Essay on Autobiography of a Book in Hindi | एक पुस्तक की आत्मकथा पर निबंध इन हिंदी

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Essay on Autobiography of a Book in Hindi | एक पुस्तक की आत्मकथा पर निबंध इन हिंदी

Essay on Autobiography of a Book in Hindi:  पुस्तक हर कोई व्यक्ति के लिए काफी जरूरी चीज बन चुकी है। कई लोग अपनी दैनिक जीवन में पुस्तक का महत्वपूर्ण योगदान रखते हैं। स्कूल के विद्यार्थी पुस्तक के जरिए ही अपनी पढ़ाई कंप्लीट करते हैं। पुस्तक जो कि एक ज्ञान का भंडार है। इस पुस्तक के जरिए ही विद्या का प्रसारण होता है। आज हम इस आर्टिकल में पुस्तक की आत्मकथा के बारे में बात करेंगें।

मैं एक किताब हुँ। मैं अपना परिचय देना चाहती हूँ। मुझे लोग ज्ञान का भंडार भी कहते हैं। इसके अलावा मैंने अपने अंदर विद्या का एक समुद्र जमा कर रखा है। मेरे बिना शिक्षा का एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक प्रसार होना असंभव है। इतना ही नहीं शिक्षित लोग भी मेरे बिना नहीं हो पाते। मेरे बिना किसी भी व्यक्ति के लिए शिक्षा प्राप्त करना संभव नहीं है। शिक्षा के क्षेत्र में मैं सबसे महत्वपूर्ण और मेरी कल्पना करना असंभव है। शिक्षा के क्षेत्र में अध्यापक और विद्यार्थी के बीच का कनेक्शन में हूं।

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मैं एक किताब हूँ। मुझे पहचाना जरूरी है। मैं अपने आप को कैसे साबित करूं। मैं अपने अस्तित्व को किस प्रकार के लोगों के बीच प्रस्तुत करु। आज के आधुनिक जमाने में मेरा महत्व कम होता जा रहा है। इतना ही नहीं आज के समय में मेरी छपाई भी मशीनों द्वारा की जा रही है। आधुनिक जमाने ने हाथों से किताबों को लिखना बंद कर दिया है। मैं अपनी परिभाषा कैसे साबित करूं इसका मुझे अंदाजा नहीं है।

इस दुनिया में हजारों लोग मेरी व्याख्या करते हैं। लाखों लोगों के जीवन में पुस्तकों का महत्व बहुत अधिक है और मनुष्य अपने जीवन का सबसे करीबी दोस्त भी पुस्तकों को मानता है। इसीलिए मेरे पास मां सरस्वती का आशीर्वाद और वास है। मैंने अपने ज्ञान और शक्ति के आशीर्वाद को हजारों लोगों तक साझा करके अनगिनत लोगों को अज्ञानी से विद्वान बनाया है। जो लोग मेरे से दोस्ती करते हैं। मुझे अपना कीमती समय सबसे अधिक देते हैं और उससे अधिक समय मेरे साथ बिताने में रुचि दिखाते हैं। उन लोगों को मैं अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है। जो लोग मेरा अध्ययन करते हैं। उनके जीवन में प्रकाश अवश्य फैलता है।

मैं किसी भी व्यक्ति को विद्या का समृद्ध व्यक्ति बनाने ताकत रखती हूं। जो लोग मेरा सम्मान करते हैं। उन लोगों को मैं हर समय उचित स्तर पर ले जाने की शक्ति प्रदान करती हो दुनिया उन्हें सलाम करती है। जो मुझे दिल से महसूस करते हैं। इतना ही नहीं जो लोग अपना समय किताबें पढ़ने में बिताते हैं। उनके पास ज्ञान का भंडार होता है।

आज इस दुनिया में देखा जाए तो जितने भी विद्वान अशिक्षित लोग हैं। उन सब की ऊंचाइयों के पीछे मेरा हाथ है। यह सभी लोग मेरा अध्ययन करके और मेरे से दोस्ती करके ही ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं। इन लोगों ने अपने जीवन का ज्यादातर समय मुझे देखकर जीवन की सफलता हासिल की है। चाहे वह किसी भी क्षेत्र में क्यों ना हो। उदाहरण के तौर पर मेरे से दोस्ती करके विशेषज्ञ,डॉक्टर, जनहित में काम करने वाला, आईएएस अधिकारी, ज्ञान देने वाला शिक्षक, इंजीनियर और वैज्ञानिक इनमें से कोई भी हो सकता है।

