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Essay on My Mother in Hindi | Meri Maa Par Nibandh In Hindi | मेरी माँ पर निबंध इन हिंदी

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मेरी माँ पर निबंध इन हिंदी (Essay on My Mother in hindi) और मेरे जीवन में उनका महत्व है

मेरी माँ पर निबंध इन हिंदी ( Essay on my mother In Hindi ) जीवन की पहली सीख देने वाला जो इंसान होता है वह माँ ही है। इसलिए माँ को जीवन का प्रथम गुरु का दर्जा दिया गया है। माँ है तो जीवन मे सब कुछ है। माँ के बिना जीवन में सबकुछ होते हुए भी कमी बनी रहती है।

मेरी माँ पर निबंध इन हिंदी

मेरी माँ पर निबंध इन हिंदी – Meri Maa Par Nibandh (250 Words)

कई बड़े बड़े लेखकों की कलम रुक जाती है जब वह माँ के बारे में कुछ भी लिखने की कोशिश करते हैं, क्योंकि माँ एक शब्द या इंसान नही है बल्कि एक ऐसी भावना है जिसका बखान करना बहुत मुश्किल है।

हम सब को बचपन मे माँ के प्यार-दुलार और विशेष स्नेह की जरूरत होती है। माँ के इसी अटूट प्रेम की वजह से हमारे अंदर आत्मविश्वास आता है कि हम कुछ भी कर सकते हैं।

क्योंकि हमारी माँ की नजरों में हम कभी कमजोर नही होते। माँ किसी के जीवन की प्रथम गुरु होती है। माँ की गोद मे ही हम हसना सीखते हैं, उनकी उंगली पकड़ कर हम पहली बार चलना सीखते हैं।

जब थोड़ा बड़े हो जाते हैं तो माँ ही हमें सबसे पहले अच्छे बुरे का ज्ञान देती है। अपनी रोजमर्रा के काम किस तरह करते हैं, इसकी सीख हमें माँ ही देती है।

जीवन मे माता-पिता का स्थान ईश्वर के समान माना गया है। जिस तरह से ईश्वर इस पूरी सृष्टि को जन्म देते हैं ठीक उसी तरह से माता पिता हमें जन्म देते हैं और पालक बनकर हमारा पालन पोषण करते हैं।

निष्कर्ष

हम अपने जीवन कई रिश्तों को निभाते हैं लेकिन एक माँ से बच्चे का जो रिश्ता होता है वह सबसे अनमोल होता है। इस रिश्ते की जगह दुनियाँ का कोई और रिश्ता नही ले सकता है।

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मेरी माँ पर निबंध इन हिंदी  (400 Words)

( Essay on My Mother in Hindi ) मेरी माँ एक मात्र ऐसी इंसान है, जो मेरी खुशी के लिए हर कष्ट को सहन कर लेती है। दुनियाँ में कई रिश्ते देखे हैं, लेकिन माँ के जैसा कोई रिश्ता नही देखा है।

हम सब अपने जीवन की शुरुआती शिक्षा माँ के द्वारा ही सीखते हैं, ठीक उसी तरह मेरी माँ ने भी कई अहम चीजों का ज्ञान मुझे हर वक़्त दिया।

माँ ने ही मुझे बताया है कि जब हम मुसीबत के वक़्त में हो तो हमें धैर्य नही खोना चाहिए। इसके लिए माँ मुझे कई तरह के किस्से सुनाती हैं।

माँ मुझे हमेशा कई प्रेरणादायी कहानियां सुनाती रहती हैं। यह सिलसिला बचपन से ही चल रहा है, जो आज तक भी जारी है।

माँ का मैं जीवनभर आभारी रहूँगा मैं जो उन्होंने बचपन मे ही ऐसे संस्कार दिए जिनका महत्व उस वक़्त तो उतना नही था जितना आज मुझे लगता महसूस हो रहा है।

माँ ने मुझे बचपन मे ही सिखा दिया था कि किस तरह ईमानदारी से काम करने पर व्यक्ति हमेशा सफलता की सीढ़ी चढ़ता है। जीवन मे ईमानदारी का महत्व कितना अधिक है यह आज मुझे समझ आ रहा है।

