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Essay on Developing of India in Hindi | Development of India | Rural | Agriculture | Skill | Technology

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Essay on Developing of India in Hindi: भारत इस वक़्त एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था है और वैश्विक मंच पर आज भारत की साख काफी बढ़ चुकी है। आगे आने वाले वक़्त भारत दुनियाँ की एक बड़ी ताकत बनकर उभरेगी।

आज हम Eassy on Development of India in hindi के जरिए जानेंगे भारत की विकास यात्रा के बारे में।

किस तरह से हमारा देश गुलामी की बेड़ियों से निकलकर अपना विकास किया है और आज हमारा देश कहा खड़ा है।

Students, Development of India in hindi Language में लिखे इस निबंध का उपयोग अपनी परीक्षाओं में कर सकते हैं। इसे बहुत ही आसान शब्दों में लिखा गया और सभी जरूरी जानकरी को समाहित करते हुए।

प्रस्तावना.

कई बड़ें और जानकर लोगो के जरिए हम यह काफी पहले से सुनते आए हैं कि 21 वी सदी एशिया की सदी होने वाली है। आज से कुछ वक्त पहले तक इस बात पर इतना यकीन नही होता था, लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए कह सकते हैं ऊपर कही गई बात अक्षरशः सच है।

यह सदी एशिया की सदी इस वजह से बनने वाली है क्योंकि भारत अब खड़ा हो चुका है। दुनियाँ का सबसे बड़ा लोकतंत्र अब अपनी हुंकार भर रहा है और धीरे धीरे दुनियाँ भारत की ताकत को सलाम कर रही है।

21 वी सदी एशिया की सदी तभी हो सकती है जब यह सदी भारत ही होगी। बिना भारत के विकास के इस सदी को एशिया की सदी कहना बेमानी होगी।

हमे यह होता दिख रहा है कि भारत आगे बढ़ रहा है। भारत के आगे बढ़ने से पड़ोसी देशों का भी विकास हो रहा है। भारत के संबंध खाड़ी देशों से भी बहुत बेहतर है।

वो भी इस उम्मीद से भारत की तरफ देख रहे हैं कि भारत उन्हें खेती करना सिखाये जिससे कि खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था तेल से हटकर बाकी चीजों पर भी निर्भर हो सके।

Developing India in Hindi Language निरंतर विकास करता भारत.

भारत दक्षिण एशिया का एक ऐसा देश है जो बहुत तेजी से विकास कर रहा है। भारत दुनियाँ का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के साथ साथ सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था भी है।

भारत इस वक़्त दुनियाँ का सातवां सबसे अमीर देश है लेकिन उम्मीद है कि 2025 तक भारत दुनियाँ की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जायेगा। इसके ऊपर सिर्फ अमेरिका और चीन रहेगा।

भारत की जनसंख्या 130 करोड़ से भी ज्यादा है। आगे आने वालों में यह चीन की जनसंख्या को भी पार कर जाएगा। इतनी विशाल जनसंख्या के साथ लगातार विकास पथ पर आगे बढ़ते रहना एक चुनौती भरा काम है लेकिन भारत कई वर्षों से इसे करता आ रहा है।

ग्रामीण भारत का विकास Rural Development of India in hindi.

महात्मा गाँधी ने एक बार कहा था कि भारत की जान गाँव मे बसती है। इसलिए जबतक भारत के गाँवों का विकास नही होगा तब तक देश का विकास होना असंभव है।

7 दशक पहले गाँधी जी की यह बात पूरी तरह से सही है। आज हम देखते हैं कि भारत सर्विस सेक्टर में तो काफी मजबूत बन चुका है जबकि मैन्युफैक्चरिंग में आज भी काफी पीछे है।

यह इस वजह से हुआ क्योंकि हमने देश के ग्रामीण इलाकों को महत्व नही दिया। ग्रामीण विकास का मतलब है देश ले गाँव मे रह रहे लोगों की आमदनी बढ़ाना और उनके जीवन स्तर को ऊँचा करना।

2011 की जनगणना में देश को यह पता चला था कि 68.84% जनसंख्या तो गाँवों में रहती है। ऐसे हालात में गाँवों का विकास न होना चिंताजनक बात है।

