Causes and prevention of increasing frustration among today teenagers | आज के किशोरों में बढ़ती कुंठा का कारण और उपाय

Causes and prevention of increasing frustration

Causes and prevention of increasing frustration : परिवार के सदस्यों एवं समाज के अन्य इंसानों द्वारा अत्यधिक उत्पीड़ित होने पर इंसान अपने कायरता के प्रति अथवा जीवन निर्वाह के कार्य में निरंतर असफलता प्राप्त होने के कारण अपनी बुद्धि की निर्बलता के प्रति उत्पन्न होने वाला आक्रोश तथा जीवन के अंतःकरण में जीवन के प्रति घृणा उत्पन्न करता है, इसे इंसान की कुंठा कहते हैं।

वर्तमान समय में युवाओं में विशेष रुप से खिन्नता अथवा कुंठा जन्म लेते हुए दिखाई दे रही है, जो आने वाली एक उज्जवल भविष्य को अंधकारमय बना सकती है। युवाओं में उत्पन्न होने वाले खिन्नता उनके व्यक्तित्व के विकास में इतना अवरोध उत्पन्न कर देती है कि वे अपने भविष्य निर्माण के बारे में न सोचते हुए अपने अमूल्य जीवन का नाश कर देना चाहते हैं।

इसी का कारण है कि आज प्रत्येक दिन किसी ना किसी के आत्महत्या की खबरें अखबारों की सुर्खियाँ बटोर रहे होते हैं। आज का युवा वर्ग अपने युवावस्था में प्रवेश करते ही कई प्रकार के मानसिक समस्याओं का शिकार होने लगता है। अपने जीवन पारिवारिक समस्याएं, युवावस्था के अत्यधिक जोश अथवा संबंधों में किसी भी प्रकार के तनाव की स्थिति होने पर मानसिक संतुलन बिगड़ने लगता है और युवा वर्ग बढ़ती हुई कुंठा अथवा मानसिक खिन्नता के शिकार हो जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, कम उम्र के युवाओं में विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ जैसे मधुमेह, रक्तचाप ‌ देखने को मिल रही है, जिसका एक अन्य कारण कुंठा भी है।

               हमारे देश में लगभग 50% लोग मानसिक समस्या से जूझ रहे हैं और आंकड़ों के अनुसार यह भी देखा गया है कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं इसमें विशेष रूप से भागीदार है। आमतौर पर गरीबी, रिश्ते संबंध, पारिवारिक स्थिति, अशिक्षा, नशे, बेरोज़गारी एवं जीवन में असफलता किशोरों के कुंठा का विशेष कारण है। हमारी सामाजिक स्थिति कुछ इस प्रकार है कि मानसिक तनाव अथवा कुंठा जैसी समस्याओं को कोई बीमारी नहीं माना जाता परंतु यदि वास्तविकता देखी जाए तो यह एक ऐसी परिस्थिति है जिसमें विशेषकर युवा स्वयं को काबू में नहीं रख पाते और आत्महत्या जैसे बड़े कदम उठा लेते है।

आंकड़ों के मुताबिक हमारे देश में लगभग 36 फीसद लोग इस समस्या के अंतर्गत आते हैं। जिस युवा पीढ़ी के जरिए‌‌ भारत एक वैश्विक शक्ति का निर्माण करना चाहता है, उसी युवा पीढ़ी की यह स्थिति अत्यंत दयनीय है। एक तनावमुक्त स्वस्थ समाज की स्थापना के लिए युवाओं को कुछ विशेष कदम उठाने होंगे, जिसके फलस्वरूप वे एक नवीन भारत का निर्माण कर सकें और उसकी प्रगति के लिए अग्रसर हो सके।

अवसाद या कुंठा से संबंधित हैरान करने वाले आंकड़े (Shocking statistics related to depression or frustration)

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में प्रतिवर्ष लगभग 8,00,000 लोग आत्महत्या करते हैं जो किसी और घटना में जाने वाली मौतों की संख्या में सबसे अधिक है। जिसका सबसे बड़ा कारण लोगों में अवसाद की भावना है। सबसे अधिक 17-35 साल की उम्र के लोग ही ऐसा कदम उठाते हैं। यह लड़कों और लड़कियों की संख्या में समान रूप से विधमान है।

युवाओं में कुंठा एक बीमारी की तरह फैलता जा रहा है जिसमें भारत की संख्या बहुत अधिक है। भारत में 50% बच्चे तथा 75% युवा अवसाद, से ग्रसित हैं। कुंठा, अवसाद या डिप्रेशन लोगों में यह गांव की तुलना में महानगरों में यह महामारी की तरह फैला हुआ है।