जीवन मे आज मैं जब भी थोड़ी सी भी बेईमानी का खयाल भी मन मे लाता हूँ तो माँ की सिखाई वह सीख याद आ जाती है।

बचपन मे मैं जब किसी काम मे असफल हो जाता था तो मेरे अंदर निराशा आ जाती थी। मुझे लगता था कि मैं वह काम नही कर पाऊंगा।

लेकिन माँ मेरी असफलता को देखकर कभी भी निराश नही होती थी। बल्कि वो कहती थी कि क्या हुआ जो असफल हो गए, कोशिश तो की है न।

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इसके बाद माँ पूरे जोश के साथ हौसला बढ़ाती थी ताकि मैं और ऊर्जा के साथ वह काम कर सकूं और फिर मैं सफल होकर ही रुकता था।

माँ की हर एक सीख हमारे जीवन मे गहरी छाप छोड़ती है। माँ के सीख के बिना जीवन बहुत मुश्किल सा हो जाता है। क्योंकि इस दुनियाँ में माँ के जितना फिक्र करने वाला कोई दूसरा इंसान नही है।

निष्कर्ष.

माँ एक रचयिता है जिसकी रचना हम सब है। हम सबको अपने जीवन मे ऐसे काम करना चाहिए कि हमारी रचयिता यानी कि हमारी माँ का सिर हमेशा गर्व से ऊँचा रहे।

जीवन मे जब भी किसी उलझन में फसे हो और समझ न आये की क्या करें तो हमेशा अपनी माँ के नजरिये एक बार जरूर देखना चाहिए, समाधान जरूर मिल जाएगा।

मेरी माँ पर निबंध इन हिंदी – Essay on my mother In Hindi (500 Words)

हमारे जीवन को बनाने में और एक दिशा देने में एक इंसान जो सबसे अहम है वो माँ होती है। माँ जिनका जीवन अपने बच्चों के इर्द गिर्द घूमता है।

वो हमारी बचपन की सभी शरारतों को झेलतीं हैं फिर भी नही थकती हैं। घर मे हर किसी की छुट्टी जरूर होती है। जैसे कि हमें अपनी स्कूल से छुट्टी मिल जाती है, पापा को अपने आफिस से छुट्टी मिल जाती है, लेकिन एक माँ को कभी छुट्टी नही मिलती है।

उनका काम साल भर चलता रहता है और वो भी बिना थके और कोई छुट्टी के आशा के बिना हमेशा एक जैसी ऊर्जा के साथ काम करती रहती हैं। यही माँ की खूबी है।

दुनियाँ में शायद ही कोई और दूसरा इंसान एक माँ के जितना मेहनत और त्याग कर पाएगा।

माँ करुणा की मूर्ति है.

माँ को करुणा की मूर्ति कहा जाता है, यह किसी भी हालत में हमेशा सही ही होता है। माँ कभी भी अपने बच्चों को कष्ट में नही देख सकती है। ठीक इसी तरह मेरी माँ भी हैं।

वो खुद कष्ट में रह लेंगी लेकिन मुझे कष्टों से दूर रखती है। शायद ही कोई इस बात की व्याख्या कर सकता है कि आखिर माँ के अंदर ऐसी कौन सी शक्ति विराजमान है जो उन्हें इतनी ताकत देती है कि वह बच्चों के खातिर हर कष्ट सह सकें।

हर माँ ऐसी होती है। एक स्त्री के कई रूप होते है, कई अलग अलग किरदारों में वह रिश्ते निभाती है, लेकिन कहते हैं कि एक स्त्री सबसे ज्यादा खुश तब होती है जब वह एक माँ के रूप में होती है।

माँ है जीवन की प्रथम गुरु.

जीवन की पहली गुरु की संज्ञा माँ को दी गई है। माँ एक ऐसी गुरु होती है जिनकी सिखाई गई सीख जीवन के हर मोड़ पर काम आती है। ऐसा कभी नही देखने को मिलेगा जब माँ ने कोई गलत दिशा दिखाई हो।

जीवन मे मैं चाहे कितनी भी सफलता हासिल कर लूं, लेकिन उसकी खुशी तक तक महसूस नही होती है जब तक माँ के चेहरे पर उस सफलता से खुशी न दिखे।

कई बार ऐसा भी होता है कि कुछ लोग पैसो की चकाचौंध में अपनी माँ को उचित सम्मान नही दे पाते लेकिन माँ को इसका कोई मलाल नही होता है। उनका बेटा जब भी माँ के पास आ जाए, माँ उसे गले ही लगाती है।

इसीलिए कहते हैं न कि माँ से ज्यादा करुणा किसी मे नही है, माँ के जैसा दयालु इस संसार मे कोई और नही है।

निष्कर्ष.

