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Essay on Hindi Diwas in Hindi | हिंदी दिवस पर निबंध हिंदी में

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Essay on Hindi Diwas in Hindi: हिंदी भाषा का प्रभाव दुनियाँ में तेजी से बढ़ रहा है। इसकी एक वजह हिंदी भाषा का जमकर होने वाला प्रचार-प्रसार है। हिंदी भाषा का प्रचार-प्रसार करने के लिए हर वर्ष 14 सितंबर के दिन हिंदी दिवस मनाया जाता है।

हिंदी दिवस पर निबंध में हम आज हिंदी के महत्व, हिंदी भाषा का इतिहास, हिंदी दिवस मनाने का उद्देश्य के साथ ही हिंदी दिवस पर कविता, हिंदी दिवस पर स्लोगन और हिंदी दिवस पर भाषण जानेंगे।

इस निबंध का उपयोग कक्षा 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10,11,12 के विद्यार्थी कर सकते हैं।

Short Essay on Hindi Diwas in Hindi

प्रस्तावना

विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक भाषा हिंदी है। हिंदी भाषा सबसे ज्यादा बोले जाने के मामले में तीसरे नंबर पर है। हिंदी भाषा का प्रचार-प्रसार बढ़ाने के लिए प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है।

हिंदी दिवस का महत्व | Importance of Hindi Diwas

जब हमारा देश आजाद हुआ था उस वक़्त अंग्रेजी भाषा का बहुत अधिक वर्चस्व था। अंग्रेजी के दवाब में कही हिंदी भाषा पर कोई संकट न उत्पन्न हो, इसके लिए 14 सितंबर 1949 हिंदी को राजभाषा का दर्जा दे दिया गया था।

हिंदी के साथ साथ अंग्रेजी भाषा को भी राजभाषा का दर्जा दिया गया। इसके बाद से ही प्रतिवर्ष हिंदी दिवस मनाया जाने लगा।

हिंदी दिवस का उत्सव | Celebration Of Hindi Diwas

राष्ट्रभाषा का दर्जा पा चुकी हिंदी भाषा का प्रचार-प्रसार करने के लिए हिंदी दिवस के दिन तरह तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

हिंदी दिवस को राजभाषा सप्ताह के तौर पर भी जाना जाता है क्योंकि यह पूरे सप्ताह मनाया जाता है। पूरे एक सप्ताह के दौरान सभी विद्यालयों और कार्यालयों में
विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम होते हैं।

निबंध लेखन, कहानी लेखन, कविता लेखन के अलावा विभिन्न प्रकार के हिंदी लेखन से जुड़े कार्यक्रम करवाये जाते हैं।

उपसंहार

हिंदी भाषा से हम सब जुड़ाव महसूस करते हैं। यह एक ऐसी भाषा है, जिसे बोलने में अधिकतर भारतीय सहज महसूस करते हैं। हिंदी भाषा से लोग प्यार करते हैं। प्रतिवर्ष हिंदी दिवस का सफल आयोजन इसी बात का प्रमाण है।

Essay On Hindi Diwas in Hindi (500 Words)

प्रस्तावना

यह हमारे देश की विडंबना है कि यहां की मूल चीजों को हमेशा हेय दृष्टि से देखा जाता है जबकि पश्चिम रीति रिवाज और वहां से जुड़ी हुई चीजों को श्रेष्ठ दृष्टि से देखा जाता है।

इसका एक सबसे बड़ा उदाहरण हिंदी भाषा की उपेक्षा है। हिंदी भाषा हमारे देश की राजभाषा है। देश के अधिकतर लोग हिंदी भाषा को बोलने एवं समझने में बहुत ही सहज है।

इसके बावजूद भी रोजगार पाने के लिए अंग्रेजी भाषा का ज्ञान होना बहुत ही आवश्यक है उच्च शिक्षा पाने के लिए भी अंग्रेजी आना बहुत जरूरी है।

