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Essay on Chalk and Duster in Hindi | हिंदी में चाक और डस्टर पर निबंध | Source of economic development

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खड़िया (Essay on Chalk and Duster) :- खड़िया एक ऐसा अवसादी शैल है, जो चिकना और सफेद रंग का होता है। यह चूना पत्थर का एक ऐसा रूप है, जिसमें खनिज कैल्साइट से बना छिद्रयुक्त शैल होता है। इससे श्यामपट्ट (ब्लैकबोर्ड) में आसानी से लिखा जा सकता है। यह एक प्रकार का प्लास्टिक ऑफ पेरिस है। जो एक स्वेत चूर्ण के रूप में होता है।

खड़िया का उपयोग: 

  1. खड़िया एक ऐसा अवसादी शैल है, जो श्यामपट्ट पर लिखने के लिए प्रयोग किया जाता है।
  2. इसका प्रयोग धरती का पीएच(PH) ठीक करने में किया जाता है।‌ जिससे संयोजित दो अलग अलग पदार्थों का अम्लीय और क्षारिया गुण पता करने में मदद मिलता है।
  3. कई सारे दंत मंजन ऐसे होते हैं, जिसमें खड़िया का विशेष प्रयोग देखा जाता है।

खड़िया का ऐतिहासिक स्वरूप: 

ऐतिहासिक रूप में खड़िया का विशेष महत्व प्रारंभिक काल से ही देखा जा रहा है। प्राचीन काल से रेखाचित्र इत्यादि बनाने के लिए इसका प्रयोग होता आया है। मुख्य रूप से मिस्त्र के लोग इसका उपयोग कई प्रकार की कलाकृति में किया करते थें, जैसे अपने पूर्वजों का चित्र बनाना, जानवरों तथा पशुओं का चित्र किसी पत्थर या दिवाल पर बनाना आदि। परंतु कई वर्षों तक इसका वास्तविक उपयोग अन्य स्थानों में अधिक होने लगा। अतः धीरे-धीरे इसकी उपयोगिता का ज्ञान होने पर शिक्षा संस्थानों में इसका प्रयोग होने लगा। इसके पश्चात शिक्षा के क्षेत्र में इसका प्रयोग विद्यार्थियों द्वारा व्यापक रूप से किया जाने लगा और यह लिखवाट में काफी सस्ता एवं सहज स्रोत बन गया। यह कलम अथवा पेंसिल के मुकाबले काफी सस्ता और सुविधाजनक साधन के रूप में उभर कर सामने आया। अक्षरों अथवा वाक्यों के गलत होने पर इसे झारण की सहायता से आसानी से मिटाया जा सकता है। इस कारण इसका महत्व धीरे-धीरे अधिक बढ़ता गया। 

चौक बनाने की प्रक्रिया : 

भारत के अधिकांश विद्यालयों में चौक का विशेष प्रयोग होता है । चौक बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के कच्चे माल की आवश्यकता होती है जो निम्नलिखित है:-

  1. प्लास्टर ऑफ पेरिस 8.5 रुपया प्रति किलोग्राम।
  2. किरोसिन ₹40 प्रति लीटर
  3. जिप्सम पत्थर को पीसने वाली मशीन
  4. मिश्रण बनाने का टैंक
  5. चौक के आकार का सांचा।

                     चौक बनाने के लिए उपर्युक्त उपकरणों का व्यवहार अत्यंत आवश्यक होता है। चौक बनाने की प्रक्रिया को सांचा अथवा मशीन द्वारा पूर्ण होती है। 

सांचे द्वारा चौक निम्नलिखित प्रक्रिया द्वारा बनाई जा सकती है:

  1. सबसे पहले प्लास्टर ऑफ पेरिस का घोल पानी की सहायता से बना ली जाती है। यह बात ध्यान रहनी चाहिए कि प्लास्टर ऑफ पेरिस की मात्रा सही तरीके से रहनी चाहिए ताकि चौक जल्दी ना टूटे।
  2. उसके बाद चौक वाले सांचे में केरोसिन या अन्य तेल को ब्रश की सहायता से लगाए जाते हैं ताकि चौक सांचे में से आसानी से निकल सके।
  3. इसके बाद चौक को किसी सांचे में डालकर 20 मिनट के लिए छोड़ दिया जाता है।
  4. उसके बाद चौक को सांचे से निकालकर धूप में सुखाया जाता है। अच्छी तरह से चोक को सुखाने के बाद उसकी पैकिंग कर दी जाती है।

          100 चौक बनाने के लिए आपको लगभग 200 ग्राम प्लास्टर ऑफ पेरिस की आवश्यकता होती है। 

मशीन की सहायता से चौक निम्नलिखित प्रक्रिया द्वारा बनाई जाती है: 

  1. सांचे की सहायता से जिस प्रकार चौक का निर्माण होता है, उसी प्रकार मशीन का प्रयोग कर चौक बनाई जाती है।
  2. मशीन की सहायता से चौक बनाने पर परिश्रम की कम आवश्यकता होती है और चौक बेहद कम समय में अधिक संख्या में बनाई जा सकती है एवं यह प्रक्रिया आर्थिक सहायता भी प्रदान करता है।

व्यापार के रूप में चौक का महत्व: 

भारत के अधिकांश विद्यालयों में चौक के अत्याधिक प्रयोग से धीरे-धीरे इसके महत्व में काफी वृद्धि हुई है। इसके साथ ही चौक के लघु व्यापार से बेहतर लाभ कमाया जा सकता है। चौकी व्यापार से प्रति महीने 8000 से ₹10000 कमाए जा सकते हैं। इस व्यापार में यदि मशीन बड़े आकार का होता है तो उत्पादन एवं मुनाफा अधिक होता है तथा श्रमिकों की भी कम आवश्यकता पड़ती है। 

