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Essay on dowry in hindi | Dahej Pratha Par Nibandh | दहेज़ प्रथा पर निबंध

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Essay on dowry in hindi | Dahej Pratha Par Nibandh | दहेज़ प्रथा पर निबंध

Table of Contents

दहेज़ प्रथा पर निबंध (Dahej Pratha Par Nibandh) – Essay on dowry in hindi (300 Words)

Essay on dowry in hindi : हमारे देश मे आज भी कुछ ऐसी प्रथाएं चल रही हैं जिनको शुरू करने के पीछे उद्देश्य तो बहुत अच्छा था, लेकिन आज वो एक कुप्रथा की तरह देखी जाने लगी है। ऐसी ही एक प्रथा दहेज प्रथा है, जो कि सदियों पुरानी है लेकिन आज भी चल रही है।

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दहेज प्रथा दहेज प्रथा के कई फायदे हैं लेकिन साथ मे नुकसान भी हैं। फायदे या नुकसान इस बात पर निर्भर करता है कि इस प्रथा का उपयोग करने वाले लोग कैसे हैं। कुछ लोग दहेज प्रथा को एक हथियार के तौर पर उपयोग करके दुल्हन और उसके परिवार वालों को नीचा दिखाते हैं।

कई महिलाएं आज दहेज प्रथा के कारण खराब जीवन जी रही है क्योंकि उन्हें ससुराल में सिर्फ इस वजह से कष्ट दिया जा रहा है क्योंकि वर पक्ष को अपनी इच्छानुसार दहेज नही मिला है।

दहेज प्रथा के नुकसान.

दहेज प्रथा से होने वाले नुकसान निम्नलिखित है:-

  1. साधारण जीवन जीने को मजबूर – बेटी के जन्म लेने के साथ ही उसके विवाह के लिए पैसे जोड़ना शुर कर दिया जाता है क्योंकि पता है कि दहेज देना होगा। इसका असर यह होता है कि परिवार एक साधारण सी जिंदगी जीता है।
  2. शिक्षा पर खर्च न करना – परिवार का फर्ज यह होता है कि बच्चो को पढ़ा लिखाकर काबिल बनाए, पर आमदनी तो सीमित है। उसी से पढ़ाई करानी है, पैसे जोड़ने है, घर खर्च चलाना है, ऐसे में पढ़ाई पर होने वाला खर्च बहुत सीमित रहता है।
  3. कन्या भ्रूण हत्या – लड़कियों को जन्म ही नही लेने दिया जाता, जिससे कि दहेज आदि देने के नौबत ही न आए। इसी लिए कई लोग कन्या भ्रूण हत्या करवाते हैं, और लड़कों को जन्म लेने देते हैं क्योंकि उनसे परिवार को दहेज मिलेगा।

उपसंहार.

दहेज प्रथा के कई दुष्परिणाम है लेकिन फिर भी समाज मे यह प्रथा आज भी चल रही है। लेकिन अब जरूरत है कि कुछ कड़े कानून लाए जाएं और इस प्रथा को पूरी सख्ती के साथ बंद करवाया जाए।

दहेज़ प्रथा पर निबंध (Dahej Pratha Par Nibandh) – Essay on dowry in hindi (400 Words)

दहेज प्रथा, शादी से जुड़ी एक प्रथा है जिसमें वधु के परिवार वाले शादी में खूब सारा सामान और धन बेटी के ससुराल वालों को देते हैं।

दहेज प्रथा मुख्य रूप से हिंदू धर्म की प्रथा है जो हर जाति में चलती है। बस अंतर यह होता है कि कुछ जाति के लोग दहेज में ऊँची रकम देते हैं, वही कुछ जाति के लोग उतना पैसा नही देते हैं।

दहेज प्रथा एक ऐसी प्रथा है जिसकी शुरुआत नए जोड़े को जीवन मे सभी सुविधाओं की चीज़ें देने के लिए हुई थी। लेकिन बीते कुछ वर्षों में दहेज प्रथा का दुरुपयोग बहुत अधिक हुआ है, और इसका सबसे बुरा असर महिलाओं पर हुआ है।

प्राचीनकाल मे दहेज क्यों दिया जाता था?