अंग्रेजी के इसी प्रभुत्व को कम करने के लिए प्रतिवर्ष हमारे देश में हिंदी दिवस मनाया जाता है। हिंदी दिवस का मूल उद्देश्य है देश एवं विदेश में हिंदी भाषा की खूबसूरती और उसके महत्व को समझाना, ताकि अधिक से अधिक लोग हिंदी भाषा को सीखने की कोशिश करें।

विश्व हिंदी दिवस

वैश्विक स्तर पर हिंदी का प्रचार प्रसार करने के लिए लिए और हिंदी को एक अंतरराष्ट्रीय भाषा का दर्जा दिलाने के लिए प्रतिवर्ष 10 जनवरी विश्व हिंदी दिवस के तौर पर मनाया जाता है।

विश्व हिंदी दिवस का पहला सफल आयोजन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में हुआ था। हालांकि उसके बाद विश्व हिंदी दिवस प्रतिवर्ष नहीं मनाया जाता था।

लेकिन 2006 में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी का दिन विश्व हिंदी दिवस के तौर पर मनाए जाने की घोषणा की। उसके बाद से प्रतिवर्ष 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है।

जिन जिन देशों में भारतीय दूतावास स्थापित है उन सभी देशों में विश्व हिंदी दिवस के दिन हिंदी भाषा से जुड़े कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

उन देश के कुछ प्रमुख और गणमान्य लोगों को भी इस खास आयोजन पर आमंत्रित किया जाता है और इनका भागीदार बनाया जाता है।

हिंदी भाषा का महत्व | Importance Of Hindi Language.

हिंदी भाषा ना सिर्फ भारत में बोली जाती है बल्कि भारत के अलावा पाकिस्तान, मॉरीशस, नेपाल, फिजी, गुयाना के साथ-साथ अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका जैसे तमाम देशों में भी बोली जाती है।

दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में हिंदी का चौथा स्थान है। हिंदी का प्रभाव बढ़ता देख 2017 में ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने बड़ा दिन, सूर्य नमस्कार, अच्छा और बच्चा जैसे शब्दों को अपने डिक्शनरी में शामिल किया था।

विश्व आर्थिक मंच ने एक गणना की थी जिसके आधार पर उसने यह निष्कर्ष निकाला था कि हिंदी भाषा विश्व के 10 शक्तिशाली भाषाओं में से एक है।

हिंदीभाषी को नही मिलता महत्व

निसंदेह वैश्विक स्तर पर हिंदी का महत्व एवं प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है लेकिन इसके बावजूद भी हमारे देश की स्थिति जस की तस है।

आज भी हिंदी जानने एवं समझने वाले व्यक्तियों को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता जबकि अंग्रेजी जानने बोलने और समझने वाले व्यक्ति को बहुत ही पढ़ा-लिखा एवं योग्य समझा जाता है।

यह भेदभाव न सिर्फ सामाजिक स्तर पर देखने को मिलता है बल्कि रोजगार से जुड़ी जगहों पर भी झलकता है।

लेकिन अब जरूरत है कि इस अंतर को भरा जाए क्योंकि हमारे देश एक बड़ी आबादी हिंदी भाषा को बोलने में बहुत ही सहज है उन्हें उनकी ही भाषा में पढ़ाई एवं काम करने का अवसर मिलना चाहिए।

उपसंहार

इतिहास गवाह है कि जो देश अपने जड़ों से जुड़कर रहता है, पूरी दुनियाँ में उसी देश का बोलबाला होता है। भारत को अब अंग्रेजी की गुलामी से मुक्ति चाहिए। हिंदी दिवस और विश्व हिंदी दिवस इसी दिशा में किए जाने वाले कुछ प्रयास है।

Essay On Hindi Diwas in Hindi (700 Words)

प्रस्तावना

भारतीय सभ्यता का इतिहास लगभग जितना पुराना है ठीक उतना ही पुराना भारत और हिंदी का नाता भी है। शायद इसी वजह से देश आजाद होने के तुरंत बाद जो सबसे पहला काम किया गया वह हिंदी भाषा को राजभाषा का दर्जा दिलाना था।

