Essay on climate change in hindi | जलवायु परिवर्तन पर निबंध हिंदी में

Essay on climate change in hindi

Essay on climate change: जलवायु परिवर्तन आज के वक़्त की एक सबसे बड़ी समस्या बन गई है। पृथ्वी पर जमी बर्फ पिघल रही है, जिससे समुद्र का जल स्तर बढ़ रहा है। कई जानवरो को अनकूल जलवायु नहीं मिल पा रही है, जिससे उनका जीवन खतरे में पड़ गया है।

जलवायु परिवर्तन से जुड़े ये कुछ ऐसे परिणाम है जो हमको साफ साफ दिख रहे है, लेकिन इसके दूरगामी परिणाम और भी भयावह हो सकते है।

(Essay on climate change) जलवायु परिवर्तन पर निबंध शिक्षकों का भी एक पसंदीदा टॉपिक है,जिस वजह के कई परीक्षाओं में यह निबंध पूछा जाता है। ESSAY ON CLIMATE CHANGE IN HINDI में आज इस विषय पर चर्चा करने वाले है,जिसमे हम जानेंगे की जलवायु परिवर्तन के क्या कारण है और इससे कैसे बचा जा सकता है।

Essay on climate change in hindi (जलवायु परिवर्तन पर निबंध हिंदी में) – (300 Words)

प्रस्तावना

हमारे स्वास्थ्य के लिहाज से कोई क्षेत्र अच्छा है या नहीं, यह जानने के लिए हम उस क्षेत्र की जलवायु के बारे में पता करते है।

हम लोगो की अधिकतर गतिविधियाँ उस क्षेत्र की जलवायु के ऊपर निर्भर करती है, यानि उस क्षेत्र की जलवायु से हमारा जीवन जुड़ा हुआ है। लेकिन जब जलवायु में बदलाव होने लगता है तो हमारा जीवन भी प्रभावित होने लगता है। इसीलिए जलवायु परिवर्तन पर बहुत अधिक चिंता व्यक्त की जाती है।

जलवायु और मौसम में अंतर (Differences about climate and weather)

जलवायु का वर्णन मौसम से मिलता जुलता है। इस वजह से हमारे अंदर यह भ्रान्ति पलने लगती है की जलवायु और मौसम एक ही है, लेकिन यह सत्य नहीं है।

जलवायु और मौसम में अंतर है। किसी क्षेत्र की जलवायु जानने के लिए हमें उस क्षेत्र के मौसम पर एक लम्बा अध्ययन करना पड़ता है। मौसम के स्वभाव के आधार पर उस क्षेत्र की जलवायु निर्धारित होती है।

यदि किसी क्षेत्र में गर्मी में अधिक गर्मी और सर्दी में अधिक सर्दी पड़ती है तो वह विषम जलवायु कहलाती है। यदि ठंडी में कम ठण्ड और गर्मी में कम गर्मी पड़े तो वह जलवायु सम जलवायु कहलाती है।

कई देशो की जलवायु ठंडी है क्योंकि वहाँ गर्मी के दिनों में भी बहुत ज्यादा गर्मी नही पड़ती है। जबकि कई देशों की जलवायु गर्म होती है क्योंकि वहां ठंडी की तुलना में गर्मी के मौसम ज्यादा होते है और साथ मे गर्मी भी ज्यादा पड़ती है।

जलवायु परिवर्तन होने पर चिंता क्यो?

हम जलवायु परिवर्तन की बात करते हैं लेकिन जलवायु में बदलाव आना पूरी तरह से एक प्राकृतिक घटना है। आज से लाखों वर्ष पहले धरती में हिमयुग था।

पूरी पृथ्वी बर्फ का एक बड़ा गोला थी। लेकिन धीरे धीरे जलवायु बदली और यह गर्म होने लगी। कई हजार साल लगे इस पूरी प्रक्रिया को होने में, तब जाकर पृथ्वी हम लोगो के लिए अनुकूल हुई।

लेकिन चिंता की बात यह नही है जलवायु बदल रही है। असल चिंता की बात यह है कि इस बार जलवायु में परिवर्तन प्राकृतिक रूप से नही हो रहा है बल्कि हम इंसानों की गतिविधियों के कारण हो रहा है।

यदि आज से हजारों वर्ष पहले की बात करें तो तब इंसानों के पास कोई मशीन नही होती थी और न ही वो इस तरह का प्रदूषण फैलाते थे।

लेकिन जब से दुनियाँ का अद्योगिकीकरण हुआ है तब से लेकर अब तक पृथ्वी का तापमान 0.9०C बढ़ चुका है, जो यह बताता है कि पृथ्वी कितनी तेजी से गर्म होती जा रही है।

निष्कर्ष.