युवाओं में कुंठा ग्रस्त होने के कई महत्वपूर्ण कारण (Many important reasons for frustration in youth) :-

1.बच्चों में पढ़ाई को लेकर बढ़ता तनाव

आज के समय में कई माता-पिता अपने जीवन के भागदौड़ में इतने फंस चूंके हैं की उन्हें अपने बच्चों को ध्यान देना का बिल्कुल भी समय नहीं है। जिसके परिणाम स्वरूप बच्चों में अवसाद के गुण आ जाते हैं और उनकी परवरिश खराब होने लगती है। बच्चों का किसी से बात न करना, अकेले रहना, छोटी-छोटी बातों में चिढ़ना यह सभी उन्हें एक ऐसे अंधेरे कुंवे में धकेल देता है जिससे बाहर निकलना कठिन हो जाता है।

कई मामलों में कुंठा या अवसाद के लक्षण का बढ़ने का कारण हमारी शिक्षा प्रणाली का भी है। आज की शिक्षा प्रणाली में वह  ताकत नहीं है जो एक उज्जवल भविष्य को तैयार कर सके। आज की शिक्षा पूरी तरह से व्यापारिक कारोबार बन गयी है। जिसके कारण बच्चों को वह उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं होती है जिससे वे अपने भविष्य की चिंता में आत्महत्या जैसे गलत कदम उठाने से पीछे नहीं हटते हैं। इसके अलावा आज पढ़ाई और अन्य क्षेत्रों में प्रतियोगिता इतनी बढ़ गई है कि बच्चे तनाव के चपेट में आने लगे हैं।

आप इस बात से अंदाज़ा लगा सकतें हैं की यदि कोई 10 हजार सरकारी नौकरी पद का आवेदन पत्र निकलता है, तो उसकी भर्ती के लिये लाखों की संख्या में छात्र आवेदन करते हैं। इतनी प्रतियोगिता से छात्रों के दिमाग पर इतना अधिक तनाव बढ़ता है कि उनके मानसिक और शारीरिक विकास में बाधा पड़ती है। बच्चे ख़ुद से ही तथा आस पास के लोगों से भी उनकी प्रतियोगिता की भावना के कारण वे उग्र होते चले जा रहे है। जो की अवसाद को काफी अधिक बढ़ावा देता है।

2.बेरोज़गारी और बढ़ती विषमता

हर माता पिता चाहते हैं की उनका बच्चा पढ़ लिख कर कुछ अच्छा काम करें, कहीं बेहतर आमदनी वाली नौकरी करें। लेकिन जब पूरी दुनिया की आर्थिक व्यवस्था त्रस्त हो तो वहां कोई फ़ैली महामारी आग में घी डालने का काम करती हैं तथा एक बड़ी मात्रा में बेरोजगारी देखने को मिलती है। आज कोरोना वायरस के कारण केवल भारत में ही 12 करोड़ के आस पास नौकरियां जा चुकी हैं।

कही व्यवसाय पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं जिसके कारण लोगों में मानसिक असंतुलन की संभावना बढ़ गयी है। जहाँ पढ़े-लिखे युवा नौकरी के लिए दफ्तरों में चक्कर काट रहे हैं, वहीं कम पढ़े लिखे और अनपढ़ लोगों का कोई उम्मीद ही नहीं है। बेरोजगारों का इसमें क्या हाल होगा वह अपने घरों और परिवारों के खर्च कैसे चलाएंगे बेरोजगार होने के कारण यह बहुत परेशान हो जाते हैं और यह कुंठा का शिकार होने सकते हैं।

 हर साल की तुलना में 2020 नौकरी आवेदन की संख्या में भी भारी गिरावट देखने को मिली है। जिसके कारण आज के समय में  सभी अपने भविष्य को लेकर काफी अधिक चिंतित हैं। रिपोर्ट के अनुसार साल के अन्त तक 27% लोग गंभीर अवसाद का शिकार हो जाएंगे। जो की हमारे समाज को जर्जर करने के लिये काफी अधिक है।

3.पारिवारिक या प्रेमसंबंध कटाच्छ

आज के समय में लोग चकाचौंध फिल्मी पर्दे का वह दर्शक है जहां कोई वास्तविकता नहीं होती है। लोगों की जिन्दगी केवल परिवार के प्रेम अभाव से, प्रेम में धोका या असफलता से पूरी जिन्दगी नर्क सी हो जाती है। पूरी दुनिया में खास तौर पर युवाओं में जितनी भी अवसाद से सम्बंधित समस्या होती है उनमें 90% पारिवारिक समस्या या प्रेम संबंद्ध का कारण होता हैं। अकसर लोग अपनी आवश्यकता से अधिक के लालच में आ जाते है। जिससे रिस्ते बदलने में बिल्कुल भी वक़्त नहीं लगता है। प्रेम में असफलता के कारण मनुष्य अकसर एक अनुचित कदम उठा लेता हैं जिससे एक हस्ती खेलती जिंदगी बर्बाद हो जाती है।