आजादी के वक्त जो नीतिनिर्धारक इस बात को भलीभाति समझते थे कि भारत में एक बहुत बड़ी आबादी हिंदी भाषा के प्रति बहुत ही सहज है लेकिन फिर भी हिंदी का स्वरूप उतना विकसित नहीं है।

इसलिए 14 सितंबर हिंदी दिवस के रूप में घोषित किया गया ताकि हिंदी भाषा को जन जन तक पहुंचाने के लिए और हिंदी के शुद्ध रूप से लोग सहज हो और उससे जुड़ सकें इसके लिए समुचित प्रयास किए जा सके।

हिंदी दिवस मनाने का उद्देश्य | Purpose Of Hindi Diwas.

महात्मा गांधी स्वदेशी चीजों के बहुत बड़े पक्षकार थे उनका ऐसा मानना था कि राष्ट्रभाषा के बिना देश गूंगा है।

उन्होंने अंग्रेजी को कभी भी हीन दृष्टि से नहीं देखा। उनका कहना था कि अंग्रेजी पढ़ना जरूरी है और पढ़ना भी चाहिए लेकिन साथ ही साथ हमारे देश की राष्ट्रभाषा होनी चाहिए जिसके माध्यम से देशवासी अपने विचारों का आदान प्रदान कर सकें और उसी भाषा में सभी सरकारी काम भी सहजता के साथ संपन्न हो सके।

महात्मा गांधी के इस विचार को बहुत अधिक महत्व दिया गया और 14 सितंबर 1949 को ही हिंदी भाषा को राजभाषा का दर्जा दे दिया गया।

लेकिन हिंदी भाषा के लिए परिस्थिति इतनी अनुकूल नहीं थी जितनी होनी चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति आम बोलचाल में हिंदी भाषा का तो उपयोग करते थे लेकिन जब किसी उच्च मंच पर हिंदी भाषा का उपयोग किए जाने की बात आती थी तो वहां पर लोग कतराते थे। ऐसे मंच पर हिंदी की वजह अंग्रेजी भाषा को तरजीह दी जाती थी।

इसी वजह से हमारे देश के लोगों में भी इस मानसिकता ने जन्म ले लिया कि हिंदी भाषा जाने वाले लोग अंग्रेजी भाषा जानने वाले लोगों की तुलना में कम योग्यता रखते हैं।

तभी यह जरूरत महसूस की गई कि आम जनता तक हिंदी भाषा की उपयोगिता और उसके महत्व की जानकारी पहुंचाना बहुत आवश्यक है इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर हिंदी दिवस मनाने की शुरुआत हुई।

हिंदी भाषा से जुड़ी कुछ दिलचस्प जानकारियां | Interesting Facts About Hindi Diwas

हिंदी भाषा में संस्कृत, फारसी, अंग्रेजी, उर्दू, अरबी आदि भाषाओं के शब्द शामिल रहते हैं।

करीब 18 करोड़ भारतीय लोगों की मातृभाषा हिंदी है वहीं करीब 30 करोड़ लोग दूसरी भाषा के रूप में हिंदी का उपयोग करते हैं।

हिंदी भाषा के महत्व को समझ कर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के द्वारा हिंदी भाषा कि शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए को 14 मिलियन डॉलर आवंटित किए थे।

हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने का विचार महात्मा गांधी ने उन्हें 1918 में हिंदी साहित्य सम्मेलन के दौरान दिया था। महात्मा गांधी हिंदी भाषा को आम लोगों की भाषा कहां करते थे।

दुनिया भर के करीब 176 विश्वविद्यालयों में हिंदी की शिक्षा दी जाती है इनमें से 45 विश्वविद्यालय तो सिर्फ अमेरिकी है।

हिंदी भाषा में लिंग भेद की व्याख्या बहुत अच्छी तरह से की गई है। किसी भी संज्ञा में लिंग भेद पूरी स्पष्टता के साथ बताया गया है जबकि अंग्रेजी भाषा में स्त्रीलिंग और पुल्लिंग के बीच अंतर सभी जगह देखने को नहीं मिलता।

