Essay on Dussehra | Dussehra Nibandh In Hindi | दशहरा निबन्ध हिंदी में

essay on Dussehra In Hindi

Essay on Dussehra | Dussehra Nibandh In Hindi | दशहरा निबन्ध हिंदी में

Essay on Dussehra In Hindi : दशहरा का त्योहार पूरे भारतवर्ष में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाने वाला त्यौहार है। यह त्यौहार आश्विन शुक्ल दशमी को मनाया जाता है। खास तौर से यह त्यौहार हिंदू धर्म के लिए एक महत्वपूर्ण त्यौहार मना जाता है। भारत की संस्कृति में इस त्यौहार को वीरता का प्रतीक माना जाता है और इसी वीरता के प्रतीक के कारण दशहरे को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। आज हम आर्टिकल के जरिए दूसरे पर संक्षिप्त विवरण आपके सामने पेश करेंगे।

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दशहरा निबन्ध हिंदी में (Dussehra Nibandh In Hindi)  – Essay on Dussehra in Hindi (300 Words)

त्रेतायुग में जब श्री राम का जन्म हुआ था तभी यह तय हो गया था कि अब रावण का अंत आ चुका है, और आखिरकार श्री राम ने शारदीय नवरात्रि समाप्त होने के अगले ही दिन रावण का वध कर दिया था।

तभी से यह दिन विजयदशमी या दशहरा के तौर पर मनाया जाता है।

कौन था रावण? (Essay on Dussehra In Hindi)

रावण के बारे में कहा जाता है कि वह भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था। उसने भगवान शिव की घोर तपस्या की और 9 बार अपने सिर काट दिया था क्योंकि भगवान उसे दर्शन नही दे रहे थे। लेकिन आखिरकार भगवान ने दर्शन दिया और रावण ने यह वरदान मांगा की उसे देव,दानव,गंधर्व, यक्ष आदि कोई भी न मार सकें।

लेकिन वह इंसान कहना भुल गया क्योंकि उनको यह पूरा यकीन था कि इंसान उसे कभी मार ही नही सकते।
और फिर त्रेतायुग में राम का जन्म हुआ जो भगवान विष्णु के अवतार तो थे लेकिन एक आम इंसान की तरह जीवनयापन करते थे।

रावण को चारों वेदों का ज्ञाता कहा जाता है। वह इतना बलशाली था कि उसने इंद्र लोक पर भी कब्जा करने की सोच बना ली थी। उसने सभी देवताओं और ग्रहों को अपने अधीन कर लिया था ताकि कभी उसकी मृत्यु का ही न सकें।

लेकिन जो पृथ्वी पर जन्मा है उसे एक न एक दिन छोड़कर तो जाना ही पड़ेगा और रावण के साथ भी यही हुआ। उसकी मृत्यु कारण सीता बनी जो श्री राम की पत्नी थी।

दशहरा का मुख्य आकर्षण.

इस त्योहार का मुख्य आकर्षण रावण दहन होता है। चाहे गाँव हो या शहर, हर जगह लोग रावण दहन देखने के लिए काफी उत्साहित रहते हैं। रावण दहन के पहले कई जगह रामलीला भी कर करवाई जाती है और बताया जाता कि किस तरह से रावण का दहन हुआ था।

उपसंहार.

भारत की भूमि त्योहारों की भूमि कहलाती है। त्योहार यानी कि जीवन मे उत्साह का एक नया रंग। दशहरा भी एक ऐसा ही त्यौहार है, जिसमे बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी खुश होते है और खुशी खुशी त्यौहार मानते हैं।

दशहरा निबन्ध हिंदी में (Dussehra Nibandh In Hindi)  – Essay on Dussehra in Hindi (400 Words)

दशहरा का त्यौहार पूरे भारत देश मे धूमधाम से मनाया जाता है। भारत के अलावा दुनियाँ के और भी कई देशों दशहरा मनाया जाता है। यह त्यौहार प्रति वर्ष शारदीय नवरात्रि के 9 दिन पूरा हो जाने के बाद 10वे दिन मनाया जाता है।

दशहरा को विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है। पूरी दुनियाँ में यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर जाना जाता है।

दशहरा से हमें क्या सीख मिलती है?