4.इंटरनेट का प्रभाव

नए युग के साथ-साथ लोगों की नई-नई समस्याएं हमेशा उत्पन्न होती रहती है उनमें से एक इंटरनेट भी बहुत अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आजकल के बच्चों के पास इतनी कम उम्र में मोबाइल फोन होने के कारण वह  सोशल मीडिया पर इतना अधिक समय व्यतीत करते हैं कि जिसका कोई भी इंसान गलत फायदा उठा सकता है।

आजकल बच्चों के लक्षण में यह देखा जाता है कि यदि उन्हें मोबाइल फोन या फिर इंटरनेट ना दिया जाए तो वह फिर अपने माता-पिता के सामने जिद करने लगते हैं। और  जब उनकी मांगे पूरी नहीं होती है तो वह बुरा मान जाते हैं जिससे वे आत्महत्या जैसे कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटते हैं। बच्चों में गेमिंग का बहुत अधिक पागलपन होने के कारण भी बहुत देर देर तक गेम खेले जाने के कारण उनका स्वास्थ्य में हानि पहुंचती है और इसी तरह से अवसाद की समस्याएं उत्पन्न होने लगती है।

 अवसाद से बचने के उपाय (Ways to avoid depression)

.आमतौर पर, डिप्रेशन या अवसाद वह अवस्था है, जिसमें इंसान दुख, हानि, असफलता और अक्षमता के शीर्ष भावना का अनुभव करता है। डिप्रेशन एक तरह की भावना है जिसके कारण लोग अपने आसपास के वातावरण में जो भी अनुभव करते हैं देखते हैं उसी रूप में अपनी  प्रतिक्रिया करते हैं। यह आज के समाज के लिए इतना बड़ा मुद्दा बन चुका है कि सरकार को विचार करना चाहिए।

अवसाद के कई कारण हो सकते हैं काम अधिक होना, किसी के बातों का दुख लगना, सामाजिक भेदभाव होना।अवसाद अक्सर दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर्स की कमी के कारण भी होता है। न्यूरोट्रांसमीटर्स दिमाग में पाए जाने वाले रसायन होता हैं जो दिमाग और शरीर के विभिन्न हिस्सों में  संबंध स्थापित करता है।  इनसे बचने की कई उपाय है:

1.व्यायाम करना

दोस्तों हमेशा से कहा जाता रहा है कि  स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी पूंजी है। अवसाद या डिप्रेशन जैसे घातक बीमारी लोगों के अंतर्मन में प्रवेश कर चुका है। यह मायने नहीं रखता कि आपकी उम्र क्या है लेकिन अवसाद या डिप्रेशन से बचने के लिए सबसे अच्छा और बेहतरीन तरीका व्यायाम है। अगर हर कोई अपनी जिंदगी में 30 मिनट व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लें तो हम एक हंसते खेलते और एक स्वस्थ समाज की कल्पना कर सकते हैं।

2.उचित आहार

 जितना जरूरी इंसान का अपना काम होता है उतना ही अधिक जरूरी है की हम अपने स्वास्थ्य पर भी ध्यान  दें। एक अच्छे आहार शैली से हम अपने अवसाद को दूर कर सकते हैं जैसे:- फल,दूध, सब्जियां, चावल, रोटी, vitamin ABC, आयरन, सल्फर इत्यादि।

3.भरपूर नींद

 अक्सर लोगों को समस्या होती है और लोगों का सवाल भी होता है कि उन्हें कितने घंटे सोना चाहिए लेकिन रिसर्च के अनुसार डॉक्टर भी  मानते हैं की दिन में लगभग 7 घंटे जरूर सोना चाहिए। जिससे हम एक ऊर्जावान और अच्छे स्वास्थ्य की कल्पना कर सकें। जिससे हमारा अवसाद भी दूर हो औऱ हमेशा सकारात्मक  सोच बना रहे।

4.सामाजिक सक्रियता

 जब आपको बहुत ही अधिक बेचैनी हो, या फिर आप बहुत अधिक परेशानी हो यदि आप अपनी बात किसी को कहते हो तो हमारा मन बहुत अधिक हल्का हो जाता है। जब आप मन में सकारात्मक भावना रखते हैं तब आप एक अच्छी संवेदना व्यक्त करते हैं और इस तरीके से आप अपना अवसाद या डिप्रेशन तुरंत गायब कर सकते हैं।