यह हिंदी भाषा की ताकत है जो इसका उपयोग वेब एड्रेस बनाने में भी किया जाता है।

दुनिया में ऐसी बहुत ही कम भाषाएं हैं जिनमें किसी भी ध्वनि को लिखा जा सकता है। यह हमारा सौभाग्य है कि हिंदी भाषा भी उन्हीं भाषाओं में से एक है जिनमें हम किसी ध्वनि को लिख सकते हैं।

हिंदी दिवस के दिन मिलने वाले पुरस्कार

हिंदी दिवस (Essay on Hindi Diwas in Hindi) मनाने का मुख्य उद्देश्य यही है कि लोग इस भाषा के प्रति जागरूक हो और अधिक से अधिक हिंदी का उपयोग करें। हिंदी भाषा का विकास तभी हो पाएगा जब ज्यादा से ज्यादा लोगो के द्वारा हिंदी बोली और समझी जा सकेगी।

इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर हिंदी दिवस के कुछ पुरस्कार वितरित किए जाते हैं, ताकि लोगो के मन मे हिंदी के प्रति उत्साह बना रहें और वो इस भाषा के विकास के लिए कार्य करते रहे।

हिंदी दिवस के दिन मिलने वाले पुरस्कार निम्नलिखित है:-

राजभाषा गौरव पुरस्कार

यह पुरस्कार उन लेखकों को दिया जाता है जिन्होंने विज्ञान, तकनीकी के क्षेत्र में हिंदी भाषा (Essay on Hindi Diwas in Hindi) में कुछ लोकप्रिय और ज्ञानवर्धक किताब, साहित्य आदि लिखा है।

इसमें कुल 13 पुरस्कार शामिल होते हैं, जिनकी कीमत 10 हजार से लेकर 2 लाख रुपये तक होती है। प्रथम पुरस्कार विजेता को 2 लाख रु, दूसरे पुरस्कार विजेता को 1.5 लाख रु. और तृतीय पुरस्कार विजेता को 75 रु. की धनराशि प्राप्त होती है।

इसके साथ ही 10 लोगों को प्रोत्साहन पुरस्कार के तौर पर 10-10 हजार रु. दिए जाते हैं। धनराशि के साथ साथ स्मृति चिन्ह भी दिये जाते हैं।

राजभाषा कीर्ति पुरस्कार

यह पुरस्कार किसी व्यक्ति विशेष को नही बल्कि एक संस्था, विभाग, मंडल आदि को हिंदी के लिए गए किसी अच्छे कार्य के लिए दिए जाते हैं। इसमे 39 प्रकार के पुरस्कार शामिल होते हैं।

किसी संस्था में हिंदी का ज्यादा से ज्यादा उपयोग हो, इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए यह पुरस्कार वितरित किये जाते हैं।

हिंदी दिवस की आलोचना

कुछ विद्वान हिंदी दिवस के दौरान होने वाले आयोजनों को लेकर खुश नही है। उनका कहना है कि हिंदी दिवस (Essay on Hindi Diwas in Hindi)  सिर्फ खानापूर्ति के लिए मनाया जाता है और 1 दिन में ही सभी कार्यक्रम करवा दिए जाते हैं।

हिंदी दिवस के दिन भी कई सरकारी कर्मचारी अंग्रेजी भाषा का ही उपयोग अपने कामकाज में करते है और होने वाले कार्यक्रमों के दौरान भी अंग्रेजी का उपयोग करते हैं।

वही इस तर्क के विपरीत कुछ लोगो का यह कहना है कि विरोध करने वाले लोग नही चाहते कि हिंदी भाषा का प्रसार हो। कुछ लोग जनमानस की भाषा हिंदी को विलोपित होता हुआ देखना चाहते हैं।