2011 की ही जनगणना में यह बात सामने आई थी कि देश की 61.5% जनसंख्या आज भी कृषि पर निर्भर है। फर्क बस इतना है कि बड़े किसान खेती में तकनीकी का उपयोग कर रहे हैं जबकि छोटे किसान परंपरागत तरीके से खेती कर रहे हैं।

1970 के आसपास गाँव के विकास के संबंध में जो सोच थी और अब की सोच है उसमें काफी अंतर आया है। 1970 से पहले तक यह सोचा जाता था कि गाँव का विकास यानी खेती की पैदावार बढ़ानी है। लेकिन धीरे धीरे यह सोच बदलने लगी।

आज गाँव के विकास की परिभाषा ही बदल गई है। आज गाँव के विकास को तीन अलग अलग दृष्टि से देखा जाता है-

  • आर्थिक दृष्टि से
  • सामाजिक दृष्टि
  • राजनीतिक दृष्टि से

आर्थिक दृष्टि से यहां पर मतलब है सभी ग्रामीण लोगो को रोजगार के समान अवसर मिल सकें। गाँव के सबसे गरीब लोगो के पास भी रोजगार के विकल्प मौजूद हो जिससे कि वो अपना जीवन यापन कर सकें।

सामाजिक दृष्टि से विकास का मतलब है गाँव का ऐसा विकास जहाँ जातिगत भेदभाव न हो। गाँव की महिलाओं को समान अधिकार मिले और वह सशक्त हों। साथ सभी लोगो को सामाजिक सुरक्षा मिल सकें। किसी के साथ समाज मे किसी भी तरह का भेदभाव न हो।

राजनीतिक दृष्टि से विकास का मतलब है गाँव के सबसे पिछड़े व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके। साथ ही जो व्यक्ति रोजगार हासिल करने में सक्षम नही है सरकार किसी न किसी प्रकार से उनकी मदद कर सकें।

यदि इन तीन पैमाने के आधार पर विकास को मापे तो गाँवों में विकास पिछले कुछ दशकों में तेजी से हुआ है। आज देश के लगभग हर गाँव मुख्य सड़क मार्ग से जुड़ चुके हैं।

गाँव के घरों घरों में बिजली की सुविधा भी पहुँचाई जा चुकी है। सामाजिक स्तर पर देखे तो गरीब और पिछड़े लोगो को आरक्षण दिया जा रहा है।

ऐसे लोगो के लिए सरकारें भी अलग से योजनाएं निकालती है। रोजगार से साधन भी अब बढ़ गए हैं। गांव के लोगो के लिए सरकार नरेगा जैसी योजना चला रही है, जिसमें साल में 100 दिनों का रोजगार मिलना तय है।

Agricultural Development of india in Hindi  भारत मे कृषि का विकास.

भारत एक कृषि प्रधान देश है, ऐसे में यह बहुत जरूरी है कि देश मे कृषि की स्थिति अच्छी हो। आज भी देश की कुल जीडीपी में कृषि का एक बड़ा योगदान रहता है। ऐसे में कृषि को नजरअंदाज नही किया जा सकता है।

देश मे कृषि और कृषक दोनों की हालत को सुधारने के सरकारें लगातार कोशिश कर रही है। सरकार अब इस बात को सुनिश्चित कर रही है कि देश के किसानों को उनकी फसल का उचित दाम मिले।

हर किसान जब खेती करें तो उसी इस बात का भय न हो प्राकृतिक आपदा के चलते उसकी फसल खराब हो गई तो क्या होगा।

ऐसी परिस्थिति से बचने के लिए सरकार कई तरह की बीमा योजना शुरू कर चुकी है, जिन्हें बहुत ही कम कीमत में लिया जा सकता है।

देश मे लगातार कृषि में सुधार भी किया जा रहा है। आज का जमाना तकनीकी है। ऐसे में यदि किसानी में नई तकनीकी का उपगोग नही होगा तो हमें फायदा नही मिलेगा।

इसलिए आज खेती करने की नई नई तकनीकें किसानों को सिखाई जा रही है। कृषि से नए उपकरण उपयोग करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

