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Baru Sahib Weather Essay in Hindi | बरु साहिब का मौसम एस्से इन हिंदी

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भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य के एक सुदूर कोने में स्थित बरू साहिब (Baru Sahib Weather Essay in Hindi) स्थान, जिसे वैली ऑफ डिवाइन (Valley of Divine) के नाम से भी जाना जाता है।

बरु साहिब को तपोभूमि यानी ध्यान की भूमि भी कहा जाता है। 1867 में जन्मे संत अत्तर सिंह जी, मस्तुएन वाले के एक सपने की सच्चाई है, बरु साहिब। उन्होंने बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में हिमालय पर एक ऐसे स्थान की परिकल्पना की थी। जहां से युवा आत्माएं सुसज्जित हो पाए। उनका ख्याल था कि आध्यात्मिक और आधुनिक वैज्ञानिक शिक्षाओं के मिश्रण से विश्व में सार्वभौमिक भाईचारे का संदेश फैल जाएगा। इतनी महान सोच रखने वाले संत अत्तर सिंह जी मस्तुएन वाले 1927 में परलोक सिधार गए।

बरू साहिब (Essay on Baru Sahib) को 1956 में उनके भक्त शिष्य तेजा सिंह ने भाई इकबाल सिंह और भाई खेम सिंह की सहायता से दुनिया भर में प्रकट किया था। 

1877 में भारत के पंजाब में संत तेजा सिंह का जन्म हुआ था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा पंजाब के एक स्कूल से हुई थी और पंजाब के एक कॉलेज से इन्होंने एमए (M.A) की डिग्री हासिल की और फिर आगे की शिक्षा के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए जहाँ हॉवर्ड यूनिवर्सिटी से इन्होंने अपनी एलएलबी (LLB) की शिक्षा प्राप्त की। 

बरु साहिब का मौसम (Baru Sahib Weather Essay in Hindi): 

बरु साहिब का मौसम प्रायः अनुकूल ही रहता है। यहाँ साल भर लोग घुमने फिरने आ सकते है। वैसे तो बारू साहिब की यात्रा का सबसे अच्छा वक्त तब होता है जब आप अपने ध्यान में पूरी तरह से डूब सके और पूरी दुनिया के झंझट और चिंता को दूर कर सके।

जनवरी का समय : 

जनवरी में बारू साहिब का सबसे उच्चतम तापमान 72°F होता है। लेकिन इस महीने करीब 78 प्रतिशत की माध्यम आद्रता बारू साहिब की यात्रा के लिए सबसे उत्कृष्ट समय है।

फरवरी का समय:

इस समय यहाँ का मौसम 70% की औसत आद्रता के साथ 41 से 81 °F के बीच रहता है। इस महीने यहां ध्यान केंद्रित करने लिए थोड़ी असुविधा होती है परंतु बारू शहर घूमने के लिए यह समय बिल्कुल सही है।

मार्च से मई का समय :

यह महीना बारु साहिब जाने के लिए अच्छा समय होता है। इस समय यहां का तापमान 36 से लेकर 108 °F तक होता है। 

जून का समय: 

बरु साहेब की यात्रा का सबसे अच्छा समय जून का महीना होता है क्योंकि इस समय यहां का तापमान 59 °F और सामान्य 113 °F होती है। इस समय यहाँ नई चीजों का पता लगाने और ध्यान केंद्रित करने के लिए अच्छा समय माना जाता है इस समय यहां 63 प्रतिशत की नमी होती है।

जुलाई से सितंबर का समय 

इस समय यहां का तापमान 61 °F से 97 °F के बीच होता है और नामी 79 प्रतिशत की सामान्य जलवायु के रूप में देखी गई है। इस समय बारू साहिब में रहने और नई चीजों की जांच करने के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है।

अक्टूबर से दिसंबर

इस समय यहां की औसत आद्रता 70% होने के साथ-साथ हवा में थोड़ी नमी होती है और औसतन तापमान 63 डिग्री फारेनहाइट होती है। इस समय यहां का अधिकतम तापमान 95 डिग्री फारेनहाइट दर्ज की गई है।बारू साहिब के लिए यह एक आदर्श मौसम कहा जाता है।

शांति की भूमि बरु साहिब (Land of Peace Baru Sahib): 

संत तेजा सिंह जी ने 1959 में 15 से 20 भक्तों के साथ अखंड पाठ साहिब का प्रदर्शन, एक मिट्टी की कुटिया में किया। अखंड पाठ साहिब और अरदास के समापन होने के बाद संत जी ने एक भविष्यवाणी कि उन्होंने कहा कि “जिस तरह एक छोटा बरगद का बीज एक विशाल वृक्ष में बढ़ता है, उसी तरह यह स्थान एक दिन आध्यात्मिक शिक्षा का एक महान केंद्र में विकसित होगा” जहां उच्च गुणवत्ता वाली वैज्ञानिक शिक्षा के साथ-साथ आध्यात्मिक शिक्षा भी प्रदान की जाएगी। यहां के तमाम विद्यार्थियों के दिलों में गुरु नानक के लिए प्यार और सम्मान की भावना होगी। 