निष्कर्ष

यह बात पूरी तरह स्पष्ठ है कि आज हिंदी भाषा का कद बढ़ रहा है। देश के साथ साथ पूरा विश्व हिंदी के महत्व को स्वीकार रहा है, इसका सबसे बड़ा उदाहरण गूगल है, जो अब हिंदी वेबसाइट को भी ज्यादा महत्व देने लगा है।

Essay On Hindi Diwas In Hindi (1000 Words)

प्रस्तावना

संविधान के अनुच्छेद 343 में देवनागरी लिपि में जो हिंदी लिखी हुई है, उसे राजभाषा का दर्जा दिया गया है। वैसे तो हिंदी भाषा का चलन लोगो के बीच हमेशा ही रहा है लेकिन देश की आधिकारिक भाषा होने का दर्जा 14 सितंबर 1949 को मिला था।

तभी यह दिन हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। हिंदी दिवस, हर हिंदीभाषी के लिए बहुत खास है क्योंकि इस दिन हिंदी में निबंध लेखन, कहानी लेखन जैसी कई साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन करवाया जाता है।

हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा नही है।

हमारा देश बहुत बड़ा है। यहाँ राज्य बदलते ही बोली भाषा बदल जाती है। 2011 में एक आंकड़े में बताया गया था कि हमारे देश मे करीब 121 भाषाएँ बोली जाती है।

भाषाओं में इतनी विविधता होने के बाद किसी एक भाषा को देश की भाषा के तौर पर मान्यता देना एक बड़ी चुनौती है। इसी वजह से हमारे देश की कोई राष्ट्रभाषा नही है।

हम इस भ्रांति में रहते हैं कि हिंदी हमारे देश की राष्ट्र भाषा है, पर यह सत्य नही है। हालांकि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर संस्कृत भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा देना चाहते थे।

लेकिन सर्वसम्मति न बनने के बाद यह संभव नही हो पाया। तभी संविधान में कुछ भाषाओं को राजभाषा का दर्जा दिया गया।

राजभाषा वह भाषा है जिनमें सरकारी कामकाज हो सकते हैं। संविधान में कुल 22 भाषाओं को राजभाषा का दर्जा दिया है जिनमें से हिंदी भी एक है।

हिंदी भाषा का इतिहास | History Of Hindi Language.

हिंदी भाषा का इतिहास करीब 1000 वर्ष पुराना माना जाता है। हमें कई ऐसी रचनाएँ पढ़ने को मिलती है जिनकी रचना आज से करीब 1000 पूर्व हुई थी।

इसी आधार पर हिंदी भाषा की उम्र तय की गई है। 7-8 वी सदी में प्राकृत भाषा मे कई ग्रंथ रचे गए थे। इन्ही भाषा से कई अपभ्रंश भाषाओं का जन्म हुआ, जिनमे से एक हिंदी भी है। हिंदी भाषा को प्राकृत भाषा का अपभ्रंश माना जाता है।

अपभ्रंश की अंतिम अवस्था अवहट्ट कहलाती है। इसी से हिंदी भाषा का जन्म हुआ है। कई साहित्यकार अवहट्ट को पुरानी हिंदी का नाम भी देते हैं।

अपभ्रंश के रूप में जन्मी इस भाषा को लोगों ने बड़ी ही सहजता से स्वीकार किया और साहित्य की दुनिया में भी इसकी स्वीकार्यता बढ़ती गई। कई लेखकों ने हिंदी में ही दोहा और पद्य रचना की।

मध्यकाल में भक्त कवियों का बोलबाला रहा। मीराबाई, तुलसीदास (Essay on Hindi Diwas in Hindi) जैसे कई कवियों ने अपनी भाषा को आम जनमानस तक पहुंचाने के लिए हिंदी को ही चुना।

धीरे-धीरे यह भाषा जितनी ज्यादा लोगों के बीच लोकप्रिय होती गई उतनी ही ज्यादा आम जनमानस में भी जगह बनाती गई।

स्वतंत्रता संग्राम के वक्त कई लेखकों ने अपनी बात आम जनता तक पहुंचाने के लिए हिंदी का सहारा लिया। हिंदी भाषा की सबसे खास बात यह रही कि इसमें बात को बहुत ही स्पष्टता के साथ कहा जा सकता है।

