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Essay on Make in India in Hindi | Make in India policy | Scheme | Information in Hindi

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देश मे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश मे मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए Make in india scheme की शुरुआत की थी।

इस Scheme का उद्देश्य लोगो को रोजगार देने के अलावा देश के लिए जरूरी समानों का उत्पादन देश मे ही करना था।

कई परीक्षाओं में Make in india policy के ऊपर निबंध लिखने के लिए है। तो आज हम आपके लिए Make in india essay in hindi लेकर आए हैं, जिसका उपयोग आप परीक्षा में कर सकते हैं।

Make in india essay in Hindi (मेक इन इंडिया पर हिंदी में निबंध) – (200 words)

हमारा देश भले ही एक कृषि प्रधान देश है लेकिन आज की सबसे बड़ी जरूरत है लोगो की जरूरत का सामान, जो कि मैन्युफैक्चर किया जाता है। हम दुनियाँ के सभी देशों की इकॉनमी पर गौर करें तो पता चलता है कि जो देश कुछ बनाकर बेच रहे है, उन्ही की इकनॉमी मजबूत है।

हमारे देश भारत ने भी अब यह संकल्प कर लिया है कि वह अब सिर्फ एक बाजार नही है बल्कि बाजार में सामान की आपूर्ति करने वाला एक देश है। इसलिए देश की सरकार ने Make in india scheme की शुरुआत की है।

इस योजना के तरह दुनियाँ के तमाम देशों के छोटे-बड़े सभी उद्योगपतियों से यह कहा गया है कि आप भारत मे आकर अपनी कंपनी खड़ी कर सकते हैं और उत्पाद बना सकते हैं।

इसके लिए देश जमीन, बिजली, पानी, सड़क ट्रेन आदि सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाएगा।

योजना का उद्देश्य.

देश में नए रोजगार का निर्माण करना और मैन्यूफैक्चरिंग के लिए एक पृष्ठभूमि तैयार करना ही इस योजना का मुख्य उद्देश्य है। इस योजना का लाभ देश के हर नागरिक को मिलेगा। यदि इस योजना से जरिये कोई विदेशी कंपनी देश में प्लांट लगाती है तो रोजगार सृजन होगा जिससे की बेरोजगार लोगो को लाभ मिलेगा।

उपसंहार.

कई सेक्टर ऐसे है जहाँ पर देशी कंपनियां काफी मजबूत है पर कई सेक्टरों में हमें विदेशी कंपनियों की जरूरत है। Make in india एक बहुत ही अच्छी पहल है। इससे न सिर्फ रोजगार का निर्माण होगा बल्कि साथ मे कई चीजों की टेक्नोलॉजी भी हमें मिल सकेगी।

Make in india essay in Hindi (मेक इन इंडिया पर हिंदी में निबंध) – (250 words)

प्रस्तावना

25 सितंबर 2014 देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश को एक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के उद्देश्य से Make in india scheme की शुरुआत की।

देश मे मैन्युफैक्चरिंग नही हो रही थी, या बहुत कम पैमाने में हो रही थी, इस वजह से देश दुनियाँ के बाकी बड़े देशों से पिछड़ रहा था।

इसी कमी को दूर करने के लिए Make in india योजना शुरू किया गया।

Information of Make in India scheme (मेक इन इंडिया योजना के बारे में जानकारी)

Make in india का प्रमुख उद्देश्य यह है कि विदेशी कंपनियां भारत मे आएं और उत्पाद को यही बनाएं। इसके बाद भारत से वह उत्पाद बाकी दुनियाँ में जाए।

भारत को दुनियाँ अभी एक बाजार के रूप में ज्यादा देखती है, जबकि यह योजना पूरी दुनियाँ को बताती है कि भारत आप सामान बनाना चाहता है।

मेक इन इंडिया के तहत अब कोई भी विदेशी कंपनी 100% निवेश करती है। इससे सिर्फ कुछ सेक्टर को बाहर रखा गया है जैसे कि डिफेंस सेक्टर में 49% बाहरी निवेश की अनुमति है।

स्पेस सेक्टर में 74% निवेश की आजादी है, वही मीडिया में 26% विदेशी निवेश की अनुमति दी गई है।

मेक इन इंडिया का उद्देश्य.

