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Essay on Hockey in Hindi | हॉकी पर निबंध हिंदी में

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Essay on Hockey in Hindi: हॉकी की खेल काफी लंबे समय से चलते आ रही एक लोकप्रिय खेल है। इस खेल की शुरुआत 1272 ईसा पूर्व से पहले आयरलैंड में हुई थी। इसके अलावा हॉकी के संदर्भ में ऐसा माना जाता है कि हॉकी का प्रारंभ 4000 वर्ष पूर्व मिस्र में भी हुआ था। हॉकी के खेल को 600 ईसा पूर्व प्राचीन यूनान में भी खेला जाता था। यह खेल दो टीमों में खेली जाती है जिसमें लकड़ी या किसी कठोर धातु से बनी एक छड़ी होती है जिसकी सहायता से एक रबर या कठोर प्लास्टिक के गेंद को अपने विरोधी टीम के गोले में डालनी होती है। यह खेल चारदीवारी में खेली जाती है जिसमें एक दल में 6 खिलाड़ी होते हैं और बाकी छह खिलाड़ी सिर्फ परिवर्तन के लिए वहां रहते हैं।

हॉकी के खेल में भारत का प्रदर्शन (India’s performance in hockey game)

हॉकी के खेल में अन्य देशों के साथ साथ भारत भी पीछे नहीं रहा है। भारत के कई खिलाड़ियों ने हॉकी के खेल में अपना अच्छा प्रदर्शन दिया है। 1928 ईस्वी में भारत हॉकी के खेल (Essay on Hockey in Hindi) में विजेता भी रह चुका है। ओलंपिक खेलों में तो भारत ने 6 स्वर्ण पदक अर्थात गोल्ड मेडल भी जीता है। भारत के अलावा जर्मनी, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे देशों में भी हॉकी काफी प्रसिद्ध और लोकप्रिय खेल बन गया । लेकिन वहीं दूसरी ओर इसके अतिरिक्त कई देशों में हॉकी का आरंभ हुआ लेकिन इसके बावजूद इसे एक सही स्थान नहीं मिल सका।

हॉकी के खेल की बढ़ती लोकप्रियता (Growing popularity of hockey game)

हॉकी के खेल (Essay on Hockey in Hindi) की धीरे धीरे लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि वह इंग्लैंड के स्कूल और क्लब में भी खेले जाने लगे। भारत, पाकिस्तान, अफ्रीका देशों के के साथ ऑस्ट्रेलिया और दूसरे देशों में भी इस खेल का महत्व बढ़ने लगा। अब हॉकी एक ऐसे खेल के रूप में उभरा है जिसका लोगों में विश्वास काफी बढ़ गया है। 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में अंग्रेजी विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में भी हॉकी का खेल शुरू किया गया जिसका विवरण 18 सो 61 ईस्वी की एक विवरण पुस्तिका में मिलता है।

भारत में हॉकी का इतिहास और हॉकी अकादमी (History of Hockey and Hockey Academy in India)

हॉकी एक ऐसा खेल है जो सभी देशों में खेला जाता है। यह भारत के एक राष्ट्रीय खेल के रूप में भी जाना जाता है।  माना जाता है कि 1928 से 1956 तक का समय भारत के लिए हॉकी के क्षेत्र में एक स्वर्णिम समय था। प्रारंभिक समय में सैनिक छावनी वाले सभी नगरों विशेषकर जालंधर, लखनऊ, झांसी, लाहौर, जबलपुर आदि में भारतीय हॉकी के गढ़ बनाए गए थे। 

भारत में स्थापित हॉकी अकादमी (Hockey Academy established in India)

धीरे-धीरे भारत में हॉकी का महत्व कम होते गया लेकिन इसे फिर से जीवित करने के लिए कई प्रकार के प्रयास किए गए। आज भारत में तीन ऐसे हॉकी अकादमी हैं जो हॉकी के क्षेत्र में कार्यरत हैं। इन हॉकी अकादमी में नई दिल्ली में एयर इंडिया अकादमी, रांची में विशेष क्षेत्र खेल अकादमी और राउरकेला में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड अकादमी शामिल है। इन अकादमियों में परीक्षार्थी शिक्षा तो ग्रहण करते ही हैं, इसके अलावा उन परीक्षार्थियों को औपचारिक शिक्षा भी दी जाती है। अब इन अकादमियों में मासिक वृत्ति भी दी जाने लगी है। प्रत्येक अकादमियों में कई ऐसे योग्य खिलाड़ी हैं, जो भारत को हॉकी के क्षेत्र में एक बार फिर से नहीं पहचान दिला सकते हैं। क्रिकेट को लेकर लोगों में दिलचस्पी तो है ही साथ ही हॉकी के लिए भी आज के नव युवा अपना समय निकाल रहे हैं और बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