यदि हम जलवायु परिवर्तन की घटना को गंभीरता से नही लेंगे तो एक दिन पृत्वी हमारे रहने के लायक नही रहेगी। इसलिए जरूरी कदम उठाना बहुत आवश्यक है।

Essay on climate change in hindi (जलवायु परिवर्तन पर निबंध हिंदी में) – (400 Words)

प्रस्तावना.

यह बात सर्वविदित है आज वैश्विक समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौती जलवायु परिवर्तन है। इस चुनौती से निपटना समूचे विश्व की पहली प्राथमिकता बनती जा रही है।

जलवायु परिवर्तन की समस्या आगे आने वाले दिनों में कितनी विकराल समस्या बनकर सामने खड़ी हो सकती है इस बात का अंदाजा कुछ आंकड़ों के आधार पर लगाया जा सकता है।

19 सदी की समाप्ति के वक़्त पृथ्वी के सतह के तापमान जहाँ 1.62 डिग्री फेरनहाइट था। अब इसमे
0.9०C की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। बर्फ के रूप में जमा पानी पिघल रहा है समुद्र में मिल रहा है जिससे समुद्री जल स्तर 8 इंच और बढ़ गया है।

जलवायु परिवर्तन क्या है? (What is Climate change)?

जलवायु और जलवायु परिवर्तन को समझने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर गौर करें:-

  • किसी क्षेत्र के मौसम का लंबे समय तक अध्ययन करने के बाद जो औसत मौसम निकलता है, उसे जलवायु कहा जाता है।
  • हर क्षेत्र की जलवायु होती है जो कि अलग अलग होती है। क्षेत्रीय जलवायु के अलावा वैश्विक जलवायु भी होती है।
  • जलवायु हमेशा परिवर्तनशील रही है लेकिन इसे परिवर्तित होने में हजारों साल का वक़्त लगता है।
  • जब किसी क्षेत्र के औसत मौसम में बदलाव आने लगता है तो वह जलवायु परिवर्तन कहलाता है।
  • जलवायु परिवर्तन को हम सब भी महसूस कर सकते हैं। यदि भारत के संदर्भ में देखे तो पहले यहाँ 4-4 माह गर्मी, ठंडी और बारिश के मौसम होते थे। लेकिन अब करीब 8-9 माह गर्मी, 1-1.5 माह बारिश और 1-2 माह ही ठंडी पड़ती है।

जलवायु परिवर्तन के कारण (Due to climate change)

जलवायु परिवर्तन के मुख्य कारण निम्नलिखित है:-

  • ग्रीन हाउस गैसों का अधिक उत्सर्जन

पृत्वी के वातावरण को गर्म बनाए रखने के लिए ग्रीन गैसे बहुत जरूरी है।वायुमंडल के सबसे ऊपरी परत ग्रीन हाउस गैसों की है, जिसमें मीथेन,CO2 , नाइट्रस ऑकसाइड जैसी गैसें शामिल होती है।

लेकिन इन गैसों की मात्रा यदि बढ़ जाए तो वातावरण गर्म होने लगता है। वर्तमान समय में यही हो रहा है। आज मानवीय गतिविधियों की वजह से इन गैसों का उत्सर्जन बहुत तेज हो गया है, और इनकी मात्रा जरूरत से ज्यादा हो गई है। इस वजह से पृथ्वी लगातार गर्म होती जा रही है।

  • वनों की कटाई से

दुनियाँ में जनसंख्या वृद्धि दर पिछले 100 सालों में बहुत तेज हुई है। इनके रहने के लिए और उद्योग-धंधों को शुरू करने के लिए जगह की जरूरत पड़ रही है। इसी वजह से वनों की कटाई होने लगी।

CO2 के सबसे पहले बड़े अवशोषक पेड़ ही है। पेड़ो की कटाई से वह CO2 गैस भी वातावरण में आ गई जो उनके अंदर थी। पेड़ो की कमी के कारण CO2 के अवशोषण की दर भी कम हो गई।

  • शहरीकरण

लोगो की जीवनशैली भी जलवायु परिवर्तन का एक कारण है। आजकल लोग अधिक सुविधाजनक जीवन पाने की चाह में शहरों की तरफ जा रहे हैं। इस वजह से शहरों पर बोझ बढ़ रहा है। सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है, जिसका असर वातावरण पर पड़ रहा है।

निष्कर्ष

जलवायु में आने वाले इस बड़े बदलाव के जिम्मेदार कही न कही हम इंसान ही है। इसीलिए यह हमारी जिम्मेदारी है कि वक़्त रहते कुछ जरूरी कदम उठाएं।