यह एक तरह के मिश्रित भाषा है जिसमें अनेक भाषाओं के उन शब्दों को शामिल किया जाता है। जिन्हें समझना बहुत आसान होता है हिंदी भाषा की इसी गुण की वजह से बहुत ही जल्द यह भाषा लोकप्रिय हो गई और आज हमारे देश की 80% आबादी हिंदी भाषा समझती और बोलती है।

हिंदी दिवस के दिन होने वाले कार्यक्रम.

हिंदी दिवस सरकारी कार्यालयों के साथ-साथ विद्यालय एवं कॉलेजों में भी मनाया जाता है। इस दिन विद्यालयों में हिंदी विषय से जुड़े ऐसे कार्यक्रम करवाए जाते हैं, जिससे विद्यार्थियों के मन में हिंदी भाषा के प्रति सम्मान बढ़े।

निबंध लेखन वाद-विवाद, काव्य गोष्ठी, विचार गोष्ठी, हिंदी टंकण प्रतियोगिता, शुद्ध लेखन प्रतियोगिता जैसे कई दिलचस्प प्रतियोगिताओं का आयोजन करवाया जाता है।

प्रतियोगिता समाप्त होने के पश्चात विजेता को उचित इनाम दिया जाता है। इसलिए विद्यार्थियों को हिंदी साहित्य से जुड़े बड़े बड़े लेखकों एवं कवियों के बारे में जानकारी दी जाती है।

उन्हें कुछ बहुत ही उत्कृष्ट रचना पढ़ने के लिए दी जाती है। कुल मिलाकर इस दिन पूरा विद्यालय हिंदी भाषा के रंग में डूबा हुआ नजर आता है। शिक्षकगण एवं विद्यार्थियों के बारे में हिंदी भाषा के प्रति इस दिन अपार स्नेह झलकता है।

हिंदी दिवस पर कविता | Hindi Diwas Poem

हिंदी दिवस से जुड़ी कुछ कविताएं:-

# हम हिंदी बोलने से शर्माते हैं

अंग्रेजी में नंबर थोड़े कम आते हैं,
अंग्रेजी बोलने से भी घबराते हैं,
पर स्टाइल के लिए पूरी जान लगाते हैं,
क्योंकि हम हिंदी बोलने से शर्माते हैं,
एक वक्त था जब हमारे देश में हिंदी का बोलबाला था,
मां की आवाज में भी सुबह का उजाला था,
उस मां को अब हम Mom बुलाते हैं,
क्योंकि हम हिंदी बोलने से शर्माते हैं,
देश आगे बढ़ गया पर हिंदी पीछे रह गई,
इस भाषा से अब हम नजर चुराते हैं,
क्योंकि हम हिंदी बोलने से शर्माते हैं,
माना, अंग्रेजी पूरी दुनिया को चलाती है,
पर हिंदी भी तो हमारी पहचान दुनिया में कराती है,
क्यों ना अपनी मातृभाषा को फिर से सराखों पर बिठाए,
आओ हम सब मिलकर हिंदी दिवस मनाए।

# हिंदी हमारी शान है.

हिंदी हमारी आन है हिंदी हमारी शान है,
हिंदी हमारी चेतना वाणी का शुभ वरदान है,
हिंदी हमारी वर्तनी हिंदी हमारा व्याकरण,
हिंदी हमारी संस्कृति हिंदी हमारा आचरण,
हिंदी हमारी वेदना हिंदी हमारा गान है,
हिंदी हमारी आत्मा है भावना का साज़ है,
हिंदी हमारे देश की हर तोतली आवाज़ है,
हिंदी हमारी अस्मिता हिंदी हमारा मान है।,
हिंदी निराला, प्रेमचंद की लेखनी का गान है,
हिंदी में बच्चन, पंत, दिनकर का मधुर संगीत है,
हिंदी में तुलसी, सूर, मीरा जायसी की तान है।,
जब तक गगन में चांद, सूरज की लगी बिंदी रहे,
तब तक वतन की राष्ट्रभाषा ये अमर हिंदी रहे,
हिंदी हमारा शब्द, स्वर व्यंजन अमिट पहचान है,
हिंदी हमारी चेतना वाणी का शुभ वरदान है।