हॉकी के क्षेत्र में नायक कहे जाने वाले दमदार खिलाड़ी (Strong players called heroes in hockey)

भारतीय हॉकी के क्षेत्र में कई सालों तक विश्व विजेता रहे है। हॉकी भारत के अलावा दूसरे देशों में भी काफी प्रसिद्ध है। यह खेल खेलते समय खिलाड़ियों को हर समय रफ्तार से दौड़ना पड़ता है और गेंद को छीनना होता है। दोनों टीमों में 11-11 खिलाड़ी होते हैं। जब तक यह खेल समाप्त नहीं होता है, तब तक खिलाड़ियों को चौकन्ना रहना होता है और खेल को खेलते रहना होता है। स्वर्ण काल के नायक अजीतपाल सिंह, धनराज पिल्ले, अशोक कुमार, मोहम्मद शाहिद, लेस्ली क्लॉडियस आदि थे। हॉकी के क्षेत्र में नायक कहे जाने वाले इन लोगों ने भारतीय हॉकी क्षेत्र को काफी ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास किया।

हॉकी के खेल में महिलाओं की भूमिका (Role of women in hockey game)

विक्टोरियाई युग में महिलाओं पर खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के मामले में काफी प्रतिबंध लगाए गए लेकिन इसके बावजूद भी हॉकी के खेल में महिलाएं बहुत आगे बढ़ी। 1895 ईस्वी से ही महिलाओं ने कई मैत्री प्रतीक प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया। हॉकी (Essay on Hockey in Hindi) का पहला विश्व कप आयोजित 1974 ईस्वी में हुआ।1908 ईस्वी में पहली बार लंदन ओलंपिक में हॉकी के खेल को शामिल किया गया था। इस दौरान ग्रेट ब्रिटेन ने पहला ओलंपिक खेल जीता था। 

हॉकी का खेल धीरे-धीरे विद्यालय, महाविद्यालय और क्लबों में पुरुषों के साथ साथ महिलाओं द्वारा भी खेली जाने लगी और इतना ही नहीं इस खेल ने काफी महिलाओं को लोकप्रियता प्राप्त करने में काफी मदद की। हमारे देश के बहुत से बुद्धिमान खिलाड़ियों ने अनेक बार ओलंपिक खेल जीतकर हमारे देश को गौरवान्वित किया है। प्रारंभिक समय में हो कि हमारे देश की शान थी लेकिन आज के समय में धीरे-धीरे इसकी मान्यता और इसका महत्व भी कम होता जा रहा है।

हॉकी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता का आरंभ (Hockey international competition begins)

हॉकी के क्षेत्र में गंभीर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की शुरुआत 1970 ईस्वी के दशक तक नहीं हुई थी लेकिन धीरे-धीरे लगातार इसका विकास होता चला गया। 1927 ईस्वी में एक अंतरराष्ट्रीय नियामक संस्था का निर्माण हुआ था जिसका नाम इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ वुमन हॉकी (Essay on Hockey in Hindi) एसोसिएशन था। इस खेल की शुरुआत 1921 में ही अमेरिका में कांसटेंस एम ए एप्पेलबी के द्वारा हुई। इसके बाद कई प्रतियोगिताओं को हॉकी के खेल से जोड़ा गया।

हॉकी खेल में हॉकी का मैदान (Hockey field)

हॉकी का खेल मैदान में खेला जाता है जिसमें मैदान का आकार चौकोर होता है। यह मैदान आकार में 91.4 मीटर लंबा एवं 55 मीटर चौड़ा होता है। इस पूरे मैदान के केंद्र में एक रेखा खींची जाती है, जिसे केंद्रीय रेखा कहते हैं और इसके अलावा 22.8 मीटर की दो और रेखाएं वहां खींची होती है। वहां गोले की चौड़ाई 3.66 मीटर होती है जबकि उसकी ऊंचाई 2.13 मीटर तक रखी जाती है। इसमें 11 खिलाड़ियों के दो दल मौजूद होते हैं। हॉकी के खेल में छड़ी की जो लंबाई होती है वह खिलाड़ी के लंबाई पर निर्भर करती है।

हॉकी खिलाड़ियों के लिए पोशाक (Dress for hockey players)

हॉकी खेलने वाले खिलाड़ियों में मुख्य रूप से क्लीट, स्कर्ट, नीकर के साथ ही जर्सी भी शामिल होती है। यह पोशाक खिलाड़ियों की मुख्य पोशाक है, जो प्रत्येक हॉकी खिलाड़ी पहनते हैं। हॉकी के खेल में प्रमुख उपकरण के रूप में हॉकी स्टिक, हॉकी बॉल, आई गार्ड, शीन गार्ड, माउथगार्ड को भी सम्मिलित किया गया है।