दहेज एक पुरानी प्रथा है। इसकी शुरुआत के पीछे एक अच्छा उद्देश्य था। पहले के जमाने मे लोगो के पास इतने संसाधन नही होते थे। इसलिए लोग अपनी इच्छानुसार नए जोड़े को कई तरह के समान देते थे ताकि उन्हें नया जीवन शुरू करने में किसी चीज़ की कमी न हो।

लेकिन यह अपनी इच्छा दे होता था, किसी पर कोई दबाव नही रहता था। लेकिन अब इस प्रथा के दुष्प्रभाव भी देखने को मिलने लगे हैं।

दहेज प्रथा के क्या नुकसान है?

दहेज प्रथा के कई नुकसान आजकल सामने आने लगे हैं। शादी के वक़्त दुल्हन के परिवार में इस बात की बहुत ज्यादा चर्चा होती है कि इस लड़के से शादी करने पर इतना दहेज देना पड़ेगा।

यानी जितना अच्छी कमाई करने वाला वर होगा, उतना ही ज्यादा दहेज भी देना पड़ेगा। यदि लड़का सरकारी नौकरी में है तो दहेज और ज्यादा हो सकता है।

कई ऐसे केस भी सुनने में आते रहते हैं कि दहेज न देने के कारण दुल्हन को उसके ससुराल में उचित सम्मान नही मिलता है, वह घरेलू हिंसा का शिकार हो रही है।

कम दहेज के स्थिति में कई लड़कियों को जीवन भर ससुराल में ताने सुनने पड़ते हैं। इन सब बातों से यह स्पष्ट है कि दहेज प्रथा आजकल कितना ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।

यदि किसी परिवार में ज्यादा पैसा नही है और उनके घर मे बेटी है तो यह 100 फीसदी तय है कि उनके घर वाले इस चिंता में होंगे कि बेटी का विवाह कैसे होगा।

उपसंहार

दहेज प्रथा तभी तक सही है जब तक लड़की के माता पिता और घर के सदस्य अपनी इच्छा से दहेज देते हैं। लेकिन कानून की दृष्टि से देखे तो दहेज लेना और देना दोनों की कानूनन जुर्म है, और ऐसा करते पाए जाने पर जेल हो सकती है।

दहेज़ प्रथा पर निबंध (Dahej Pratha Par Nibandh) – Essay on dowry in hindi (500 Words)

आजकल शादी में बहुत ज्यादा पैसा खर्च होने लगा है इसकी एक बड़ी वजह दहेज प्रथा है। दहेज प्रथा के कारण कई महिलाओं का वैवाहिक जीवन अच्छा नही रहता है, कई कन्याओं को भ्रूण हत्या का शिकार होना पड़ता है।

दहेज प्रथा क्या है?

दहेज प्रथा हिन्दू धर्म मे खूब प्रचलित है। इस प्रथा के अंतर्गत वधु पक्ष वाले वर पक्ष को दहेज देते हैं। दहेज में काफी कीमती सामान, सोना, चांदी, बाइक के साथ साथ पैसा भी दिया जाता है।

इस प्रथा की सबसे बुरी बात यह है कि लोग खुलकर बिना किसी शर्म के दहेज ही माँग करते हैं, और माँग पूरी न होने पर शादियाँ भी टूट जाती है।

अर्थात इस बात को ज्यादा महत्व नही दिया जाता कि वर और वधु एक दूसरे के साथ काफी खुश रहेंगे। बस दहेज न मिलने पर शादियाँ तोड़ दी जाती है।

दहेज प्रथा बनता है उत्पीड़न का कारण.

दहेज प्रथा समाज के लिए एक अभिशाप है, इस बात में कोई संदेह नही है। वधु पक्ष वाले सिर्फ इस प्रथा के कारण कई बार अपमानित महसूस करते हैं। उन्हें इस बात को लेकर नीचा दिखाया जाता है कि उनके पास अपनी बेटी की शादी करने के पैसे नही है।

इस प्रथा का सबसे ज्यादा बुरा असर महिलाओं पर पड़ता है, जिन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की हिंसाओं को शिकार होना पड़ता है।

कई महिलाओं को अपने ससुराल में पति से लेकर बाकी सदस्यों के द्वारा जीवनभर दहेज को लेकर ताने सुनने पड़ते हैं, ऐसे में पति-पत्नी के बीच प्रेम कैसे उपज सकता है।

दहेज प्रथा के नुकसान.