भारत इस वक़्त दुनियाँ का दूसरा सबसे बड़ा आबादी वाला देश है और आगे आने वाले कुछ वर्षों में यह चीन को भी पीछे छोड़ देगा।

इतना बड़ा देश और इतनी विशाल जनसंख्या होने के बावजूद भी हमारा देश मैन्युफैक्चरिंग के मामले में काफी पीछे है।

यदि हम अपने पड़ोसी देश चीन की बात करें तो चीन और भारत का GDP 1980 में एक बराबर थी। लेकिन उसके बाद चीन ने निर्माण आधारित जनसंख्या बनने का फैसला किया और आज परिणाम सामने है कि चीन दुनियाँ का एक मैन्युफैक्चरिंग केंद्र बन गया है।

भारत भी यही चाहता है कि आगे आने वाले 25 वर्षों में भारत खुद की जरूरत को पूरा करने के साथ साथ दुनियाँ की जरूरत भी पूरी कर सकें। लेकिन यह तभी संभव होगा जब भारत मे निर्माण होगा।

मेक इन इंडिया में शामिल सेक्टर.

Make in India के तहत भारत के कई सेक्टर आते हैं। इसमे ऑटोमोबाइल, बायोटेक्नोलॉजी, केमिकल्स, कंस्ट्रक्शन,डिफेंस के साजोसामान,बिजली की मशीनरी, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, फ़ूड पोसेसिंग, चमड़ा, उद्योग, माइनिंग, रेलवे,दवा का उद्योग,रोड और हाईवे, थर्मल पावर टूरिस्म के अलावा और भी कई सेक्टर आते हैं।

उपसंहार.

Make in india भारत सरकार की तरफ से की गई एक पहल है जिसका मकसद देश में निर्माण कार्य को बढ़ावा देना है। भारत के कई विभाग इस योजना को सफल बनाने में पूरी तरह से तत्पर है।

देश की इस योजना से बहुत ज्यादा आशा है। इस योजना से तहत कोई भी काम शुरू कर सकता है। यदि देश का कोई नागरिक भी अपना खुद का कोई उद्योग शुरू करना चाहता है तो जरूर करना चाहिए।

Make in india essay in Hindi (मेक इन इंडिया पर हिंदी में निबंध) – (300 words)

प्रस्तावना

देश को मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र बनाने के लिए तथा देश मे बेरोजगारी की दर को घटाने के लिए देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा एक द्विउद्देश्यीय योजना, Make in india की शुरुआत की गई थी।

Make in india के तरह कई विदेशी कंपनियों को आमंत्रित किया गया था कि राह भारत मे आये और जरूरी सामान को भारत मे ही बनाए।

Information of Make in India scheme (मेक इन इंडिया योजना के बारे में जानकारी)

25 सितंबर 2014 को देश के प्रधानमंत्री ने घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए Make in yojna को शुरू किया था। इस योजना को शुरू करने का मकसद था कि देश की GDP में मैन्युफैक्चरिंग का योगदान 16% से बढ़कर 22% तक हो जाए।

इस लक्ष्य को 2022 तक हासिल करना है। मेक इन इंडिया के तहत देश के 25 अलग अलग सेक्टर्स पर पूरा ध्यान दिया गया, जिसमे ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, माइनिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

मेक इन इंडिया शुरू करने की मुख्य वजह.

देश के कई बुद्धिजीवी इस बात को लेकर हमेशा चिंतित रहते थे कि आखिर किस तरह से देश मे विनिर्माण की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जाए।

जब तक देश मे मैन्युफैक्चरिंग होना शुरू नही होगा तब तक देश की प्रतिभाओं का सही उपयोग नही हो सकता है। इसी बात को ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री ने अपने पहले ही कार्यकाल में Make in india योजना को शुरू किया।

दुनियाँ के सभी उधोगपति से किया आवाहन.