फसल की उपज बढ़ सकें इसके लिए भारत 1970 से फर्टिलाइजर का उपयोग करता आ रहा है लेकिन अब भारत किसानी को वैज्ञानिक तरीके से करने की तरफ कदम बढ़ा रहा है।

आज खेती में फर्टिलाइजर, पेस्टीसाइड, सिंचाई की नई तकनीकी, और हाइब्रिड बीजो का काफी ज्यादा चलन बढ़ा है। वैज्ञानिक लगातार इस खोज में लगे रहते हैं कि एक अच्छा बीज कैसे बनायें।

सरकार किसानों को यह सब उपलब्ध करवा रही है। किसानी के नए तरीकों की जानकारी दे रही है। साथ किसान हेल्प लाइन जैसी सुविधाएं शुरू की गई हैं जहाँ किसान कभी भी अपनी समस्या का समाधान पा सकता है।

किस जमीन के हिसाब से क्या फसल अच्छी रहेगी यह जानकारी हर किसान को दी जाती है। साइल कार्ड की सुविधा भी शुरू की गई है, जिसकी मदद से किसान यब जान सकता है कि उसकी मिट्टी की खास बात क्या और उसमे किस चीज़ की कमी है।

Skill development in india in Hindi भारत मे कौशल विकास की स्थिति.

आजादी के बाद से भारत ने इस बात पर इतना ध्यान नही दिया था लेकिन आज देश इस बात को समझ रहा है देश तभी आगे बढ़ सकता है जब लोग कुशल हो।

इसलिए आज सरकारें कई तरह की योजनाएं देश मे चला रही है जिससे कि काम करने वालों में कौशल विकास हो सकें।

हमारे देश में मजदूरी बहुत कम है, लेकिन फिर भी दुनियाँ की बड़ी बड़ी कंपनी भारत में काम करने से घबराती हैं, इसका एक कारण है कुशल लोगो का उपलब्ध न होना।

लेकिन अब कौशल विकास के लिए कई तरह के प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं। लेकिन यदि स्थिति को गौर से देखें तो यह पता चलता है कि देश के सामने मुख्य रूप से 3 चुनौतियाँ है, जिससे कौशल विकास प्रभावित होता है-

प्राइवेट सेक्टर की कम भागीदारी.

हमारे देश का प्राइवेट सेक्टर कौशल विकास में उतना रूचि नही दिखाता जितना दिखाना चाहिए। इसका कारण यह हो सकता है कि प्राइवेट सेक्टर और पब्लिक सेक्टर के बीच उतना सामंजस्य नही है।

यदि हमें मजदूरों को कुशल मजदूर बनाना है तो यह जिम्मेदारी प्राइवेट सेक्टर को भी देनी होगी। क्योंकि प्राइवेट सेक्टर कम समय मे ज्यादा दूर तक अपनी पहुँच बना सकता है।

शिक्षा व्यवस्था में खामियां.

हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था में कौशल विकास का कोई स्थान ही नही है। यही शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी कमी है। एक रिपोर्ट में यह बताया गया था कि देश मे हर वर्ष पास होने वाले ग्रेजुएट में से सिर्फ 7% काम करने लायक होते हैं।

लेकिन इसमे जितना दोष उन विद्यार्थियों का है उतना ही दोष शिक्षा व्यवस्था का भी है। हालांकि काफी वर्षों बाद अब शिक्षा व्यवस्था में बदलाव किया गया है।

अब नई शिक्षा नीति में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि पढ़ाई के दौरान ही विद्यार्थियों का कौशल विकास भी हो।

महिलाओं की कम भागीदारी.