दहेज प्रथा के नुकसान निम्नलिखित हैं:-

अच्छे संबंध न बन पाना.

विवाह दो लोगों का मेल है, जो जीवन एक साथ बिताने का संकल्प लेते हैं। लेकिन लेकिन यह मेल होगा या नही, इसको दहेज के अनुसार निर्धारित किया जाता है। अगर मुँह मांगा दहेज मिला तो विवाह होगा, और नही मिला तो नही होगा।

महिलाओं पर अत्याचार.

यदि दहेज जैसी कोई प्रथा नही होती तो आज महिलाओं और पुरुषों के बीच एक समानता होती,और विवाह का बाद महिलाओं को कई तरह के अत्याचार का सामना नही करना पड़ता, जो दहेज के नाम पर होता है।

कन्याओं की गर्भ में हत्या.

शादी के वक़्त दहेज में नाम पर खूब पैसा और सामान देना पड़ेगा, इस डर से कई लोग लड़कियों को जन्म ही नही लेने देते, और कन्या भ्रूण की हत्या करवा देते हैं। कानूनन जुर्म होने के बाद भी आज यह सिलसिला चल रहा है।

दहेज प्रथा को कैसे रोकें?

दहेज प्रथा की जड़ अब समाज मे काफी गहरी हो चुकी है इसलिए इसे उखाड़ फेंकना इतना आसान नही है। पर कुछ उपाय कर सकते हैं। जैसे कि:-

महिला शिक्षा पर जोर देकर.

यदि महिलाएं शिक्षित होंगी तो वह दूसरे पर निर्भर नही रहेगी और उन्हें दहेज न देने के लिए उत्पीड़न नही सहना पड़ेगा।

सख्त कानून है जरूरी.

दहेज के नाम पर हिंसा और जबरन दहेज लेने के खिलाफ बहुत कठोर कानून की जरूरत है, जिसके डर से लोग कोई गलती न करें.

उपसंहार.

दहेज प्रथा को समाप्त करना आज बहुत जरूरी हो गया है क्योंकि महिलाओं और पुरुषों के बीच के अंतर की गहरी खाई को भरने के लिए यह बहुत जरूरी है।

दहेज़ प्रथा पर निबंध (Dahej Pratha Par Nibandh) – Essay on dowry in hindi (600 Words)

भारत में दहेज प्रथा सबसे ज्यादा मात्रा में चलती थी, और भारत के कई अलग-अलग क्षेत्रों में वर्तमान समय में भी दहेज प्रथा का प्रचलन जारी है। दहेज प्रथा के बारे में विस्तार से जानने के लिए इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़ें।

प्रस्तावना

भारत में धीरे-धीरे दहेज प्रथा का प्रचलन बढ़ता ही जा रहा है, आज के इस आधुनिक जमाने में अभी दहेज प्रथा जारी है। और यह दहेज प्रथा भारत के लिए एक अभिशाप के रूप में फैल चुका है, और इस दहेज प्रथा के कारण बेटी के जन्म लेते हैं। ज्यादातर माता-पिता के सर पर चिंता का बोझ सवार हो जाता है।

भारत में जब भी लड़की पैदा होती है, तो सबसे बड़ी चिंता उसके विवाह की हो जाती है। क्योंकि विवाह के समय लड़की को दहेज देना पड़ता है, और यह सोच दहेज प्रथा जैसी सामाजिक समस्या को उत्पन्न करती है।

वर्तमान समय में कन्या भ्रूण हत्या में कमी देखने को मिलती है। लेकिन देश के कई घरों में बेटी पैदा होते ही उनके घर में एक भोज सवार हो जाता है। जो कि एक दहेज प्रथा है, और आज भी दहेज प्रथा हिंदू समाज के सर पर एक बहुत बड़ा कलंक है।

दहेज प्रथा समस्या की शुरुवात कब हुई

दहेज प्रथा की शुरुआत प्राचीन काल कल से हुई है, क्योंकि रामायण और महाभारत में भी जब घर की बेटी को विदाई देते थे। उस समय माता पिता अपने कन्या को दहेज के रूप में कुछ धन और संपत्ति देते थे, लेकिन उस समय दहेज को लोग स्वार्थ भावना से नहीं लेते थे, और लड़के वालों की ओर से दहेज की मांग भी नहीं हुआ करती थी।

लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, हिंदू धर्म में जाति-पाती छुआ-छूत सती-प्रथा और दहेज प्रथा जैसी बुराइयां भी बढ़ने लगी। और उसके बाद दहेज प्रथा को एक व्यापार के रूप में ले लिया गया।

दहेज प्रथा के शुरुआती समय में दहेज में जेवर, कपड़े फर्नीचर आदि घर का सामान दिया जाता था। लेकिन अब तो लड़के वाले दहेज के बहाने लड़की के परिवार से बड़ी रकम भी मांगने लग गए हैं। साथ ही अगर लड़का कोई सरकारी नौकरी करता हो तो दहेज की मांग भी ज्यादा हो जाती है।

दहेज प्रथा के दुष्परिणाम

दहेज प्रथा हिंदू समाज के लिए एक बहुत बड़ा अभिशाप है। और दहेज प्रथा के हिंदू समाज में कई दुष्परिणाम भी होते हैं। लेकिन सभी दुष्परिणाम को देखते हुए भी अब तक दहेज प्रथा पर रोक तक नहीं लगी है।

दहेज प्रथा के दुष्परिणाम निम्नलिखित हैं

1. विवाह के समय लड़के वालों द्वारा मांग की गई दहेज रकम में कोई कमी होती है, तो बिना शादी किए बरात वापस ले जाते है।

2. जब लड़की को दहेज में कम सामान और रकम दी जाती है। तो लड़की को ससुराल वाले कई यातनाएं देते हैं, और उसके साथ मारपीट भी करते हैं।

3. दहेज की मांग के बाद भी अगर दहेज पूरी तरह से नहीं दिया जाता है। तो विवाह के बाद लड़की को कई गलत बहानो से तालाक भी दे दिया जाता है।

4. दहेज के कारण कभी-कभी लड़की के ससुराल वाले लड़की को जलाकर मार ही देते हैं, और यह घटना हिंदू समाज में कई बार सामने भी आई है।

5. दहेज प्रथा एक प्रकार से कैंसर की तरह समाज में फैल रही है और हिंदू समाज को नष्ट कर रही है।

निष्कर्ष

दहेज प्रथा एक कारण नारियों को कई प्रकार के दुख को सहना पड़ता है। इसलिए वर्तमान समय में हमें हर घर तक इस संदेश को पहुंचाना है, कि दहेज लेना पाप है और दहेज देना सही नहीं है, और अगर इस संदेश से लोगों के अंदर कुछ जागरूकता उत्पन्न होती है। तो जल्दी हमारे समाज से दहेज प्रथा नष्ट हो जाएगी। और हमारा भारत एक उन्नत व शांतिपूर्ण देश बन जाएंगा।

दहेज़ प्रथा पर निबंध (Dahej Pratha Par Nibandh) – Essay on dowry in hindi (700 Words)

प्रस्तावना:- हमारे देश में आज के समय दहेज प्रथा एक मुख्य समस्या बनकर उभर रही है। सती प्रथा बंद होने के बाद अब जाति प्रथा और दहेज प्रथा देश के लिए मुख्य समस्या है। दहेज प्रथा के कारण लाखों लोगों की जिंदगी खत्म हो जाती है़। कई लोगों को यह दहेज प्रथा मरने के लिए विवश कर देती है। तो कई लोगों को दहेज प्रथा के लिए मार दिया जाता है। हमारे देश में यह दहेज प्रथा समाज के लिए एक कुप्रथा बन गई है। दहेज प्रथा को रोकने के लिए समाज द्वारा और सरकार द्वारा कई प्रयास किए गए। लेकिन इस पर कोई असर नहीं हुआ।

दहेज-प्रथा का इतिहास

दहेज प्रथा एक पुरानी प्रथा है। माना जाता है, कि त्रेता युग में भगवान श्री राम जी को राजा जनक ने बहुत सारा धन और द्रव्य दहेज के रूप में दिया गया था। जब उनकी शादी देवी सीता से हुई थी। इसके बाद द्वापर युग में कंस ने अपनी बहन देवकी को धन और वस्त्र दहेज के रूप में दिए थे। उसके बाद से यह प्रथा आज भी चल रही है और आज के समय यह दहेज प्रथा एक समस्या बन चुकी है।