                     चौक का व्यापार विद्यालयों, शिक्षण संस्थाओं, स्टेशनरी दुकानों आदि स्थानों पर आसानी से की जा सकती है। चौक की गुणवत्ता अच्छी होने पर कम समय में ही चौक की अधिक बिक्री प्रारंभ हो जाती है।‌ 

चौक के व्यापार का पंजीकरण: 

चौक का उत्पादन व्यापक स्तर पर करने के लिए व्यापार का पंजीकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके लिए आर ओ सी तथा ट्रेड लाइसेंस की आवश्यकता होती है। आपको सबसे पहले इसके लिए बैंक अकाउंट बनानी पड़ेगी तथा उसमें पैन कार्ड से जुड़ी हुई कुछ सामान्य जानकारियां देनी होंगी। आप अपना फॉर्म एस एस आई के रूप में भी स्थापित कर सकते हैं।

चौक की सही पैकेजिंग (Essay on Chalk and Duster)

चौक बनाने के बाद इसकी पैकिंग करना अत्यंत आवश्यक होता है क्योंकि चौक पर अधिक बल पड़ने पर यह आसानी से टूट जाया करते हैं। अतः इसके लिए आवश्यक है कि चौक को डिब्बे में भरते वक्त काफी सावधानी बरतनी चाहिए। चौकी व्यापार का पंजीकरण करने पर चौक का पैकेट एवं ब्रांड आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं जो व्यापार के लिए काफी उपयोगी होता है।

चौक के नुक़सान (Essay on Chalk and Duster)

कई बार लोगों को चौक खाने की बुरी लत लग जाती है। बचपन में कई बार छोटे बच्चे चौक खाते हैं परंतु कई बार ऐसा भी देखा जाता है कि वयस्क लोगों के अंदर भी चौक खाने की प्रवृत्ति पाई जाती है। वास्तविकता यह है कि चौक खाना शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक होता है।

    चौक खाने से कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होती है जो निम्नलिखित है-

  1. चिकित्सकों के अनुसार जो लोग चौक का अधिक सेवन करते हैं उनके शरीर में खून की कमी होती है तथा एनीमिया बीमारी उत्पन्न होती है।
  2. चौक सेवन करने वाले लोगों के शरीर में आयरन के अवशोषण में बाधा पहुंचने लगती है जिससे शरीर कमजोर हो जाता है।
  3. चौक में कई ऐसे विषैले पदार्थ मौजूद होते हैं, जो शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ी कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न करते हैं।

आधुनिकता के कारण कम प्रयोग होना

आज सब कुछ बहुत आधुनिक हो गया है, जिसके कारण चौक का उपयोग बहुत ही कम हो गया है। चौक से जब शिक्षक ब्लैक बोर्ड पर लिखते हैं तो काफी मात्रा में सफेद धूल उड़ता है, जिससे कई लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। यही कारण है कि आजकल चौक का उपयोग बहुत कम होता है।

चाक और डस्टर की भूमिका

चॉक एंड डस्टर दोनों एक दूसरे के साथी हैं जब जब श्यामपट्ट पर कुछ गलती हो जाती है तो डिस्टर्ब की सहायता से ही उसे मिटा कर के ही को शिक्षक अच्छे से बच्चों को पढ़ाते हैं। अगर डस्टर को बनाने के लिए जरूरी सामग्री की बात करें तो यह एक आयताकार छोटा सा एक लकड़ी का टुकड़ा तथा उसके ऊपर सफेद रुई या कपड़े का गत्था जो ब्लैक बोर्ड पर लिखे हुए लिखावट को मिटाने के काम आता है। यह कई प्रकार का और कई रंग का होता है,काला,पीला,सफेद।

 निष्कर्ष

चॉक लिखावट का एक ऐसा जरिया है जिसके महत्व में दिन प्रतिदिन वृद्धि होती दिख रही है।  कलम अथवा पेंसिल के स्थान पर चॉक का प्रयोग आने वाले भविष्य के लिए अत्यंत उज्जवल है। यह हमारे देश के आर्थिक स्थिति की वृद्धि में पूर्ण रुप से सहयोग करती है एवं इसका कारण यह है कि विभिन्न प्रकार की विदेशी कंपनियों के द्वारा तैयार किए गए कलम अथवा पेंसिल के स्थान पर चॉक का प्रयोग एवं इसके व्यापार में वृद्धि काफी सराहनीय है। इससे चौकी व्यापार में भी तीव्रता से विधि देखी जा रही है जो प्रत्यक्ष रूप से हमारे देश की आर्थिक स्थिति को ऊंचा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसका प्रयोग शिक्षा संस्थानों से लेकर बड़े-बड़े परियोजना कार्य में भी किया जाता है। 

                      आज के आधुनिक समय में धीरे-धीरे चौक की मांग कम होती चली जा रही है जिसका मुख्य कारण विभिन्न प्रकार के विदेशी कंपनियों द्वारा तैयार किए गए फाउंटेन पेन अथवा पेंसिल है। अतः देश की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर चौक के प्रयोग को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है जिससे व्यापार को विशेष रुप से सहयोग प्राप्त हो एवं हमारा देश विकसित देशों की श्रेणी में सम्मिलित होकर एक अलग पहचान एवं उच्च स्थान बना सकें।

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