हम माँ के कई रूप देखते हैं अपने जीवन मे जैसे कि धरती माँ, भारत माँ आदि। लेकिन इन सब के प्रति हमारे अंदर जिम्मेदारी का भाव तभी आ पाएगा जब हम अपनी माँ का सम्मान करेंगे।

जब हम अपनी माँ के त्याग को सही मायने में समझ पाएंगे। हालांकि आजतक माँ त्याग को कोई भी समझ नही पाया है लेकिन उनके त्याग का कुछ प्रतिशत ही समझ जाएं और अपनी माँ को उसके बदले में खुशी देने की ठान ले तो यह दुनियाँ ही स्वर्ग हो जाएगी, फिर चाहें वह अपनी माँ हो, धरती माँ हो या भारत माँ हो। हम इन सब के ऋणी है, और हमें इनके त्याग को समझना चाहिये।

मेरी माँ पर निबंध इन हिंदी – essay on my mother In Hindi (1000 Words)

मेरी मां

दुनिया में सबसे अनोखा रिश्ता होता है वह है एक मां और अपने बच्चे का। दुनिया में भले ही पिता कितना भी प्यार करता है परंतु मां की कमी पूरा नहीं कर सकता मां बच्चों को पूरी ममता के साथ में पालती है मां के रिश्ते को पूरी दुनिया सम्मान देती है मां वह होती है जो अपने बच्चे की हर जरूरत हो समझती है एहसास को समझती है। मां होती है जो हमें जन्म देती है और हमारा पालनपोषण करती है। यही कारण है कि दुनिया में सबसे ज्यादा सम्मानित में से मां सबसे ज्यादा महत्व है। दुनिया में मां को प्रेम और त्याग की मूर्ति कहा जाता है क्योंकि मां अपने बच्चों के लिए सब कुछ करने को भी तैयार हो जाती है। इतिहास में बहुत सारी घटनाएं ऐसी हैं जिन्होंने मां का वर्णन किया है। मां ने अपने बच्चों के लिए सारे दुखों को सारी खुशियों को निछावर कर दिया है दुनिया में महत्वपूर्ण कोई रिश्ता नहीं हो सकता है।

मां का महत्व

मां का दुनिया में बहुत ही महत्व है मां एक ऐसा शब्द है जिसके बारे में जितनी भी बात की जाए सारी कम है हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं कि मां अपने बच्चों के लिए कितना कुछ करती है। मां की महानता का अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है कि इंसान भले ही भगवान का नाम भूल जाए परंतु मां का नाम कभी नहीं भूल सकता चोट लगती है तब भगवान का नाम नहीं आता मां का नाम आता है कि क्युकी मां का प्रेम और करुणा बच्चों को हमेशा याद रहती है। मां दुनिया भर की कष्ट झेल लेती है और अपने बच्चों को सुख सुविधा देती है। मां पहले शिक्षा देने के लिए महत्वपूर्ण होती है मां से ही बच्चा उसे पहले शिक्षा लेता है।

मां की मित्रता

( Essay on My Mother in Hindi ) मां अपने जीवन में बहुत सारी भूमिकाएं निभाती आई है कभी मां शिक्षक बन जाती है तो कभी मित्र बन जाते हैं। हर समस्या का सामना करने के लिए मां सबसे आगे खड़ी होती है। मां मां के फर्श के साथी मित्रता का फर्ज निभाती है जो बच्चे की हर बात को समझती है और मित्रता की तरह साथ निभाती है यदि बच्चा फेल भी हो जाता है तो भी मैं उसके साथ हमेशा खड़ी रहती है। आज अगर बच्चा सफल होता है या असफल होता है तब मां दोनों समय बच्चे के साथ में खड़ी थी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं कि मां से अच्छा मित्र इस दुनिया में कोई नहीं।