प्रधानमंत्री ने दुनियाँ भर की सभी बड़ी बड़ी कंपनियों को अपने देश मे कंपनी लगाने का आवाहन किया था। सभी कंपनियों से यह कहा गया था कि आप हमारे देश मे आइए, अपना बिज़नेस शुरू करिए।

बदले में भारत सस्ती बिजली, कुशल मजदूरों की आपूर्ति और उद्योग शुरू करने के लिए जमीन की व्यवस्था भी की जाएगी।

इस योजना को सफल बनाने के लिए मोदी जी ने भरसक प्रयास किए। करीब 500 अलग अलग कंपनियों के CEO लगातार मुलाकात की और इस योजना के क्रियान्वयन के तरीके को समझाया गया।

इसके साथ ही दुनियाँ के बड़े बड़े देशो में खुद मोदी जी गए और वहां के राष्ट्र प्रमुखों से मुलाकात करके इस योजना के बारे में विस्तार से समझाया है।

यह योजना सुचारू रूप से चल सकें और निवेशकों को उनकी समस्याओं का तुरंत समाधान मिल सके इसके लिए makeinindia.com वेब पोर्टल शुरू किया गया।

जहाँ निवेशकों की किसी भी समस्या का हल 72 घंटे के अंदर किया जाता है। इसके साथ ही वाणिज्य मंत्रालय के अंदर ही एक इन्वेस्ट इंडिया का विभाग बनाया गया है।

इस विभाग का काम है मेक इन इंडिया के तहत होने वाले निवेश पर ध्यान रखना और बिज़नेस के भूमि से संबंधित अनापत्ति प्रमाणपत्र प्रदान करना।

उपसंहार.

आज यह बहुत जरूरी है कि देश एक मैन्युफैक्चरिंग के केंद्र के रूप में बने क्योंकि देश की बढ़ती जरूरतों के लिए हम दूसरे देशों पर निर्भर नही सकते। साथ ही देश की युवा शक्ति का सदुपयोग करने का यह सही वक्त है।

Make in india essay in Hindi (मेक इन इंडिया पर हिंदी में निबंध) – (400 words)

विश्व पटल पर भारत का डंका बज रहा है। देश अभी एक एक बड़े बाजार के तौर पर देखा जा रहा था लेकिन Make in india के तहत अब भारत मैन्युफैक्चरिंग का सेंटर भी बनने की तैयारी कर रहा है।

देश के कई विभाग इस योजना को सफल बनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। Make in india योजना की शुरुआत भी बहुत जोरशोर के साथ हुई थी।

प्रधानमंत्री जी ने इस योजना को सफल बनाने के लिए IT सेक्टर से बड़े बड़े पेशेवर लोगो के साथ एक मीटिंग की थी, जिसमें इस योजना को सफल बनाने के लिए एक प्रारूप तैयार किया गया था।

मेक इन इंडिया की शुरुआत.

Make in india योजना की शुरुआत 25 सितम्बर, 2014 को दिल्ली में हुई थी। इस योजना के बारे में अच्छी समझ बन सके इसके लिए एक वर्कशॉप भी लगाई गई थी, जिसमे प्रधानमंत्री के अलावा कई अन्य मंत्री और कई बड़ी इंडस्ट्री के मुखिया भी शामिल हुए थे।

जब इस योजना को शुरू किया था तो उस वक़्त इसका सिर्फ एक मकसद था कि देश मे निर्माण कार्य को बढ़ावा दिया जाए। भारत अब चीजों को बनाना चाहता है यदि एक संदेश था जो इस योजना के जरिए दुनियाँ को दिया गया।

इस योजना का सफल कियान्वयन का मलतब था कि देश मे रोजगार भी निर्मित होंगे जिससे योग्य लोगो को रोजगार मिल सकेगा।

मेक इन इंडिया योजना का उद्देश्य.