लोगों का कहना है कि इस पवित्र स्थान पर प्राचीन समय में अत्यधिक कठिन तपस्या की जाती थी।

बरू साहिब की नींव (Baru Sahib Foundation): 

संत अवतार सिंह जी के सपनों को पूरा करने के लिए उनके शिष्य संत तेजा सिहं ने भाई इकबाल सिंह और भाई खेम सिंह को निर्देश दिया और खोज शुरू करने को कहा। खोज करने के बाद उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश के नाहन शहर के पास हिमालय के किसी निचले स्थान पर मानव जाति के लिए एक पवित्र स्थल छिपा हुआ है

हिमाचल प्रदेश का एक स्थान सोलन जिससे लगभग 60 किलोमीटर दूर तथा 40 एकड़ में फैला ठाकुर जोगिंदर सिंह के स्वामित्व में बसा एक गांव जिसका नाम था बारू। जहां एक विशाल घना जंगल था जिसके बीच बहुत सुन्दर- सुन्दर झरने थे। वहां बसंत के पास एक विशाल अखरोट के पेड़ था जिसके नीचे समय-समय पर ध्यान केंद्रित करने के लिए साधु आते रहते थे। ठाकुर जोगिंदर सिहं हमेशा उनका स्वागत करते और उन्हें अच्छे-अच्छे भोजन कराया करते थे।

संत जी की भविष्यवाणी सत्य हुई (Essay on Baru Sahib weather): 

संत तेजा सिंह ने बारू साहिब की सभी गतिविधियों और कार्यभार संभालने तथा उसके उच्च विकास की जिम्मेदारी भाई इकबाल सिंह को सौंप दी। उस समय वहाँ मिट्टी का गुरु द्वारा बनाया गया और सड़को का निर्माण भी करवाई गई थी। 1975 तक वहां वाहनों का आना जाना भी शुरू हो गया। 1981-1982 में ईंट और सीमेंट का गुरुद्वारा और आश्रम भवन का निर्माण शुरू करवाया गया।

1986 में वहां 5 छात्रों के साथ एक आश्रम भवन की शुरुआत की, जिसे वर्तमान में अकाल अकादमी के नाम से जाना जाता है। आज यह 11 मंजिला इमारत है और आज यह कुल 1538 लड़कियाँ और लड़के शिक्षा प्राप्त करते हैं। जिनमें से कुल 200 विदेशी छात्र है।

अकाल अकेडमी के अलावा द कलगीधर सोसायटी, एक अनाथालय, एक वृद्ध आश्रम, विधवाओं और निराश्रित महिलाओं के लिए एक घर और एक 280 बैड का धर्मार्थ अस्पताल, एक संगीत केंद्र तथा महिलाओं के लिए एक अध्यात्मिक अकादमी का प्रबंध भी किया गया है।

यहां 200 लड़कियों को निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है, जहां आवास और भोजन दोनों की व्यवस्था की गई है। उच्च शिक्षा के साथ-साथ बीटेक सहित 24 अन्य कोर्स करवाए जाते हैं और यहां बीएससी नर्सिंग टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर में कम से कम 2000 लड़कियों को निशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

निष्कर्ष

हिमाचल प्रदेश की सिरमौर घाटी में छुपा हुआ नहान रोड तक सोलन पर बारु साहिब स्थित है। सिरमौर घाट में बसा बरु साहिब कोई गांव या शहर नहीं है वहां केवल गुरुद्वारा ही स्थित है जो किसी कलजीधर ट्रस्ट द्वारा प्रबंधित होता है। यह एक विशेष शैक्षिक टाउनशिप है जो असल में मुख्य रूप से कनाडा से एनआरआई सिखों का एक मुख्य स्थल है। इस ट्रस्ट के द्वारा ही यहां अनन्त विश्वविद्यालय चलाया जाता है। पंजाब में दमदामा साहिब में अकिल विश्वविद्यालय भी इसी ट्रस्ट के द्वारा चलाया जाता है। अधिकांश छात्र हिमाचल या पंजाब से ही आते हैं। लेकिन इसमें कुछ एनआरआई छात्र भी मौजूद रहते हैं। 

बरु साहिब में अध्ययन का मुख्य ध्यान धर्मशास्त्र है लेकिन सामान्य  पाठ्यक्रम पर भी काफी  ध्यान दिया गया है। बरु साहिब (Essay on Baru Sahib weather) गुरुद्वारा और शिक्षा टाउनशिप की सम्पूर्ण भूमि सिरमौर घाटी में स्थित है। बरु साहिब के दरबार साहिब बिल्डिंग 6-7 मंजिला ऊंचा है। गुरुद्वारा की विभिन्न गतिविधियों के लिए विभिन्न कमरे बनाये गए हैं। यहां सौरऊर्जा को संचित रखने के लिये पहाड़ों में सोलर पेनल का बंदोबस्त किया गया है।

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