मां का रिश्ता

स्त्री अपने जीवन में एक अच्छी बहू एक अच्छी बेटी एक अच्छी पत्नी और ना जाने कितने रिश्ते निभाती आई है उन्होंने हर रिश्तो में अपनी जान से ज्यादा फर्ज निभाया। इन रिश्तो के अंदर सबसे ज्यादा सम्मान मां को मिलता है। हम माता के रिश्ते को शब्दों में बयां किया नहीं जा सकता। मां अपने बच्चों को इसने करना कभी नहीं छोड़ती और ना ही मां बच्चों के प्रति कभी इसने कम कर सकती है। मां अपने बच्चों के लिए बड़ी से बड़ी आपदा का भी सामना करने को तैयार रहती है उसमें बच्चों को खुशी देने का साहस होता है बच्चों की तरह किसी तरीके आज नहीं आने देती है इसी कारण भगवान ने मां को पृथ्वी पर भेजा है। कहां जाता है ना कि भगवान हर जगह मौजूद नहीं रह सकता इसके लिए उसने मां को बनाया है। मां पापा की डांट से और मार से बचाती है हर एक अच्छे से सभी के लिए बच्चे का साथ निभाती है कि मां बच्चे से बहुत प्यार करती है।

शिक्षक के रूप में 

कहां जाता है ना कि बच्चे का पहला स्कूल परिवार होता है और पहले शिक्षा देने वाली मां होती है। हम जन्म से ही मां के आंचल में बड़े होते हैं मां अपनी उंगली पकड़ कर हमें चलना सिखाती है मां हमें बोलना सिखाती है मां हमें खाना सिखाती है जूते पहनना सिखाती है जूते के फीते बांधने सिखाती है कपड़े पहनना सिखाती है ब्रश करना सिखाती है लोगों से कैसे बात करनी है वह सिखाती है मां बच्चे की पहली शिक्षा और पहली शिक्षक है। जो एक शिक्षक नहीं कर सकता वही मां कर देती है जब बच्चा फेल जाता है तो मां बच्चे में विश्वास जगह रखती है कि मैं जिंदगी में कभी फेल नहीं हो सकता। मां भले ही शिक्षा ना दे सके पर जीवन जीने का सही तरीका दे देती है जो शिक्षा से कम नहीं है समाज में किस तरह से व्यवहार करना है वह सिखाती है मां दुखों से लड़ने और तकलीफ हो को निपटने की शक्ति देती है यही कारण है कि मां को एक मित्र और एक अच्छे शिक्षक के रूप में जाना जाता है।

प्रेरणा

हर इंसान किसी ना किसी बात से या किसी ने किसी इंसान से प्रेरणा लेता है परंतु मां सबसे अलग होती है जो जिंदगी में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।  जब बच्चा शिक्षक से शिक्षा लेता है।  वह सिर्फ शिक्षा लेता है परंतु उसे प्रेरणा मां देती है।  यदि बच्चा सफल होता है तो उसके पीछे मां का हाथ होता है।  क्योंकि मां उसे सफल होने की प्रेरणा देती है बच्चे ने विश्वास जगाए रखना बच्चे को लक्ष्य प्राप्त करने के लिए सदैव आगे बढ़ाने के लिए प्रेरणा देना मां निभाती है।

हर इंसान की जिंदगी में कोई ना कोई स्त्री आती है परंतु एक ऐसी ऐसी भी होती है जो जिंदगी में सबसे अलग होती है वह मां होती है। मां किसी प्रकार का स्वाद नहीं रखती है बल्कि बच्चे के लिए त्याग साहस और मेहनत करती है। मां बच्चे को सामाजिक व्यवहार सिखाती है ईमानदार बनाती है और मेहनत जैसी महत्वपूर्ण शिक्षा देती है यही कारण है कि मां को एक अच्छा शिक्षक मित्र और प्रेरित कहा जाता है। जिंदगी में पत्नी बेटी और बहू जितनी  से ज्यादा मां जरूर होती है क्योंकि मां से ही एक पेटी एक पत्नी एक बहू का निर्माण होता है मां एक घर को स्वर्ग बनाती है। बच्चे की पहली शिक्षा मां देती मां बच्चे को असफलताओं से लड़ना सिखाती है जिंदगी जीना सिखाती है बिन मां के जिंदगी अधूरी है। Essay on My Mother in Hindi

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