# वह हिंदी है.

एक डोर में सबको जो है बांधती वह हिंदी है,
हर भाषा को जो सगी बहन मानती वह हिंदी है,
भरी-पूरी हो सभी बोलियां यही कामना हिंदी है,
गहरी हो पहचान आपसी यही साधना हिंदी है,
सोते विदेशी रह ने रानी यही भावना हिंदी है,
तत्सम, तद्भव, देश विदेशी रंगों को अपनाती,
जैसा आप बोलना चाहे वही मधुर वह मन भाती,
नए अर्थ के रूप धारती हर प्रदेश की माटी पर,
खाली पीली बोम मारती मुंबई की चौपाटी पर,
चौरंगी से चली नवेली प्रीति प्यासी हिंदी है,
बहुत-बहुत तुम हमको लगती भालो-बाशी हिंदी है,
उच्च वर्ग की प्रिय अंग्रेजी हिंदी जन की बोली है,
वर्ग भेद को खत्म करेगी हिंदी वह हमजोली है,
सागर में मिलती धाराएं हिंदी सबकी संगम है,
शब्द, नाद लिपि से भी आगे एक भरोसा अनुपम है,
गंगा कावेरी की धारा साथ मिलाती हिंदी है,
पूरब-पश्चिम कमल पंखुरी सेतु बनाती हिंदी है।

हिंदी दिवस स्लोगन

हमारी शान है हिंदी
देश का अभिमान है हिंदी।।

सब मिलकर एक संकल्प उठाते हैं
सब मिलकर हिंदी को अपनाते हैं।।

हर भाषा की इज्जत करो
पर हिंदी को न बेइज्जत करो।।

सोंधी सुगंध, मीठी सी भाषा
गर्व से कहो हिंदी है मेरी भाषा।।

अब ना कोई आकार दो ना कोई प्रकार दो
बस हिंदी भाषा का ज्ञान दो।।

हिंदी सबको साथ लाएगी
हमारी मातृभाषा ही देश को तरक्की के राह पर ले जाएगी।।

सबसे सुन्दर, सरल और प्यारी
ऐसी है हिंदी भाषा हमारी
जो है सबसे ज्यादा न्यारी
इसका प्रयोग करते है हम हर बारी।।

निष्कर्ष

हिंदी हमारा गर्व है, शान है। लेकिन फिर भी उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए अभी भी अंग्रेजी भाषा पर निर्भर है। जर्मनी, जापान जैसे कई विकसित देश उच्च शिक्षा स्वदेशी भाषा मे ही उपलब्ध कराते हैं।

हमें भी अब जरूरत है कि हमारी राजभाषाओं को बढ़ावा दिया जाए ताकि लोगो पर अंग्रेजी सीखने का बोझ कम हो सके।

हिंदी दिवस पर भाषण | Short Speech on Hindi Diwas.

आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, सभी उपस्थित शिक्षकगण और मेरे प्यारे छोटे बड़े भाइयों और बहनों.

आज हिंदी दिवस के इस पावन बेला पर मैं कुछ शब्द आप सबके सामने कहने के लिए मंच पर आया हूँ। हमारा देश जब पराधीनता की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था और लोग दाने दाने के मोहताज थे, उस वक़्त महात्मा गाँधी ने देश को यह संदेश दिया था कि पहले स्वदेशी तो अपनाओ, आजादी खुद ही मिल जाएगी।

असल मे हम सिर्फ अंग्रेजो के ही गुलाम नही थे, हम गुलाम थे पाश्चात्य सभ्यता के, हम गुलाम थे अंग्रेजी भाषा के, हम गुलाम थे हीन-भावना के।

इसी वजह से हमने कभी भी हिंदी भाषा को उचित स्थान दिया ही नही। हमने कभी यह नही सोचा वो बच्चे जो अंग्रेजी नही सीख सकते हैं वो इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई कैसे कर पाएंगे?