हमारे देश की यह विशेषता है कि यहां मनाए जाने वाले हर त्यौहार में समाज के लिए एक संदेश छुपा होता है, लेकिन रस्मों को निभाते निभाते हम उस मूल भावना को भूल जाते हैं।

कई विद्ववानों ने दशहरा को एक अलग तरीके से समझाया है। उनके अनुसार रावण कही बाहर नही बल्कि हमारे अंदर है, 5 ज्ञानेंद्रियां और 5 कर्मेंद्रियां इसके 10 सिर है।

हमें जीवन मे आगे बढ़ना है और तरक्की करना है तो इन 10 इंद्रियों पर विजय प्राप्त करनी होगी और विजय दशमी हमें यही संदेश देता है।

हम सबको अपने अंदर बैठे रावण को मारना होगा। हमें स्त्रियों की ठीक उसी तरह इज्जत करनी चाहिये, जैसे श्री राम करते थे।

आजकल लोग छोटी छोटी बातों में अपनी पत्नी को तवज्जो नही देते, लेकिन श्री राम त्रेतायुग में अपनी पत्नी को खोजने के लिए दर दर भटक रहे थे।

चाहते तो वह दूसरी शादी भी कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नही किया बल्कि अपनी पत्नी को ढूढने निकल पड़े जो कहाँ है उन्हें नही पता था।

दशहरा इन्ही सब बातों का संदेश देता है। हम एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को सिर्फ रीति-रिवाज देते हैं लेकिन उसमें छुपे गहरे ज्ञान को देंना भूल जाते हैं।

दशहरा से जुड़ी कुछ खास बातें.

दशहरे से कई कथाएं जुड़ी है, जिनमे से सबसे ज्यादा प्रचलित श्री राम के द्वारा रावण का वध किया जाना है। लेकिन इसके साथ माँ दुर्गा के द्वारा महिषासुर का वध,देवी सती का अग्नि में समा जाना और पांडवों का वनवास भी विजयदशमी के दिन से जुड़ा है।
रावण की लंका सोने की बनी थी, लेकिन उसने यह खुद नही बनवाई थी, बल्कि कुबेर को युद्ध मे हराकर छीनी थी।
कई रामायण में यह कहा गया है कि माता सीता, रावण की पुत्री थी। रावण को पता चल गया था कि माता सीता ही उसकी मृत्यु का कारण बनेगी इसलिए उसने मिट्टी में दफना दिया था।

उपसंहार.

दशहरा की तैयारियां करीब 5 दिन पहले से ही शुरू हो जाती हैं। माता के 9 दिनों के समाप्ति के साथ दशहरा पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है, और यह कामना की जाती है कि जिस तरह से भगवान राम ने अपने दुश्मन को हराया था, ठीक उसी तरह हम भी अपने जीवन मे आने वाली परेशानियों को हरा सकें।

दशहरा निबन्ध हिंदी में (Dussehra Nibandh In Hindi)  – Essay on Dussehra in Hindi (500 Words)

हिन्दू धर्म के कुछ प्रमुख त्योहारों में से एक त्योहार दशहरा है। यह त्योहार मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस दिन देश भर के लोग भगवान राम की पूजा वंदना करते हैं।

ऐसी मान्यता है कि इसी दशहरा के दिन ही भगवान राम दशानन रावण का वध किया था, और उसके बाद वह अयोध्या के लिए वापस निकले थे।

दशहरा क्यों मनाया जाता है?