हमारे देश 395.2 मिलियन लोग काम करते हैं जिसमे महिलाओं की संख्या सिर्फ 91.6 मिलियन है। हमारा देश बहुत विशाल है। ऐसे में यह बहुत जरूरी है कि महिलाओं की भागीदारी भी बढाई जाए।

हालांकि यह एक बड़ी चुनौती है कि किस तरह से महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाया जाए और उन्हें ऐसे कामों में कुशल बनाया जाए जो महिलाओं के लिए सहज हो।

हमारे देश की महिलाओं को कुशल जल्दी बनाया जा सकता है, खासकर यह देखते हुए की महिलाओं में पहले से घर संभालने की एक जिम्मेदारी होती है जो वो बहुत अच्छे से निभाती हैं।

यदि इन तीन सेक्टर में सुधार कर लिया जाता है तो आगे आने वाले कुछ वर्षों में भारत मे भी कुशल कामगारों की कमी नही होगी।

Technology development of India in Hindi भारत का तकनीकी विकास.

प्राचीनकाल से ही भारत खोज के क्षेत्र मव काफी आगे रहा है। आजादी मिलने के बाद स्थिति कुछ नाजुक जरूर थी लेकिन धीरे धीरे देश अब इस क्षेत्र में भी सशक्त बन रहा है।

आज पूरे देश में 200 से भी ज्यादा रिसर्च लेबोर मौजूद है जो देश के अलग अलग हिस्सों में फैली हुई है। देश की स्पेस ऐजेंसी ISRO का बोलबाला पूरी दुनियाँ में हो रहा है।

भारत दुनियाँ का पहला देश है जो पहली की कोशिश में मंगल ग्रह के मिशन को सफल बना पाया है। भारत ने अपना पहला चाँद मिशन चंद्रयान इतना सस्ता बनाया था कि उससे मंहगी तो हॉलीवुड की फिल्में बन जाती है।

यदि कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर के क्षेत्र की बात की जाए तो इसमे भी भारत का लोहा पूरी दुनियाँ मानती है। हालांकि यह बात भी सच है कि हम रिसर्च और डेवलपमेंट में ज्यादा खर्च नही करते हैं।

लेकिन संभावनाओं का असीम भंडार भारत के सामने है। देश को अब अपने रिसर्च में ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, ताकि हमें अपनी जरूरतों के लिए किसी दूसरे देश पर निर्भर न रहना पड़े।

How to develop India in Hindi भारत का विकास कैसे करें.

भारत के बहुत विशाल देश है, जिसका विकास तेजी से करना इतना आसान नही है। लेकिन यदि पूरा देश मिलकर संकल्प लें तो अगले आने वाले 10-15 सालों में देश का स्थिति को बदल सकते हैं।

भारत की सबसे बड़ी ताकत है यहां के युवा। यदि युवा शक्ति का सही दिशा में उपयोग किया जाए तो देश के विकास में काफी अहम रोल निभा सकते हैं।

देश के विकास के लिए जरूरी है कि हम आत्मनिर्भर बने। हमारा देश रोजगार देने वाला देश बने। इसके लिए जरूरी है कि एक योजनाबद्ध तरीके से देश के नए उद्योग धंधों को शुरू करवाया जाए।

देश मे कुशल कामगारों की कमी के कारण कई बड़ी विदेशी कंपनियां देश मे निर्माण कार्य शुरू नही करती है। इसलिए जरूरी है कि कामगारों को कुशल बनाया जाए।

हमारे देश मे नया बिज़नेस खोलना आज भी बहुत मुश्किल माना जाता है। इसलिए बिज़नेस खोलने के नियमों को थोड़ा आसान बनाया जाए।

हमारे देश का सबसे बड़ी ताकत यहां के मध्यवर्गीय परिवार है। सबसे ज्यादा कामगार इन्ही परिवारों से आते हैं। इसलिए इनकी शिक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

देश का विकास महिलाओं के योगदान के बिना बहुत मुश्किल है। इसलिए महिलाओं का शिक्षित होना और अपने पैरों पर खड़ा होना बहुत आवश्यक है।

निष्कर्ष.

इस बात में कोई संशय नही है कि आगे आने वाला वक़्त भारत है। लेकिन अभी भी कई तरह की खामियां मौजूद है, जिनकी वजह से देश के विकास में काफी रुकावट आ रही है।

हमारा देश एक लोकतांत्रिक देश है, जहाँ हमें सभी की आवाज सुननी है लेकिन देश के विकास के समझौता नही होना चाहिए क्योंकि देश है तो हम है।

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