Essay on climate change in hindi (जलवायु परिवर्तन पर निबंध हिंदी में) – (1000 Words)

हर साल आने वाली बाढ़, तूफानों की संख्या में बढ़ोत्तरी, शरीर जला देने वाली गर्मी यह सब इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि प्रकृति असंतुलित हो रही है। इसी असंतुलन के कारण हमारी पृथ्वी के जलवायु में परिवर्तन आ रहा है।

कई वैज्ञानिकों का यह मानना है कि पिछले 2 शताब्दी में पृथ्वी में प्राकृतिक बदलाव जितनी तेजी से हुए है उतना तेजी से कोई भी प्राकृतिक बदलाव पहले कभी नही हुआ।

यदि इस बात में सच्चाई है तो कही न कही इस बदलाव में हम लोगो का भी बहुत बड़ा हाथ है। आज पूरा विश्व स्वच्छ ऊर्जा पर जोर दे रहा है।
पृथ्वी के बदलते मौसम पर बात करने के लिए एक मंच पर बैठ रहे हैं। लेकिन अब जरूरत है इस दिशा में काम करने की ताकि जलवायु संतुलित रहे।

जलवायु परिवर्तन कैसे होता है? (How does climate change happen)?

किसी भी ग्रह की जलवायु परिवर्तन में सूर्य की ऊर्जा सबसे प्रमुख होती है। सूर्य से पृथ्वी को ऊर्जा मिलती है। जब सूर्य के ऊर्जा पृथ्वी पर टकराती है तो कुछ मात्रा में सतह के द्वारा अवशोषित कर ली जाती है।

बाकी ऊर्जा को परावर्तित कर दिया जाता है। इसके बाद वह ऊर्जा पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरती हुई पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर चली जाती है।

लेकिन जब पृथ्वी के वायु मंडल में CO2 जैसी ग्रीनहाउस गैसे बढ़ जाती है तो ये सूर्य की ऊर्जा को अवशोषित कर लेती है। इस वजह से अतिरिक्त ऊर्जा पृथ्वी के बाहर नही निकल पाती।

यह ग्रीनहाउस गैसों में संग्रहित होती है। फिर इन्ही गैसों की वजह से पृथ्वी का तापमान बढ़ने लगता है।

जलवायु परिवर्तन के प्रमुख कारण. (Major causes) 

जलवायु परिवर्तन के प्रमुख कारण निम्नलिखित है:-

  • जलवायु परिवर्तन के प्राकृतिक कारण

जैसा कि हम जानते है कि अरबों साल पुरानी हमारी पृथ्वी कई बार गर्म और ठंडी हो चुकी है। पृथ्वी को गर्म और ठंडा करने में कई प्राकृतिक कारणों का भी योगदान रहता है। जैसे कि सूर्य की तीव्र ऊर्जा, ग्रीनहाउस गैसों का प्राकृतिक रूप से बढ़ना, पृथ्वी के ध्रुवों का बदलना।

लेकिन रिकॉर्ड बताते हैं कि 20वी सदी के मध्य से जलवायु में जितना तेजी से बदलाव आया है वह प्राकृतिक तो बिलकुल भी नही है। हाँ, इस बात से इनकार नही किया जा सकता है कि प्राकृतिक कारण बिलकुल भी नही है।

लेकिन प्राकृतिक कारणों का प्रभाव जलवायु परिवर्तन में बहुत कम है।

  • जलवायु परिवर्तन के मानवजनित कारण

ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन हमारे द्द्वारा वातावरण में बहुत ज्यादा किया जा रहा है वही असल कारण है जलवायु परिवर्तन होने का।

पृथ्वी को गर्म रखने में ग्रीनहाउस गैसों का अहम योगदान है। लेकिन जब ये गैसे अधिक मात्रा में मौजूद हो जाती है तो वातावरण गर्म होने लगता है।

IPCC की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले कुछ सालों में कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड में जितनी ज्यादा वृद्धि हुई है वह अभूतपूर्व है।

बिजली और ऊर्जा के लिए हम कई सालों से कोयला, तेल, गैस का उपयोग कर रहे हैं जो इन गैसों का सबसे ज्यादा उत्सर्जन करते हैं। आज यातायात के साधनों में भी बहुत ज्यादा बढ़ोत्तरी हो गई है।

पेड़ों के कटाव से काफी ज्यादा मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन हो रहा है और यह वातावरण में मिल रही है।

जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव.(Side Effects of climate change in hindi)

जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव निम्नलिखित है:-

  • मौसमों में बदलाव

जलवायु परिवर्तन सबसे ज्यादा प्रभाव मौसमों में दिख रहा है। आजकल मौसम के बारे में कोई अनुमान नही लगाया जा सकता। मौसमों में बहुत ज्यादा अनियमितता हो गई है। कही बारिश न होने के कारण सूखा पड़ रहा है, तो कही बाढ़ आ रही है।

गर्मी कभी कभी इतनी ज्यादा पड़ती है कि लोगो की मृत्यु हो जाती है। ठीक ऐसा ही हाल ठंडी का भी है।

  • समुद्रीय जल स्तर का बढ़ना

ग्लेशियर में जमी बर्फ पिघल रही है जिसकी वजह से समुद्र का जल स्तर बढ़ रहा है। समुद्रीय जल स्तर बढ़ने से समुद्र के किनारे बसे देशो और शहरों के डूबने के खतरा बढ़ गया है।

  • कई प्रजाति विलुप्ति की कगार पर

कई जानवर ठंडे इलाकों में रहना पसंद करते हैं, वही कुछ जानवर गर्म जगह में रहना पसंद करते हैं। लेकिन लेकिन जलवायु में बदलाव हो रहा है जिससे भौंगोलिक स्थिति बदल रही है।

कई जानवर दूसरी जगह पलायन कर सकते हैं। लेकिन ऐसे जानवर जो पलायन नही कर पायेंगे उनकी प्रजाति विलुप्त हो जाएगी।

  • स्वास्थ्य पर असर

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन के अनुसार हर वर्ष 2,50,000 लोगो की मृत्यु जलवायु में आए बदलाव के कारण होती है। गर्मी बढ़ने के कारण दिल से संबंधी दिक्कत, किडनी से संबंधित दिक्कत, सिर से संबंधित दिक्कत बहुत ज्यादा बढ़ रही हैं।

  • समुद्र के जल में एसिडिटी बढ़ना

जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल से जितनी भी गैस निकलती है उसका एक तिहाई या एक चौथाई हिस्सा समुद्र के द्वारा अवशोषित कर लिया है। जब दुनियाँ में उद्योग की शुरुआत नही हुई थी उस वक़्त की तुलना में आज समुद्र के द्वारा 30%ज्यादा गैसों का अवशोषण किया जाता है।

इस वजह से समुद्री जल में एसिड की मात्रा बढ़ रही है, जिसका बुरा प्रभाव समुद्रीय जीवो पर पड़ रहा है।

  • कृषि पर प्रभाव

जलवायु परिवर्तन के कारण गेहूं, चावल, दाल आदि के उत्पादन में बहुत कमी देखने को मिलेगी। प्रतिकूल मौसम होने के कारण कई फसलें प्रभावित होंगी। पानी की कमी के कारण सूखे की स्थिति बनेगी जिससे खेती करना बहुत मुश्किल हो जाएगा और खाद्यान की समस्या खड़ी हो जाएगी।

जलवायु परिवर्तन को रोकने के उपाय (Measures to prevent climate change)

जलवायु परिवर्तन किसी एक व्यक्ति के प्रयास से नही रुक सकता है, क्योंकि इसकी मुख्य वजह उद्योंग है। आज हमारा जीवन पूरी तरह ऊर्जा के ऊपर निर्भर है।

पर ऊर्जा उत्पादन का तरीका अच्छा नही है क्योंकि इससे ग्रीनहाउस गैसे पैदा होती हैं। इसलिए सभी देशों को मिलकर यह फैसला करना चाहिए कि कोयले पर आधारित ऊर्जा का उत्पादन कम करेंगे।

साथ ही सभी विकसित देशों को नवीन और उच्चतम तकनीकी गरीब और विकासशील देशों को देना चाहिए ताकि वह भी स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन कर सके ।

इसके अलावा कुछ छोटे उपाय निम्नलिखित है:-

  • यातायात के साधनों का कम उपयोग करना।
  • सीएफएल बल्ब का उपयोग करना।
  • पेड़ों के कटाव पर रोक लगाना
  • अधिक से अधिक पेड़ों को लगाना।
  • बारिश के पानी को संग्रहित करना।
  • प्लास्टिक का कम उपयोग करना।
  • ऊर्जा का अपव्यय न करना।
  • अधिक से अधिक पैदल चलना।
  • कूड़े आदि को जला देना।
  • दिन के वक़्त बल्ब न जलाना।
  • साफ सफाई को बढ़ावा देना।

निष्कर्ष

आज भी कुछ लोगो का मानना है कि जलवायु परिवर्तन की स्थिति कुछ वक्त के लिए ही है। लेकिन यह सच नही है। हमें प्रकृति के संकेतों को समझना होगा और कुछ ठोस कदम उठाने होंगे।