दहेज का वर्तमान स्वरूप

आज के समय में यह दहेज प्रथा एक विकराल समस्या बन चुकी है। दहेज प्रथा की शुरुआत कई वर्षों पहले हुई थी। दहेज प्रथा का वर्तमान स्वरूप इतना विकराल बन गया है, कि लोगों के गला घोटने तक की बातें आ जाती है। मानवता के लिए दहेज प्रथा एक विपदा बन कर उभरी है। लोग दहेज के रूप में धन और माया लेकर डकार जाते हैं।

उनको कोई लज्जा और ग्लानि नहीं आती है। कई जगहों पर शादी से पहले दहेज की मांग की जाती है और मजबूरन लोगों को दहेज देना पड़ता है। इतना ही नहीं कई जगहों पर शादी में दहेज न देने पर महिलाओं के साथ अत्याचार किया जाता है। कई महिलाओं को दहेज ना देने के कारण मार दिया जाता है। तो कई महिलाओं को मरने के लिए मजबूर कर दिया जाता है। इस दहेज प्रथा का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव महिलाओं पर पड रहा है।

दहेज का अर्थ और दहेज देने का कारण (Essay on dowry in hindi)

दहेज का मतलब यह है, कि विवाह के अवसर पर कन्या पक्ष के द्वारा वर पक्ष को सम्मान के रूप में धन और सामान उपहार में दिया जाता है। विवाह के समय यह दान करना एक प्रकार का रिवाज है और आज के समय में दहेज प्रथा का नाम बहुत अधिक प्रचलित हो गया है।

दहेज प्रथा के जरिए दहेज देने का एक मुख्य कारण है। कहा जाता है, कि समाज में महिलाओं की तुलना में पुरुष को ज्यादा महत्व दिया जाता है। पुरुष के सामने नारी को हीन और उपेक्षित समझा जाता है। नारी कि हिनता को दूर करने के लिए पुरुष पक्ष को सम्मान स्वरूप दहेज दान किया जाता है। दहेज देने की यह प्रक्रिया आज के समय में स्वास्थ बन चुकी है और इसीलिए हर रोज भारत की बेटियां दहेज की बलि चढ़ती है।

दहेज का दुष्परिणाम

आज के समय दहेज प्रथा एक मुख्य दुष्परिणाम बन चुका है। लोगों की विश्वास की भावना दहेज प्रथा के कारण और दहेज के कारण कई क्राइम करवा देती है। लोग दहेज के कारण महिलाओं के साथ अत्याचार करना और महिलाओं को जान से मार देना ऐसे घातक कदम उठा देते हैं। इस दहेज के कारण लाखों बेकसूर महिलाएं आए दिन दहेज की बलि चढ़ती है।

इतना ही नहीं आज के समय लोगों की यह भावना शादी से पहले ही दहेज के लिए कन्या पक्ष के लोगों पर दबाव बनाना आम बात हो गया है। जिससे कन्या पक्ष के लोग कर्जा लेकर दहेज देने की कोशिश करते हैं और जो दहेज नहीं दे पाते हैं। उन्हें जिंदगी भर ताने सुनने पड़ते हैं। इतना ही नहीं महिला के साथ अत्याचार करना भी शुरू कर देते हैं। कहीं पर महिला को इतना मजबूर करते हैं, कि महिला को खुद फांसी का फंदा लगाना पड़ जाता है। महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचार जिसका एक मुख्य कारण यह दहेज है।

निष्कर्ष

दहेज प्रथा आज के समय की एक मुख्य कुप्रथा है। इसे हम समय को मिलकर रोकना जरूरी है। दहेज प्रथा के कारण आए दिन भारत की बेटियां अपनी जान गवा रही है। दहेज के कारण लोग महिलाओं की जान तक ले लेते हैं। सरकार द्वारा इस प्रथा को रोकने के लिए कई प्रयास किए गए लेकिन इस पर कोई असर नहीं पड़ा है। हमें मिलकर इस प्रथा को रोकने का प्रयास करना चाहिए।

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