मैंने इस दुनिया में लोगों के भविष्य को एक सही दिशा दिखाई के लोगों के भविष्य को चमकाने में मेरा महत्वपूर्ण हिस्सा है। मैंने लोगों को सक्षम बनाया है और समाज में नाम रोशन करने के काबिल बनाया है। मेरे से दोस्ती करने के पश्चात की लोग अपनी आजीविका का प्रबंध करने के लिए प्रथम हो पाए हैं। जो लोग मेरे साथ हमेशा जुड़े रहते हैं। वे अपने जीवन में प्रगति की राह पर आगे बढ़ते रहते हैं। अपना नाम कमाते हैं। जो लोग मेरे से दूर रहते हैं और मेरा सम्मान नहीं करते हैं। मैं भी उन लोगों में रुचि नहीं रखती हूं। मैं अपनी जीवन की दौड़ में पीछे रह जाते हैं। आज के युग में अनपढ़ व्यक्ति सबसे बड़ा मूर्ख माना जाता है। इतना ही नहीं अज्ञानी होना एक श्राप से कम नहीं है। जीवन को उज्जवल बनाने के लिए शिक्षा का होना जरूरी है और यह सकता मेरे बिना पाना असंभव है।

मैं अपने अलग-अलग रूप में अलग अलग नाम से लोकप्रिय हो मैं विभिन्न विषयों में बटी हुई हुँ। मुझे अलग-अलग रंगों और रूपों में डाला गया है। कहीं पर हल्की किताबों के रूप में तो कहीं पर भारी किताबों के रूप में मेरा प्रचार हो रहा है। मेरे प्रश्न अलग-अलग रंगों में है। मेरा वर्गीकरण अलग-अलग विषय के अनुसार अलग-अलग किया गया है। मतलब यह है की सुविधा के अनुसार मुझे अलग-अलग भागों में बांटा गया है। उदाहरण के तौर पर बात की जाए तो छोटे बच्चों की किताबें, मेडिकल की किताबें, विज्ञान वर्ग,वाणिज्य वर्ग, कला वर्ग की किताबें इत्यादि।

मेरा विकास पृथ्वी के अस्तित्व में आने के लाखों साल बाद हुआ। जब पृथ्वी अस्तित्व में आई, उसके बाद धीरे-धीरे पृथ्वी पर जीवन संभव हुआ। मानव जाति का विकास हुआ। मनुष्य अलग-अलग विषयों के बारे में जानकारी एकत्रित करने शुरू हुए। तब से मेरा जन्म हुआ। उसी जानकारी को संयुक्त करके अलग-अलग हिसाब से अलग-अलग जगह पर रखा गया और धीरे-धीरे मेरा प्रचार प्रसार बढ़ता गया। आज के समय के अनुसार मै शिक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हूँ।

जब शुरुआत में मेरा आविष्कार किया गया। तब मुझे कागज के पन्नों की बजाय कपड़े और पत्तों के रूप में बनाया गया। जिस पर स्याही के माध्यम से लिखा गया। उसके बाद में जब कागज का आविष्कार हुआ। तो मुझे आज का आधुनिक स्वरूप मिला जो आपके सामने उपलब्ध है।

मेरा मनुष्य के साथ बहुत ही गहरा और पुराना रिश्ता बन चुका है। कुछ लोग मुझे बहुत ज्यादा प्यार करते हैं। तो कुछ लोग कम प्यार करते हैं और कई लोग ऐसे भी हैं। जो मेरे अंदर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। लेकिन जो लोग मेरे अंदर दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। उनके जीवन में अंधकार कोई नहीं मिला सकता मुझे किसी भी मनुष्य से कोई समस्या या आपत्ति नहीं है। क्योंकि मेरा एक ही उद्देश्य है। जो मुझे अपने मन से जोड़ता है या मेरे साथ बेहतर तरीके से गहरी दोस्ती रखता है उसके भविष्य में चमत्कार जरूर होगा।

लेकिन एक बात मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं है, कि जब मुझे कूड़ेदान मैं बेच दिया जाता है। वो भी चंद पैसों के लिए, तो मुझे बहुत बुरा लगता है। इससे बेहतर तो यह होता है, कि मुझे किसी गरीब बच्चे के सामने पेश किया जाए या किसी जरूरतमंद छात्र को आधी कीमत में दे दिया जाए। आपके द्वारा उठाया गया महत्वपूर्ण कदम हमारे देश के सामाजिक विकास में और गरीब बच्चों के भविष्य को उज्जवल बनाने में मदद करेगा।

मुझे शिक्षा के क्षेत्र के साथ-साथ धार्मिक ग्रंथों के रूप में और अन्य अलग-अलग रूप में भी पाया गया है। मुझे गीता के रूप में भी पाया गया है। इतना ही नहीं कुरान और बाइबिल के रूप में भी आपने मुझे देखा होगा।