए गए नियमों के अनुसार शुद्ध कर लेना चाहिए उसके बाद ही हम किसी को पतेती मुबारक कह सकते हैं।

त्यौहार से जुड़े रीति-रिवाज

पतेती त्यौहार आने के बहुत पहले 1 माह पहले से ही लोग अपने घरों की साफ-सफाई करने लगते हैं। त्यौहार के पहले लोग नए कपड़े खरीदते हैं और त्यौहार के दिन पहनते हैं।

घरों के दरवाजे पर तरह-तरह की रंगीन रंगोली बनाई जाती हैं। अगरबत्ती और कई सुगंधित चीजों को जलाकर घर को खुशबूदार किया जाता है।

इस दिन पारसी समुदाय के सभी लोग आपसी गिले-शिकवे को भूलकर हर किसी से मिलते हैं और उन्हें त्योहार की शुभकामनाएं भी देते हैं।

जैसा कि पतेती त्यौहार मुख्य रूप से अपने बुरे कर्मों के पछतावा के लिए मनाया जाता है। शायद इसी वजह से हर व्यक्ति के अंदर बिगड़े हुए रिश्तो को सुधारने की एक नई पहल की जाती है।

बनते हैं स्वादिष्ट पकवान

पारसी समुदाय के त्योहारों में खाना बहुत ही स्वादिष्ट बनता है। खाने के बिना इनका कोई भी त्योहार अधूरा है। इस दिन रवा से बना हलुआ, सेवईयां आदि बनता है।

पारसी लोगो मांसाहारी भोजन करना भी पसंद करते हैं। सुबह के नाश्ते में इस दिन मछली, चिकेन बनता है। वही दोपहर के खाने में पुलाव जरूर बनता है।

पुलाव के अलावा चिकेन, और मछली से संबंधित कुछ पकवान दोबारा बनते हैं। साली-बोटी और पत्रा-दी-मच्छी दो सबसे प्रमुख माँसाहारी चीजें हैं।

उपसंहार.

हर धर्म की भांति ही पारसी धर्म को मानने वाले लोग भी अपने रीति-रिवाजों पर बहुत ज्यादा आस्थावान है। भारत के अलावा, पाकिस्तान, बांग्लादेश, ईरान, नेपाल जैसे देशों में पारसी लोग रहते हैं और अपने सभी त्यौहार मनाते हैं।