दशहरा क्यों मनाया जाता है इसके पीछे कई पौराणिक कथाएँ जुड़ी है लेकिन जो सबसे बड़ी वजह है वह श्री राम का रावण का वध करना है।

श्री राम अयोध्या के राजकुमार थे। उनके पिता दशरथ के चार पुत्रों राम, लक्ष्मण, भारत, शत्रुघन में राम सबसे बड़े थे।

श्री राम का विवाह राजा जनक की बेटी सीता से हुआ था। विवाह के बाद राजा दशरथ कुछ कारणों की वजह से श्री राम को चौदह वर्ष का वनवास दिया। श्री राम के साथ वनवास के लिए उनके छोटे भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता भी गई।

वनवास के दौरान तीनों ने काफी कष्ट उठाएं। इसी दौरान लंका के राजा रावण ने माता सीता का हरण कर लिया और लंका की अशोक वाटिका में उन्हें रख दिया।

आगे चलकर श्री राम की मुलाकात सुग्रीव और हनुमान जी हुई, जिसके बाद उन्होंने माता सीता का पता लगाया। इसके बाद श्री राम अपनी पूरी सेना के साथ लंका पर चढ़ाई करने के लिए निकल पड़े।

लंका का राजा बहुत ही ज्ञानी, चालक और बुद्धिमान माना जाता था। वह इतना ताकतवर था कि उसने सभी देवताओं को अपना गुलाम बना लिया था। रावण को दशानन कहा जाता है क्योंकि उसके 10 सिर थे।

रावण और श्री राम की सेना और उन दोनों के बीच बहुत बड़ा युद्ध हुआ, जिसमें रावण के भाई विभीषण का साथ भी श्री राम को मिला।

अंततः युद्ध मे श्री राम और उनकी सेना की विजय हुई। राम ने रावण का वध कर दिया, और माता सीता को लेकर अयोध्या वापस आ गए।

दशहरा कैसे मनाया जाता है?

दशहरा हमेशा दीपावली के 20 दिन पहले पड़ता है। नवरात्रि में माता के 9 दिनों के व्रत के बाद 10 दिन विजय दशमी मनाई जाती है। दशहरा के दिन घर के सभी लोग तैयार होते हैं और अपने आसपास के जगहों में रावण दहन देखने के लिए जाते हैं।

कई जगह रामलीला का मंचन भी होता है, जिसे लोग पूरे उत्साह के साथ देखते हैं। रामलीला में कई पात्र होते हैं जो रामायण के किरदारों की भूमिका में रहते हैं।

दशहरा में लगने वाला मेला.

बच्चों को सबसे ज्यादा इंतजार दशहरा में लगने वाले मेले का रहता है जो हर साल लगते हैं। इन मेलों में हर तरह का सामान मिल जाता है। बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा पर लोग अपने घरों को, समान को पशुओं आदि की सफाई करते हैं, नहलाते है।

किसान, इंजीनियर लोग रोजगार से जुड़ी मशीनरी की धुलते हैं।

उपसंहार.

दशहरा भारत के अलावा नेपाल, बांग्लादेश, मलेशिया जैसे कई देशों में मनाया जाता है। रामलीला का मंचन भी किया जाता है। यह त्यौहार एक सकारात्मक ऊर्जा देता है, लोगों में जीवन के प्रति एक नया उत्साह आता है। साथ ही यह यकीन भी की बुराई कितनी भी बड़ी हो, अंत मे जीत सच्चाई की ही होती है।

दशहरा निबन्ध हिंदी में (Dussehra Nibandh In Hindi)  – Essay on Dussehra in Hindi (700 Words)

विजयदशमी के दिन मनाया जाने वाला यह त्योहार भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। हिंदू धर्म का एक मुख्य त्योहार है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हैं इसीलिए इस दशहरे के उत्सव को हर साल विजयदशमी के दिन मनाया जाता है।

दशहरे का त्यौहार इसलीए मनाया जाता है। क्योंकि माना जाता है, कि भगवान राम ने इसी विजयादशमी के दिन रावण का वध किया था। इसी उपलक्ष में यह त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन असत्य की हार और सत्य की विजय हुई थी। दशहरा के इस दिन को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है। दशहरा को एक शुभ दिन माना जाता है और कई लोग इस दिन से अपने नए कार्य शुरू करते हैं।