हॉकी के विभिन्न प्रकार ( Types of hockey)

हॉकी कई प्रकार की होती है जिसमें मैदानी हॉकी काफी प्रसिद्ध है और जनसामान्य में भी खेली भी जाती है। मैदानी हॉकी को फील्ड हॉकी के नाम से भी जाना जाता है। यह प्राथमिक रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा एवं पूर्वी यूरोप के साथ अन्य देशों में भी काफी लोकप्रिय हुआ।

हॉकी का खेल और उसके नियम (Rules of Hockey in Hindi)

अगर आपने हॉकी का खेल देखा हो तो आपको पता चलेगा की दो टीमों के मध्य खेला जाता है। इस खेल को स्त्री और पुरूष दोनों खेल सकते हैं। हर टीम में 11-11 खिलाड़ी रखें जाते हैं। उन 11 खिलाड़ियों में से 1 को कप्तान चुना जाता है जो सबसे अच्छा नेतृत्व करता है।

इस खेल को कुल 70 मिनट की अवधि में खेला जाता है जिसमें 35-35 मिनट के 2 राउंड खेले जाते हैं।

इन दोनों राउंड के बीच में 5 मिनट का समय दिया जाता जिसमें खिलाड़ी रेस्ट करते हैं।

इस खेल को हॉकी स्टिक से खेला जाता है जो सभी 10 खिलाड़ियों के पास होती है। इस हॉकी स्टिक से बोल को मारकर विरोधी टीम की गोल में पहुंचाना होता है।

हर एक टीम में एक गोल कीपर रखा जाता है जो गोल पोस्ट पर खड़ा रह कर गोल को रोकने की कोशिश करता है।

गोल से संबंधित जरूरी जानकारी –

  • गोल- जयपुर खिलाड़ी हॉकी की गेंद को गोल पोस्ट के भीतर पहुंचा देता है, तो फिर इसे गोल माना जाता है। इस तरह से गोल करने पर गोल दागने वाली टीम को पॉइन्ट मिलते हैं।
  • फ्री हिट- यदि मैदान पर फाउल यह फिर दूसरी टीम से कोई प्रकार की गलती होती है तो फ्री हिट ली जाती है। लेकिन टीम में यह भी है कि जब तक गेंद को कोई दूसरा  खिलाड़ी हिट नहीं करता है। तब तक आक्रामक खिलाड़ी गेंद को हिट नहीं कर सकता है। इसमें यह भी जरूरी है कि जिस टीम से गेंद लाइन के बाहर चली जाती है तो विरोधी विरोधी टीम का खिलाडी ही गेंद को हिट करता है।
  • लॉन्ग कॉर्नर- जब किसी खिलाड़ी के द्वारा 25 गज की रेखा के भीतर गेंद फेंक देता है, तो आक्रमक खिलाड़ी को कॉर्नर मिलता है। कार्नर में गेंद को साइड रेखा तथा गोल को मिलाने वाले कार्नर पर रखकर हिट किया जाता है।
  • पेनल्टी कॉर्नर- जब किसी खिलाड़ी के द्वारा 25 वर्ष के अंदर जानबूझकर नियम में उल्लंघन होता है तो विपक्षी दल को पेनल्टी कॉर्नर दिया जाता है। इसके अनुसार कोई खिलाड़ी गोल्ड रेखा के सामने से 7 गज की दूरी से स्ट्रोक  मार सकता है। जिसे केवल गोल कीपर ही रोक सकता है।

हॉकी खेल के दौरान पालन किए जाने वाले कुछ प्रमुख नियम

  • हॉकी के खेल में यदि गेंद को हाथ से रोका जाए तो इसे रोकना साउंड माना जाता है।
  • यदि हॉकी का गेंद गोलकीपर या किसी खिलाड़ी के कपड़े पर जाकर अटक जाता है तो वहीं से बुल्ली कराकर खेल को फिर से शुरू कराया जा सकता है।
  • गोल रक्षक के लिए यह नियम है कि वह दस्ताने या नीक्कर का प्रयोग कर सकता है।
  • हॉकी के खेल में यदि कोई खिलाड़ी लगातार इसके नियम का उल्लंघन करता है तो उसे कुछ समय के लिए अथवा पूरे खेल से निष्कासित कर दिया जाता है।
  • इस खेल में यह नियम रखा गया है कि हॉकी स्टिक के सहायता के बिना हॉकी (Essay on Hockey in Hindi) के गेंद को लुढ़काया, फेका या उछाला नहीं जा सकता है।
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