हमने एक मापदंड बना लिया कि जो अंग्रेजी जानता है वही योग्य है और फिर फिर चल पड़ी अंग्रेजी सीखने की एक दौड़, जिसमे अमीर और गरीब सभी दौड़ रहे हैं।

आज यह सुनकर निराशा होती है कि बच्चो की हिंदी की गिनती नही आती, उन्हें अंग्रेजी में बताना पड़ता है. तो मैं पूछना चाहता हूं कि क्या हम यूरोप में रह रहे हैं?

क्या भारत मे हिंदी का उपहास इसी तरह उड़ाया जाता रहेगा? और यदि हम हिंदुस्तान में हिंदी नही बोलेंगे, समझेंगे तो फिर कहाँ समझेंगे?

हिंदी दिवस के इस उपलक्ष्य पर आज मैं अपने आखिरी बात कहकर शब्दों को विराम दूंगा की हमें अपनी भाषा को ताकतवर बनाने की जरूरत है। यदि हिंदी को मजबूत बनाना है तो हमें इसे और प्रभावी बनाने की जरूरत हैं।

हिंदी दिवस पर भाषण | Long Speech On Hindi Diwas.

आदरणीय मुख्य अतिथि, समस्त शिक्षकगण और यहाँ उपस्थित सभी सहपाठी.

आज 14 सितंबर के दिन है। आज हमारे लिए गौरव का दिन है क्योंकि आज का दिन हमारी राजभाषा हिंदी को समर्पित है। हिंदी का महत्व हम सबको भली-भांति पता है। हम सब हिंदी भाषा के प्रति बहुत सहज है। हम कितनी भी भाषाएँ क्यों न सीख लें पर जो मजा हिंदी बोलने और सुनने में है वो किसी दूसरी भाषा मे नही है।

हिंदी भाषा कितनी खूबसूरत है, इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि आज दुनियाँ में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में हिंदी का चौथा स्थान है।

कई यूरोपीय देश अपने यहाँ के लोगो को हिंदी सिखा रहे हैं। उनका यह मानना है कि आगे आने वाले वक्त में भारत एक बहुत बड़ा बाजार बनकर सामने आने वाला है।

इसी बात को ध्यान में रखकर लोग हिंदी सीख रहे है। हिंदी भाषा के महत्व को महात्मा गाँधी ने बहुत पहले समझ लिया था तभी 1918 में गाँधी जी ने हिंदी साहित्य सम्मेलन हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा देने की बात कही थी।

हालांकि हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा तो कभी नही मिल पाया क्योंकि हमारा देश बहुत विविधता से भरा है। इसी विविधता के चलते किसी एक भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा देना बहुत मुश्किल था। इसलिए हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया।

2011 में जनगणना हुई थी जिसके अनुसार भारत मे सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा हिंदी है। 2001 में हिंदी बोलने वालों की संख्या 41.03% थी, वही 2011 में यह बढ़कर 43.63% हो गई थी।

आज अंग्रेजी सीखना बहुत जरूरी है, लेकिन हिंदी को भी उतना ही महत्व देना चाहिए। क्योंकि हमारी जड़ हिंदी से जुड़ी है। हम हिन्द देश के वासी है और हिंदी ही हमारी पहचान है। मैं आज के माता पिता से भी यह कहना चाहूंगा कि वह अपने बच्चों को हिंदी भाषा से नजदीकी बनाने के लिए कहें।

उन्हें हिंदी के महत्व (Essay on Hindi Diwas in Hindi) के बारे में बताएं। हिंदी के साहित्य पढ़ने के लिए प्रेरित करें ताकि हिंदी भाषा के प्रति उनका लगाव बढ़ सकें और अगली पीढ़ी हिंदी सीख सके।

धन्यवाद.

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