हमारी देश की आबादी दिनोदिन बढ़ती जा रही है, ऐसे में लोगो के सामने रोजगार की समस्या भी बढ़ती जा रही है। हमारा देश सर्विस सेक्टर में तो काफी आगे है, लेकिन जहां बात निर्माण की आती है तो वहाँ हमारा देश काफी पिछड़ा नजर आता है।

यानी स्पष्ट शब्दों में कहा जाए तो हमारे देश मे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर काफी ज्यादा ध्यान नही दिया गया था इस वजह से यह बहुत कमजोर है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के कमजोर होने से मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में पैदा होने के वाले रोजगार भी नही बन रहे, और नतीजतन बेरोजगारी बढ़ रही है।

ऐसे में यह बहुत जरूरी है कि इस सेक्टर को मजबूत किया जाए। इसके अलावा दूसरा उद्देश्य है देश मे सामान को बनाना।

हमें बाहर से सामान खरीदना मंहगा पड़ता है। वही कोई सामान देश मे ही बनने लग जाए तो इससे कीमत भी कम होगी साथ दूसरे देशों को बेचकर पैसा भी कमाया जा सकता है।

Make in india इन्ही दो उद्देश्यों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

मेक इन इंडिया के फायदे.

Make in india योजना यदि सफल हो जाती है और इसके जरिए देश मे नई नई कंपनियां खुल जाती है तो इसका सबसे बड़ा फायदा यह होने वाला है कि बेरोजगारी की समस्या काफी कम हो जाएगी।

आज हमारे देश मे युवाओं की यह स्थिति है कि पढ़े लिखे होने के बावजूद भी उन्हें अपनी योग्यता से कम का काम करना पड़ता है तो वही कई लोगो को तो कोई काम ही नही मिल पाता है।

Make in india के तहत बनने वाले उत्पादों के दाम भी कम रहेंगे। भारत के मजदूर सस्ते दाम में उपलब्ध हो जाते है, इससे किसी भी उत्पाद को बनाने में लगने वाला खर्च काफी कम आता है, और यही चीज़ बाजार में कम दाम में मिलता है।

मेक इन इंडिया से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें.

इस योजना को शुरू करते वक़्त ही यह कह दिया गया था कि अब भारत मे बिज़नेस खोलना पहले ही तरह मुश्किल नही है।

पहले जमीन खरीदने और बिजली का कनेक्शन लेने में ही बिज़नेस करने वालों को बड़ी दिक्कत होती थी, इस वजह से भारत को बिज़नेस करने के लिहाज से एक अच्छा देश नही माना जाता था। लेकिन अब स्थिति बदल रही है।

Make in india के तरह देश मे अपनी फैक्ट्री खोलने के लिए 25 सेक्टर चुने गए हैं, जिसमे ऑटोमोबाइल, बायोटेक्नोलॉजी, केमिकल्स, कंस्ट्रक्शन,डिफेंस के साजोसामान,बिजली की मशीनरी, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, फ़ूड पोसेसिंग, चमड़ा, उद्योग, माइनिंग, रेलवे,दवा का उद्योग,रोड और हाईवे, थर्मल पावर टूरिस्म जैसे कई अन्य सेक्टर भी शामिल हैं।

इस योजना के लिए कुल 20 हजार करोड़ निवेश करने की योजना है लेकिन शुरुआती चरण में इसमे मात्र 930 करोड़ का निवेश किया गया था।

व्यापार करने के लिहाज से जो देश सबसे अच्छे माने जाते है, उस सूची में भारत 130 नंबर पर है। यह स्थिति अभी और सुधर रही है।

उपसंहार.

देश का विकास हो सके इसके लिए यह बहुत जरूरी है कि अब देश अपने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करें। दुनियाँ सभी बड़ी अर्थव्यवस्था पर जब नजर डालते हैं तो पता चलता है कि वो मैन्युफैक्चरिंग मव काफी आगे है। इसलिए भारत को भी इन्ही देशो से सीख लेते हुए Make in india Scheme को सफल बनाने की पूरी कोशिश करना चाहिए।

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