पुराने समय के महाराजा इस दिन विजय की प्रार्थना करके रणभूमि में युद्ध के लिए प्रस्थान करते हैं। दशहरा का यह त्योहार 10 प्रकार के पापों को छोड़ने की प्रेरणा सभी लोगों को देता है। जैसे:- गलत काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी इत्यादि।

दशहरा शब्द की उत्पत्ति

दशहरा शब्द की उत्पत्ति ‘दश'(दस) एवं ‘अहन्‌‌’ से हुई है। इसके अलावा दशहरा का उत्सव क्यों मनाया जाता है। इसके लिए कई अलग-अलग मत सामने आए हैं। कई लोग दशहरे के उत्सव को कृषि के उत्सव के रूप में मनाते हैं। तो कई लोग इस उत्सव को सांस्कृतिक पहलू के रूप में राम द्वारा रावण के वध करने की खुशी के उपलक्ष में मनाते हैं।

जो लोग इस उत्सव को कृषि का उत्सव मानते हैं। उनका कहना है,कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और जब किसान अपने खेत में फसल उगाता है। तो लगभग इस दिन के आसपास वह अनाज रूपी संपत्ति अपने घर पर ले आते है। और इसी उपलक्ष में वह दशहरा का त्यौहार मनाता है। लोगों का कहना है, कि दशहरा के समय बरसात की ऋतु समाप्त हो जाती है। नदियों की बाढ़ धम जाती है।

नवरात्रि से भी इस उत्सव का संबंध है। नवरात्रि के पश्चात यह उत्सव आता है। ऐसा उल्लेख किया गया है कि महिषासुर के विरोध में देवी के साहस पूर्ण कार्य जिसके कारण दशहरा नवरात्रि के बाद दसवें दिन को मनाया जाता है और इसी दिन राम ने रावण का वध किया था।

राम और रावण का युद्ध

लंका के नरेश रावण ने भगवान राम की पत्नी देवी सीता का अपहरण करके उसे अपने राज्य लंका ले गया था। और देवी सीता को अपनी पत्नी बनाना चाहता था। लेकिन देवी सीता के मना करने के पश्चात रावण ने उसे अशोक वाटिका में कैद करके रखा था। वैसे तो रावण देवी सीता से जबरदस्ती विवाह कर सकता था। लेकिन उसे एक महा ऋषि द्वारा महिलाओं को उनकी इच्छा के बिना ना छूने का श्राप मिला हुआ था। इसीलिए देवी सीता के हा करने तक रावण उसे अशोक वाटिका में कैद करके रखा था।

इसीलिए भगवान राम अपनी पत्नी को ढूंढते-ढूंढते लंका तक पहुंचे और रावण को युद्ध के लिए ललकारा था। लंबे समय तक भगवान राम की सेना और रावण की सेना के बीच युद्ध चलता रहा और अंत में विजय दशमी के दिन भगवान राम की विजय हुई। राम की विजय के प्रतीक के रूप में इस पर्व को विजयदशमी के नाम से जाना जाता है और यह पर्व राम की विजय और रावण का अंत होने के उपलक्ष में ही मनाया जाता है।

दशहरे के पर्व पर मेले का आयोजन

दशहरे के पर्व पर कई जगहों पर मेले का आयोजन किया जाता है। दशहरे का पर्व हमारे हिंदू धर्म के लोगों के लिए बड़े उत्सव का त्योहार माना जाता है और इसीलिए कई जगहों पर इस दिन बड़े – बड़े मेलों का आयोजन भी किया जाता है। मेलों के आयोजन के पश्चात शाम के समय रावण का पुतला जलाकर पटाखे फोड़े जाते हैं। इस कार्यक्रम को सभी लोग अपने अपने मोहल्लों में मनाते हैं। दशहरे के दिन रावण के साथ-साथ उसके भाई कुंभकरण और रावण के पुत्र मेघनाथ के पुतले भी जलाए जाते हैं। क्षत्रिय समाज के लोग इस दिन अपने शस्त्रों की पूजा करते हैं। यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।